PM मोदी से मिले मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, पराली की एवज में किसानों के लिए मांगा मुआवजा

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⏱️ 6 मिनट पढ़ने का समय|📝 750 शब्द|📅 18 Oct 2018

कैप्टन अमरिन्दर सिंह द्वारा प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात

पराली जलाने की रोकथाम के लिए किसानों को मुआवज़ा देने पर ज़ोर, मोदी ने किसानों की समस्या के  प्रति हमदर्दी दिखाई

31,000 करोड़ की राशि के निपटारे के लिए प्रधानमंत्री के दख़ल की मांग

श्री गुरू नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के लिए सहायता की मांग

डेली संवाद, नई दिल्ली

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात करके धान की पराली न जलाने के एवज़ में किसानों को मुआवज़ा देने पर ज़ोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने सी.सी.एल. के 31,000 करोड़ रुपए के अंतर के निपटारे और श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व की तैयारियों के लिए सहायता को यकीनी बनाने के लिए प्रधानमंत्री के दख़ल की माँग की।

मुख्यमंत्री ने पराली जलाने की समस्या की रोकथाम के लिए किसानों को फ़सल पर 100 रुपए प्रति क्विंटल मुआवज़ा देने के लिए प्रधानमंत्री पर ज़ोर डाला। मुख्यमंत्री ने कहा श्री मोदी ने किसानों की समस्या के प्रति हमदर्दी व्यक्त की। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने श्री मोदी को बताया कि कटाई की ॠतु ख़त्म होने पर राज्य सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बावजूद पराली जलाने की समस्या और भी गंभीर रूप ले सकती है जिस कारण इसको तत्काल हल करने की ज़रूरत है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने यू.टी. चण्डीगढ़ में अधिकारियों की नियुक्ति सम्बन्धी 60:40 के अनुपात के साथ छेड़छाड़ न करने बारे केंद्र सरकार के फ़ैसले के लिए प्रधानमंत्री का धन्यवाद भी किया। यह जि़क्रयोग्य है कि पिछले कुछ हफ़्तों के दौरान कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने हरियाणा और पंजाब के बीच अधिकारियों की तैनाती और अन्य साधनों बारे संतुलन में विघ्न डालने के लिए लगातार किये जा रहे यत्नों पर सख़्त रोष प्रकट किया था क्योंकि लम्बे प्रयास के पश्चात इसको हासिल किया गया है।

पंजाब सरकार के एक प्रवक्ता ने मीटिंग बारे विस्तार में जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री ने श्री मोदी से अपील की कि साझी जि़म्मेदारी के सिद्धांत पर सी.सी.एल. के 31,000 करोड़ रुपए के अंतर के निपटारे के लिए केंद्र वित्त मंत्रालय को गौर करने के लिए कहा जाये।

पंजाब के फूड कैश क्रेडिट अकाऊंट में अंतर के पुन: निपटारे की माँग को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने श्री मोदी को बताया कि इस मसले को मुल्क के लिए अनाज खरीदने में शामिल पक्षों के दरमियान साझी जि़म्मेदारी के सिद्धांत पर सुलझाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री का ध्यान दिलाया कि यह मामला खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की अंदरूनी रिपोर्ट जिसको पी.के. झा कमेटी की रिपोर्ट के तौर पर जाना जाता है, में भी इस मामले को विस्तार में विचारा गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि 31,000 करोड़ की रकम को लम्बी मियाद वाले कजऱ्े में तबदील करने के फ़ैसले पर पुन: गौर करने के लिए वित्त मंत्रालय को नसीहत दी जाये क्योंकि साझी जि़म्मेदारी के सिद्धांत के मुताबिक इसको सिफऱ् पंजाब के सर नहीं लादा जा सकता। 

पिछले समय में भारत सरकार द्वारा राज्य सरकार को दरियादिली के साथ सहायता पैकेज मुहैया करवाने वाले मौकों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व को बड़े स्तर पर मनाने के लिए केंद्र द्वारा पंजाब सरकार को सहायता मुहैया करवाने के लिए श्री मोदी को उनकी तरफ से दिया भरोसा याद करवाया। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि इस समागम की उचित तैयारियों के लिए अपेक्षित सहायता मुहैया करवाने के लिए केंद्रीय संास्कृतिक मामलों बारे मंत्रालय और इस साल जून में कायम की राष्ट्रीय कार्य समिति को हिदायतें जारी की जाएँ।

प्रवक्ता ने बताया कि इससे पहले मुख्यमंत्री द्वारा प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर हाल ही में राज्य में भारी बारिश के कारण आई बाढ़ों स्वरूप हुए नुक्सान के लिए 800 करोड़ रुपए मुआवज़े के तौर पर दिए जाने की माँग की जा चुकी है।

अपने इस पत्र के द्वारा मुख्यमंत्री द्वारा प्रधानमंत्री को अवगत करवाया गया कि पंजाब और पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश में बीते 22 से 24 सितम्बर के दरमियान हुई मूसलाधार वर्षा के कारण राज्य में आम जनजीवन, फसलों, संपत्ति और विभिन्न स्थानों पर बुनियादी ढांचों को काफ़ी ज़्यादा नुक्सान पहुँचा है। 

मुख्यमंत्री के अनुसार राज्य में फसलों को अंदाजऩ 150 करोड़ रुपए का नुक्सान पहुँचा जबकि सडक़ नैटवर्क को 119.32 करोड़ रुपए का और बाढ़ सुरक्षा बुनियादी ढांचे और सिंचाई व्यवस्था को भी 516.51 करोड़ रुपए का नुक्सान हुआ है। इसके अलावा राज्य में जनसंख्या, पशुधन और निजी रिहायशों का 5.11 करोड़ रुपए तक का नुक्सान हुआ है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस नुक्सान के लिए मुआवज़े की माँग की जिससे इस कुदरती आफ़त से पैदा हुए हालात से राज्य को उभारा जा सके। 

















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