नगर निगम के 26 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ; ‘हाउस में जलालत, सड़क पर पिटाई’ : आखिर क्या करें अफसर, पढ़ें क्या बोले पूर्व मेयर

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⏱️ 4 मिनट पढ़ने का समय|📝 391 शब्द|📅 30 Oct 2018

महाबीर सेठ
डेली संवाद, जालंधर

नगर निगम के 26 साल के इतिहास में शायद ऐसा पहली बार हुआ है, जब नगर निगम हाउस में अफसरों की ‘जलालत’ हो रही है और बीच रो़ड अफसरों की पिटाई की जा रही है। सीनियर नेता बताते हैं कि शहर के सबसे पहले मेयर जयकिशन सैनी से लेकर सुरेश सहगल, सुरिंदर महे, राकेश राठौर और सुनील ज्योति के मेयरशिप के दौरान ऐसा माहौल नहीं था। तो क्या मौजूदा मेयर जगदीश राजा सभी चीजें मैनेज नहीं कर पा रहे हैं? आज सबसे बड़ा सवाल यही है?

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हालांकि कहा जाता है कि सुरेश सहगल जब मेयर थे, तब वे जल्दी ही ‘आपा’ खो देते थे, लेकिन इस तरह की नौबत उस वक्त भी नहीं आई थी। मौजूदा समय में तो स्थिति यह है कि नगर निगम के अफसर कंट्रोल से बाहर हो रहे हैं। कौंसलर खुद परेशान हैं। मेयर मैनेज नहीं कर पा रहे हैं।

किसी भी बीमारी को कदाचित (लाइक्ली) नहीं लेना चाहिए – सुरिंदर महे

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जालंधर के पूर्व मेयर सुरिंदर महे का कहना है कि किसी भी बीमारी को लाइक्ली यानि कदाचित या संभावित नहीं लेना चाहिए। नहीं तो बाद में ये कैंसर बन सकता है। नगर निगम में शायद यही चल रहा है। मेयर को समाधान की तरफ ज्यादा ध्यान देना होता है, क्योंकि वे नगर निगम के मुखिया होते हैं। उन्हें अफसरों और कौंसलरों के बीच बेहतर तालमेल बनाने का काम करना चाहिए। जिससे शहर का विकास भी हो सके।

मेयर-कमिश्नर दोनों फेल, अफसर बेचारे काम करें तो पिटे, न करें तो जलील हों – सुनील ज्योति

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पूर्व मेयर सुनील ज्योति ने कहा है कि नगर निगम का सिस्टम पूरी तरह से फेल हो गया है। मेयर जगदीश राजा और कमिश्नर दीपर्वा लाकड़ा बुरी तरह से फ्लाप साबित हुए हैं। दोनों लोगों को प्रशासनिक स्तर पर काम करवाना नहीं आता। नहीं तो यह स्थिति पैदा नहीं होती। सुनील ज्योति कहते हैं कि अफसर अगर फील्ड में जाकर काम करता है तो लोग उसे पीटते हैं और अगर काम नहीं करता तो निगम हाउस में जलील किया जाता है।

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https://youtu.be/c3KpmKwZdNM

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