राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रारूप को फाइऩल करने के लिए केंद्रीय सलाहकार बोर्ड की मीटिंग, ये हुए फैसले

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स्कूल बुनियादी ढांचे का स्तर ऊँचा उठाने के लिए सिंगला द्वारा केंद्र से अपील

डेली संवाद, नई दिल्ली/चंडीगढ़
पंजाब के शिक्षा मंत्री विजय इंदर सिंगला ने स्कूली बुनियादी ढांचे का स्तर ऊँचा उठाने के लिए राज्यों की मदद करने की केंद्र से अपील की है ताकि सरकारी स्कूल निजी स्कूलों का मुकाबला कर सकें। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ की अध्यक्षता में बीती शाम शिक्षा नीति सम्बन्धी राष्ट्रीय प्रारूप (डी.एम.ई.पी.) संबंधी आम सहमति बनाने के लिए बैठक हुई।

सिंगला ने देश की शिक्षा प्रणाली में प्रभावशाली बदलाव लाने के लिए सी. बी. एस. ई. के योगदान की प्रशंसा की जिसने शिक्षा स्तर में सुधार पर ध्यान केन्द्रित किया है। प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल शिक्षा (ई. सी. सी. ई.) की महत्ता पर ज़ोर देते हुए श्री विजय इंदर सिंगला ने कहा कि शिक्षा नीति सम्बन्धी राष्ट्रीय प्रारूप (डी.एन.ई.पी.) में साल 2025 तक ई.सी.सी.ई. को स्कूल शिक्षा का हिस्सा बनाने पर अपना ध्यान केन्द्रित किया है।

कैप्टन अमरिन्दर सिंह सरकार ने पहले ही मुफ़्त प्री-स्कूल शिक्षा की शुरुआत की है और नवंबर 2017 में ही पंजाब ने पूर्व-प्राथमिक शिक्षा को प्राथमिक स्कूलों का संगठित हिस्सा बना दिया था। उन्होंने बताया कि राज्य में इस समय 2.40 लाख बच्चे पूर्व-प्राथमिक में दाखि़ल हैं। उन्होंने इसमें ई. सी. सी. ई. को शामिल करने के लिए आर टी ई एक्ट के पसार की भी वकालत की।

बच्चों के सीखने के स्तर पर प्रभाव पड़ेगा

ई. सी. सी. ई. के लिए पेशेवर क्वालीफाईड ऐजूकेटरों के प्रस्ताव का जि़क्र करते हुए श्री सिंगला ने कहा कि इसको अकेला राज्यों पर छोडऩे की जगह भारत सरकार और राज्यों के बीच साझे उद्यम की भावना के आधार पर इस विचार को अमल में लाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि इसको राज्यों पर छोड़ दिया गया तो राज्य प्री-स्कूल प्रणाली को लागू करने में सफल नहीं होंगे क्योंकि इसके बहुत से कारण हैं। इसका बच्चों के सीखने के स्तर पर प्रभाव पड़ेगा।

गौरतलब है कि डी. एन. ई. पी. 2019 में 3 से 8 साल के बच्चों के लिए पाठ्यक्रम और दिशा निर्देशों सम्बन्धी शैक्षिक ढांचे की तैयारी के लिए सुझाव दिया था। यह अभिभावकों, आंगनवाड़ी और पूर्व-प्राथमिक स्कूलों के लिए भी दिया गया था। मंत्री ने राष्ट्रीय स्तर पर ई. सी. सी. ई. को एम एच आर डी के घेरे में लाने की संभावनाओं का जायज़ा लेने की मीटिंग में विनती की। उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि यह अच्छा होगा कि पूर्व-प्राथमिक को स्कूल के प्राथमिक पड़ाव पर इसके साथ संगठित किया जाये।

बिना किसी अड़चन के प्रोग्राम लागू करने को यकीनी बनाया जा सके

श्री सिंगला ने मौजूदा शिक्षा ढांचे में समूचे रूप में बुनियादी तबदीलियाँ लाकर नई शिक्षा नीति बनाने की सलाह दी और इसको अंतिम रूप देने से पहले आलोचनात्मक विश्लेषण करने की बात कही। श्री सिंगला ने कहा कि जैसे ई.सी.सी.ई. को स्कूल शिक्षा का संगठित हिस्सा बनाने का प्रस्ताव किया गया है तो इसको राष्ट्रीय स्तर पर एम.एच.आर.डी. के घेरे अधीन लया जाना चाहिए और राज्यों में इसको स्कूल शिक्षा के घेरे में लाना चाहिए ताकि विभिन्न विभागों के द्वारा बिना किसी अड़चन के प्रोग्राम लागू करने को यकीनी बनाया जा सके।

उन्होंने कहा कि जैसे पंजाब ने सभी प्राथमिक स्कूलों में प्री-स्कूलिंग शुरू करने के लिए सक्रियता पहले ही की है और एनसीईआरटी को तुरंत ऐनसीटीई द्वारा स्वीकृत 6 महीनों का विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार करना चाहिए ताकि सेवा कर रहे अध्यापकों / ईजीएस वॉलंटियरों को प्री-स्कूल बच्चों को पेशेवर ढंग से संभाल सकें।

पढ़ो पंजाब पढ़ाओ पंजाब जैसी पंजाब की पहलकदमियों की सफलता का जि़क्र करते हुए श्री विजय इंदर सिंगला ने कहा कि शैक्षिक दृष्टिकोण को ऊँचा उठाने के लिए ज़मीनी हकीकतों के आधार पर हरेक राज्य को अपने राज्य आधारित विशेष प्रोग्राम तैयार करने के लिए व्यापक दिशा निर्देशों को शामिल करने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि आर.टी.ई. नियम लाजि़मी तौर पर रहने चाहिएं और इनमें ढील देने से शिक्षा के मानक में कमी आयेगी।

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