वाशिंगटन सहित 40 शहरों में कर्फ्यू, अमेरिका में तेजी से फैल रही है हिंसा की आग, जाने वजह

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वाशिंगटन। अश्वेत व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद अमेरिका में भड़की विरोध की आग लगातार फैलती जा रही है. इसके मद्देनजर सरकार ने वाशिंगटन DC सहित के कम से कम 40 शहरों में कर्फ्यू लगा दिया है. CNN के अनुसार, 40 शहरों में कर्फ्यू लगा दिया गया है और 15 राज्यों एवं वाशिंगटन DC में लगभग 5,000 नेशनल गार्ड तैनात किये गए हैं।

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इसके अलावा, 2,000 गार्ड को तैयार रखा गया है, ताकि ज़रूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत स्थिति संभालने के लिए बुलाया जा सके. नेशनल गार्ड ब्यूरो के चीफ जोसेफ लेंगइल (Joseph Lengyel) ने बताया कि 15 शहरों में 5,000 नेशनल गार्ड और एयरमैन अशांति का जवाब देने के लिए हमारे स्थानीय और राज्य भागीदारों का समर्थन कर रहे हैं।

इससे पहले, अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओ ब्रायन ने इससे इनकार किया था कि अमेरिका पुलिस बल नस्लीय प्रणाली मौजूद है. उन्होंने CNN से बातचीत में कहा कि इस मामले को नस्लीय रंग दिया जा रहा है. उन्होंने आगे कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि यह नस्लभेद का मामला है. पुलिस बल के हमारे 99.9 प्रतिशत महान अमेरिकन हैं. जिसमें अफ्रीकी अमेरिकी, हिस्पैनिक, एशियाई भी शामिल हैं।

अश्वेत व्यक्ति की पुलिस कस्टडी में मौत

गौरतलब है कि इस पूरे विवाद को अब रंगभेद से जोड़कर देखा जाने लगा है. जिसकी शुरुआत एक अश्वेत व्यक्ति की पुलिस कस्टडी में मौत हुई थी जिसका वीडियो भी वायरल हो गया था. जॉर्ज फ्लॉयड नाम के व्यक्ति को पुलिस धोखाधड़ी के आरोप में पकड़ने गई थी. जॉर्ज को देखते ही पुलिस ने उसे हथकड़ी लगाकर पकड़ने की कोशिश की।

जॉर्ज ने इसका विरोध किया. विरोध के जवाब में डेरेक चॉविन नाम के एक पुलिस अधिकारी ने जॉर्ज के साथ ज़बरदस्ती की और उन्हें ज़मीन पर पटक दिया. सड़क पर खड़ी एक कार के पिछले पहिये के पास ज़मीन पर जॉर्ज पड़े थे. और उनके ऊपर चढ़े डेरेक चॉविन ने अपने बायें पैर से जॉर्ज का गला दबाया हुआ था और वो भी पूरे सात मिनट तक. इस दौरान जॉर्ज रोतेे रहे. छटपटाते रहे और बोलते रहे कि उन्हें सांस नहीं आ रही है. मुझे छोड़ दो।

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एक महिला ने कैमरे में कैद कर लिया

इस पूरे वाकये को एक महिला ने कैमरे में कैद कर लिया. पुलिसकर्मी के लगातार गर्दन दबाए रखने की वजह से जॉर्ज की मौत हो गई और तभी से अमेरिका में इसके विरोध में हिंसा शुरू हुई।

अमेरिका में ये पहला वाकया नहीं जब रंगभेद की वजह से ऐसा आंदोलन देखने को मिला हो. 2014 में भी ठीक इसी तरह का एक कत्ल पुलिस की हिरासत में हुआ था, तब भी मारे गए व्यक्ति के आखिरी तीन शब्द ‘I CANT BREATHE’ ही थे और अब ऐसा लग रहा है मानो अमेरिका में पुराना इतिहास फिर से दोहराया जा रहा है।



















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