नजरिया : ये ‘जंग’ जनता को राशन दिलाने की नहीं, बल्कि खुद की सियासी ‘जमीन’ तलाशने की है

Daily Samvad
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अशोक सिंह भारत
जालंधर में सरकारी राशन की कुछ बोरियों के नाम पर पिछले तीन दिनों से जो सियासत शुरु हुई है, उसके पीछे भाजपा के ही कुछ नेताओं का अपने पूर्व मंत्री के लिए रचा गया चक्रव्यूह प्रतीत होता है। भाजपा के नेताओं के निशाने पर कांग्रेस के विधायक कम, उनके अपने ही पूर्व मंत्री हैं।

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कहते हैं जंग और सियासत में सब जायज है। ये जंग विरोधियों से कम अपनो से ज्यादा है। पिछले तीन दिनों से सैंट्रल टाउन के दो दिग्गज नेताओं को जिन लोगों ने उलझाया, पर्दे के ये असली खिलाड़ी असल में विधानसभा चुनाव में अपनी दावेदारी जताने के लिए आज से ही पृष्ठभूमि तैयार कर रहे हैं।

हालांकि विषय यह नहीं है कि सरकारी राशन एक जगह रखा क्यों गया, विषय यह है कि सरकारी राशन के वितरण में बाधा क्यों पहुंचाया जा रहा है। भाजपा की माने तो सरकारी राशन जमा किया गय़ा, कांग्रेस कहती है कि कोई जमाखोरी नहीं है। संबंधित विभाग अपने स्तर पर राशन का वितरण कर रहा है। वीरवार को जिस तरह से सुबह से शाम तक सेंट्रल टाउन से लेकर सूर्या एंक्लेव तक सियासी ड्रामा चला, वह भाजपा के उन्हीं नेताओं की ‘चाल’ का एक हिस्सा है, जो खुद को पूर्व मंत्री के पैलरल स्टैबलिश करना चाहते हैं।

ये वे नेता हैं, जो राजनीति में कभी सफल नहीं हुए। ये वे दरबारी हैं, जो राजा के सामने जी हुजूरी करते हैं, लेकिन बाद में विश्वासघात। … और हां ये कभी-कभी प्रतिघात भी करते हैं। कइयों को तो ये आघात पहुंचा भी चुके हैं। संभवता इसकी जानकारी पूर्व मंत्री को भी हो। चूंकि विधानसभा चुनाव की जमीन तैयार करना है, तो ये दरबारी फिलहाल ‘अच्छे’ हैं। ये ‘जंग’ जनता को राशन दिलाने की नहीं, बल्कि खुद की सियासी ‘जमीन’ तलाशने की है।

रही बात जनता की, तो जनता के लिए कौन लड़ रहा है। अगर जनता की इतनी ही फिक्र है, तो सरकारी राशन पर सियासी ड्रामा न करके उसे जनता-जर्नादन की चौखट तक पहुंचाने का कार्य होना चाहिए। चूंकि सियासत करनी है, मुद्दा कोई है नहीं। तो चलो राशन-राशन खेलते हैं।

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एक बात और, कानून कहता है कि सरकारी काम में बाधा डालने पर भी मुकदमा हो सकता है। तो, सरकारी राशन को रास्ते में रोककर सियासी ड्रामा पेश करना इसी कड़ी में आता है। पुलिस है, कानून है, व्यवस्था है। लेकिन आप खुद पुलिस बन रहे हैं, इससे क्या साबित हो रहा है। और आखिर में, कहीं ये दांव उन भाजपा नेताओं पर उल्टा न पड़ जाए, जो पूर्व मंत्री के हलके में अपनी सियासी जमीन तैयार करने में ऊर्जा फूंक रहे हैं। (लेखक डेली संवाद के संपादक हैं)



















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