देहरादून। चुनाव आयोग ने शनिवार को उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया। यहां एक चरण में 14 फरवरी को मतदान होगा। इसके लिए 21 जनवरी को नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा। 28 जनवरी को नामांकन की आखिरी तारीख है। 29 जनवरी को नामांकन की स्क्रूटनी होगी और 31 जनवरी तक नाम वापस लिए जा सकेंगे।
इसके साथ ही 14 फरवरी को पूरे प्रदेश में वोट डाले जाएंगे। इसके नतीजे 10 मार्च को आएंगे। पिछली बार यानी 2017 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश में 15 फरवरी को वोट डाले गए थे, जबकि वोटों की गिनती 11 मार्च को हुई थी।
मुख्यमंत्री पद के चेहरे
1. पुष्कर सिंह धामी: चुनाव से ऐन पहले मुख्यमंत्री बनाए गए धामी, इस चुनाव में भी भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद का चेहरा हैं।
2. हरीश रावत: कांग्रेस ने इस चुनाव में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। इसके बाद भी हरीश रावत कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदार हैं।
3. अजय कोठियाल: आम आदमी पार्टी की ओर से कर्नल अजय कोठियाल मुख्यमंत्री पद का चेहरा हैं। आप ने बीते 17 अगस्त को ही पार्टी के मुख्यमंत्री पद के चहरे का ऐलान कर दिया था। कोठियाल 26 साल तक सेना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
चुनाव प्रचार के चेहरे
1. नरेंद्र मोदी: पिछले एक साल के भीतर तीन मुख्यमंत्री बदल चुकी भाजपा के लिए चुनाव प्रचार का चेहरा प्रधानमंत्री मोदी होंगे। बीते हफ्ते उत्तराखंड में रैली करके प्रधानमंत्री ने चुनाव प्रचार की शुरुआत भी कर दी है।
2. राहुल और प्रियंका गांधी: प्रियंका गांधी 9 जनवरी को दो रैलियां करके उत्तराखंड में चुनाव प्रचार की शुरुआत करने वाली थीं, कोरोना के बढ़ते मामलों के कारण ये रैलियां रद्द कर दी गईं। केस बढ़ते हैं तो भी राहुल और प्रियंका कांग्रेस के चुनाव प्रचार का चेहरा होंगे। भले प्रचार वर्चुअल हो।
3. अरविंद केजरीवाल: केजरीवाल लगातार उत्तराखंड के दौरे कर रहे हैं। हर दौरे में वो उत्तराखंड के वोटर्स के लिए नए-नए ऐलान कर रहे हैं। हर महिला को प्रति माह एक हजार रुपये, पूर्व फौजियों को सरकारी नौकरी, शहीद के परिवार को एक करोड़ रुपए की मदद जैसे कई ऐलान वो कर चुके हैं। आप के चुनाव प्रचार का सबसे बड़ा चेहरा केजरीवाल ही होंगे।
चुनाव के बड़े मुद्दे
1. नए जिलों का गठन: 2000 में अलग राज्य बनने के बाद से उत्तराखंड में एक भी नया जिला नहीं बना है। कांग्रेस ने सरकार बनने पर 9 नए जिले बनाने की बात कही है। वहीं, आम आदमी पार्टी ने वादा किया है कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आई तो 6 नए जिले बनाएंगे। भाजपा ने कहा है कि नए जिलों के गठन के लिए बनाए गए आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही कोई फैसला लिया जाएगा।
2. बेरोजगारी और पलायन: रोजगार के अवसर नहीं होने के कारण पहाड़ी इलाकों से लोगों का पलायन भी यहां बड़ा मुद्दा है। पलायन यहां इतना बड़ा मुद्दा है कि सरकार ने पलायन रोकने के लिए पलायन आयोग तक गठित कर रखा है। इसी आयोग की रिपोर्ट कहती है कि अलग राज्य बनने के बाद उत्तराखंड से करीब 60 प्रतिशत आबादी घर छोड़ चुकी है। बेरोजगारी पर विपक्ष का दावा है कि राज्य में बेरोजगारी राष्ट्रीय बेरोजगारी दर से भी दुगनी हो चुकी है।









