पंजाब: सीनियर डिप्टी मेयर के खिलाफ 5 करोड़ रुपए की मानहानि का केस, जाने वजह

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डेली संवाद, पटियाला
पंजाब के पटियाला से ब़डी खबर है। सत्ता परिवर्तन के बाद पंजाब में राजनीतिक घटनाक्रम तेजी के साथ बदल रहे हैं। अब पटियाला के मेयर संजीव शर्मा बिट्टू ने सीनियर डिप्टी मेयर योगिदर सिंह योगी के खिलाफ पांच करोड़ रुपये का मानहानि का मामला अदालत में दायर कर दिया।

आपको बता दें कि बीते दिनों सीनियर डिप्टी मेयर योगिदर सिंह योगी ने मेयर के खिलाफ एक शिकायत को मुख्यमंत्री को भेजने के साथ-साथ इंटरनेट मीडिया पर भी इसका प्रसार किया था। मेयर ने इस शिकायत के तथ्यों को निराधार बताते हुए सीनियर डिप्टी मेयर के खिलाफ मानहानि का दावा देयर कर दिया है।

राजनीतिक माइलेज लेने का प्रयास

जानकारी के मुताबिक मेयर ने दायर किए मानहानि के केस में कहा कि योगी ने सीनियर डिप्टी मेयर का पदभार संभालने के बाद से अपनी नजर मेयर पद पर रखी है। अपनी इस राजनीतिक मंशा को पूरा करने के लिए वह लगातार उनके खिलाफ राजनीतिक चालें चलते आए हैं।

उन्होंने कहा कि साढ़े चार साल तक लगातार सीनियर डिप्टी मेयर उनके हाउस और एफएंडसीसी का हिस्सा रहे हैं, लेकिन तब उन्होंने साढ़े चार साल में कभी भी उनके खिलाफ कोई शिकायत किसी के पास क्यों नहीं की। अब कांग्रेस पार्टी में रहते हुए वह आम आदमी पार्टी का गुणगान कर रहे हैं और उन्हीं से प्रेरित होकर उन्होंने गलत आरोप लगाते हुए एक शिकायत को मुख्यमंत्री के पास भेज उसे इंटरनेट मीडिया में चलाकर राजनीतिक माइलेज लेने का प्रयास किया है।

मेयर ने अपने मानहानि के दावे में स्पष्ट किया है कि कैप्टन अमरिदर सिंह की ओर से कांग्रेस छोड़ने के बाद जैसे ही पंजाब लोक कांग्रेस का गठन किया, वे खुद इस नई पार्टी का हिस्सा बन गए। इसके बाद सीनियर डिप्टी मेयर ने उनके खिलाफ उस समय के स्थानीय निकाय मंत्री ब्रह्म मोहिदरा के साथ मिलकर 25 नवंबर 2021 को मेयर पद छीनने का प्रयास किया, लेकिन अदालत के हस्तक्षेप से वह अपना मेयर पद बचा पाए।

मेयर ने योगी को दी चुनौती

मेयर संजीव शर्मा बिट्टू ने अपने दावे में साफ तौर पर कहा है कि म्यूनिसिपल एक्ट 1976 के अनुसार मेयर के पाश सीधे तौर पर कोई वित्तीय अधिकार नहीं है। देश के कानून ने सभी वित्तीय अधिकार नगर निगम के कमिश्नर को दिए हैं। जनरल हाउस या एफएंडसीसी में पास होने वाले प्रस्तावों को मंजूरी के लिए पंजाब सरकार के पास भेजा जाता है और उसके बाद ही पंजाब सरकार के पास किए प्रस्तावों को जमीनी स्तर पर अमलीजामा पहनाया जाता है। अ

वैध इमारतों को लेकर जो आरोप योगी ने अपनी शिकायत के माध्यम से लगाए हैं, उनमें से वह किसी एक मामले को भी साबित नहीं कर सकते, क्योंकि इमारतों के नक्शे पास करना या न करना मेयर के अधिकार क्षेत्र में नहीं है, बल्कि बिल्डिंग ब्रांच या निगम कमिश्नर ही इसके लिए जिम्मेदार भूमिका निभाते हैं।

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