कभी ऑटो रिक्शा चलाते थे महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, यहां पढ़ें पूरी प्रोफाइल

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⏱️ 5 मिनट पढ़ने का समय|📝 635 शब्द|📅 30 Jun 2022

मुंबई। Eknath Shinde: महाराष्ट्र की राजनीत (Maharashtra Politics) में भूचाल लाकर शिवसेना के उद्धव ठाकरे की कुर्सी छीनने वाले एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) कौन हैं, इस समय Google में सबसे ज्यादा सर्च किया जा रहे हैं। भाजपा (BJP) ने मास्टर स्ट्रोक खेलते हुए अपने पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की बजाए शिवसेना से बागी हुए एकनाथ शिंदे को ही मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंप दी। जिससे शिवसेना चारोखाने चित्त हो गई।

महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी की सरकार में नेता सदन एकनाथ शिंदे, साल 2014 से साल 2019 के तक बीजेपी-शिवसेना की सरकार में मंत्री थे। ठाणे जिले की कोपरी पंचपखाड़ी से विधायक, एकनाथ शिंदे साल 2014 में अक्टूबर से दिसंबर 2014 तक नेता विपक्ष भी थे। इतना ही नहीं साल 2019 में जब शिवसेना ने बीजेपी से किनारा कर के एनसीपी और कांग्रेस के साथ सरकार बनाई तो उद्धव ठाकरे के बेटे और राज्य में पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे ने एकनाथ शिंदे को नेता सदन बनाने का प्रस्ताव किया था।

ऑटो रिक्शा ड्राइवर से मंत्री तक का सफर

महाराष्ट्र में 9 फरवरी 1964 को जन्मे एकनाथ शिंदे सतारा जिले के पहाड़ी जवाली तालुका से आते हैं और मराठी समुदाय से हैं। एकनाथ शिंदे ने 11वीं कक्षा तक ठाणे में ही पढ़ाई की और इसके बाद वागले एस्टेट इलाके में रहकर ऑटो रिक्शा चलाने लगे। ऑटो रिक्शा चलाते-चलाते एकनाथ शिंदे अस्सी के दशक में शिवसेना से जुड़े गए और पार्टी के एक आम कार्यकर्ता के तौर पर अपना सियासी सफर शुरू किया है।

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से सटे ठाणे जिले के सबसे प्रभावशाली नेताओं में एकनाथ शिंदे की गिनती होती है। लोकसभा का चुनाव हो या नगर निकाय का, ठाणे में जीत के लिए एकनाथ शिंदे का साथ जरूरी माना जाता है। हालांकि, एकनाथ शिंदे ने शिवसेना में जमीनी कार्यकर्ता के तौर पर काम किया और ठाणे के प्रभावशाली नेता आनंद दीघे के उंगली पकड़कर आगे बढ़े।

ठाणे महानगर पालिका से पार्षद

एकनाथ शिंदे 1997 में ठाणे महानगर पालिका से पार्षद चुने गए और 2001 में नगर निगम सदन में विपक्ष के नेता बने। इसके बाद दोबारा साल 2002 में दूसरी बार निगम पार्षद बने। इसके अलावा तीन साल तक पॉवरफुल स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य रहे। हालांकि, दूसरी बार पार्षद चुने जाने के दो साल बाद ही विधायक बन गए, लेकिन शिवसेना में सियासी बुलंदी साल 2000 के बाद छू सके।

ठाणे इलाके में शिवसेना के दिग्गज नेता आनंद दीघे का साल 2000 में निधन हो गया। इसके बाद ही बाद ठाणे में एकनाथ शिंदे आगे बढ़े। इसी बीच 2005 में नारायण राणे ने शिवसेना छोड़ दी, जिसके बाद एकनाथ शिंदा का कद पार्टी में बढ़ता चला गया। राज ठाकरे के शिवसेना छोड़ने के बाद एकनाथ शिंदे का ग्राफ शिवसेना में तो बढ़ा ही बढ़ा और ठाकरे परिवार के करीबी भी बन गए. उद्धव ठाकरे के साथ एकनाथ मजबूती से खड़े रहे।

चौथी बार के विधायक हैं एकनाथ शिंदे

मातोश्री के सबसे करीबी नेताओं की लिस्ट में एकनाथ शिंदे का नाम सबसे पहले लिया जाता था। एकनाथ शिंदे ठाणे की कोपरी-पंचपखाड़ी सीट से साल 2004 में पहली बार विधायक निर्वाचित हुए थे। शिवसेना के टिकट पर 2004 में पहली बार विधानसभा पहुंचे शिंदे इसके बाद 2009, 2014 और 2019 में भी विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुए। इतना ही नहीं एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे भी शिवसेना के टिकट पर कल्याण लोकसभा सीट से सांसद हैं। इस तरह से एकनाथ शिंदे ने नगर पलिका के पार्षद से विधायक और मंत्री तक का सफर तय किया।

हादसे में हो गई थी बच्चों की मौत

एक हादसे में शिंदे ने अपने 2 बच्चों को खो दिया था। उनका बेटा और बेटी उनकी आंखों के सामने सतारा में डूब गए थे। इस घटना के बाद शिंदे एकांतप्रिय हो गए थे। उन्होंने राजनीति छोड़ दी थी। वह तब शिवसेना के पार्षद थे। लेकिन आनंद दिघे उन्हें दोबारा सार्वजनिक जीवन में वापस लाए और उन्हें ठाणे नगर निगम में सदन का नेता बनाया।

















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