Jalandhar Smart City Scam: गुरुओं और शहीदों के नाम पर स्मार्ट सिटी के अफसरों ने किया बड़ा घोटाला, हजम कर गए करोड़ों रुपए, पढ़ें डेली संवाद पर सबसे बड़ा खुलासा

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⏱️ 13 मिनट पढ़ने का समय|📝 1,669 शब्द|📅 22 Aug 2022

डेली संवाद, जालंधर। Jalandhar Smart City Scam: जालंधर स्मार्ट सिटी प्रोजैक्ट के तहत उन चौकों पर 8.25 करोड़ रुपए खर्च करने का दावा किा गया है। हैरानी की बात तो यह है कि पहले से विकसित पार्कों के नाम पर स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने ठेकेदारों को 7.75 करोड़ रुपए का भुगतान भी कर दिया। इस घोटाले को खुद सैंट्रल हलके के विधायक रमन अरोड़ा ने पकड़ा और उन्होंने हर एक चौक का मुआयना भी किया। इसकी जांच सीईओ दविंदर सिंह के पास है।

स्मार्ट सिटी के प्रोजैक्ट हैड और निगम अधिकारियों को इतनी भी शर्म नहीं आई कि देश के लिए अपनी जान न्यौछावर करने वाले शहीद मेजर रमन दादा और देश को संविधान देने वाले डा. भीमराव अंबेडकर के नाम वाले संविधान चौक (बीएमसी चौक) के नाम पर तो घपला न करें। शहीद के नाम पर बने चौक पर भी इन घपलेबाजों ने घपला कर दिया। ये घपलेबाज भले ही कोई तिकड़म लगाकर जेल जाने से बच सकते हैं, लेकिन जालंधर शहर का एक-एक बच्चा भी माफ नहीं करेगा।

किसी ‘वासू’ के नाम पर हुआ पूरा खेल

डेली संवाद की खोजबीन में यह बात निकलकर सामने आई कि इन चौकों के नाम पर अफसरों ने जो पैसा रिलीज किया, वह एक खास विधायक के दूर के रिश्तेदार के नाम पर गया। यानि अफसरों ने विधायक के दूर के रिश्तेदार के साथ मिलकर करोड़ों रुपए डकार गए। सूत्र बता रहे हैं कि इसका नाम ‘वासू’ है। ‘वासू’ नाम का कारिंदा या कोई ठेकेदार है, जो अफसरों के साथ मिलकर करोड़ों रुपए सरकार के हजम कर गया। डेली संवाद पर अब तक का सबसे बड़ा खुलासा पढ़ें।

घपला नंबर -1 : जिस चौक को HMV ने विकसित किया, उसे स्मार्ट सिटी में डालकर 1 करोड़ से ज्यादा डकारे

हंसराज महिला विद्यालय यानि HMV के पास पार्क को विकसित करने के नाम पर स्मार्ट सिटी प्रोजैक्ट के तहत 3.73 करोड़ रुपए का एस्टीमेट तैयार किया गया। इस एस्टीमेट तैयार करने में नगर निगम के जेई, एसडीओ, एक्सईएन और नोडल अफसर समेत स्मार्ट सिटी के प्रोजैक्ट हैड की मिलीभगत रही। सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस चौक को एचएमवी खुद मेनटेन करता है और इसे विकसित करने के लिए एचएमवी पैसा लगाता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एचएमवी अपने बजट से लाखों रुपए लगाकर एक चौक को विकसित करता है और उसका रखरखाव करता है तो स्मार्ट सिटी के तहत आखिर 3.73 करोड़ रुपए का एस्टीमेट क्यों तैयार किया गया है। इससे भी बड़ा हैरानी की बात यह है कि स्मार्ट सिटी के ठेकेदार को इस चौक को विकसित करने के नाम पर  एक करोड़ से ज्यादा की रकम (1,01,41,294) रुपए का भुगतान भी कर दिया गया।

जिम्मेदार कौन – पूर्व सीईओ करणेश शर्मा, तत्कालीन प्रोजैक्ट हेड कुलविंदर सिंह, निगम के नोडल अफसर, निगम के एक्सईएन, एसडीओ, जेई और पैमेट भुगतान करने वाला अकाउंटेंट

घपला नंबर-2 – पीएनबी चौक (नगर निगम मुख्यालय गेट यानि श्रीराम चौक) भगवान के नाम पर पैसे डकारे

कंपनी बाग चौक कह लो या श्री राम चौक या फिर पीएनबी चौक जो नगर निगम मुख्यालय के गेट पर है। नगर निगम मुख्यालय के गेट पर इतना बड़ा घपला हो गया है, जिसे न तो मेयर जगदीश राजा रोक पाए और न ही विधायक रहे राजिंदर बेरी ने रोका। बड़े ही हैरानी की बात रही कि निगम अधिकारियों की सांठगांठ से स्मार्ट सिटी के प्रोजैक्ट हेड ने इस चौक को संवारने के लिए 1.30 करोड़ रुपए का एस्टीमेट तैयार कर दिया। बिना कोई काम किए स्मार्ट सिटी के कागजों में पीएनबी जंक्शन के नाम पर ठेकेदार को 47 लाख  (47,40,245) रुपए का भुगतान कर दिया गया।

जिम्मेदार कौन – पूर्व सीईओ करणेश शर्मा, तत्कालीन प्रोजैक्ट हेड कुलविंदर सिंह, निगम के नोडल अफसर, निगम के एक्सईएन, एसडीओ, जेई और पैमेट भुगतान करने वाला अकाउंटेंट

घपला नंबर-3 : श्री गुरु रविदास के नाम पर डकार गए पैसा

स्मार्ट सिटी और नगर निगम के अधिकारियों ने मिलकर श्री गुरु रविदास चौक को विकसित करने के लिए 3.52 करोड़ का एस्टीमेट पास किया। जबकि ये चौक पहले ही बेहद खूबसूरत और विकसित था। इसे एक निजी कंपनी मेनटेन कर रही है। यह निजी कंपनी आज भी इस चौक को मेनटेन कर रही है। बावजूद इसके अधिकारियों ने इस चौक के नाम पर अब तक करीब 82 लाख (81,85,635) रुपए का भुगतान ठेकेदार को किया।

जिम्मेदार कौन – पूर्व सीईओ करणेश शर्मा, तत्कालीन प्रोजैक्ट हेड कुलविंदर सिंह, निगम के नोडल अफसर, निगम के एक्सईएन, एसडीओ, जेई और पैमेट भुगतान करने वाला अकाउंटेंट

घपला नंबर-4: दोआबा चौक में हुआ बड़ा खेल

शहर में श्री देवी तालाब मंदिर के पास स्थित दोआबा चौक को संवारने के नाम पर भी स्मार्ट सिटी औऱ निगम के अधिकारियों ने ठेकेदार के साथ मिलकर लाखों रुपए डकार गए। इस चौक को नगर निगम ने लाखों रुपए लगाकर विकसित किया था। चौक हरा-भरा और सुंदर था। इस चौक के नाम पर स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने 1.81 करोड़ का एस्टीमेट पास कर दिया। चौक में कोई काम नहीं हुआ, लेकिन 62 लाख से ज्यादा (62,46,561) रुपए का भुगतान ठेकेदार को कर दिया गया।

जिम्मेदार कौन – पूर्व सीईओ करणेश शर्मा, तत्कालीन प्रोजैक्ट हेड कुलविंदर सिंह, निगम के नोडल अफसर, निगम के एक्सईएन, एसडीओ, जेई और पैमेट भुगतान करने वाला अकाउंटेंट

घपला नंबर-5 : शहीद के नाम पर अधिकारी डकार गए पैसा

वर्कशाप चौक का नाम बदलकर नगर निगम ने शहीद मेजर रमनदादा के नाम पर रखा। शहीद के घरवालों के प्रयास से नगर निगम ने इस चौक पर लाखों रुपए खर्च कर सुंदर बनाया, यहां शहीद की प्रतिमा भी लगाई गई। बड़े ही शर्म की बात है कि स्मार्ट सिटी के प्रोजैक्ट हैड औऱ निगम के अधिकारियों ने मिलकर शहीद मेजर रमन दादा के चौक के नाम पर 89 लाख रुपए से ज्यादा हजम कर गए। अधिकारियों ने इस चौक के नाम पर 1.57 करोड़ रुपए का एस्टीमेट पास किया। अब तक ठेकेदार को साढ़े 89 लाख (89,53,870) रुपए का भुगतान कर दिया।

जिम्मेदार कौन – पूर्व सीईओ करणेश शर्मा, तत्कालीन प्रोजैक्ट हेड कुलविंदर सिंह, निगम के नोडल अफसर, निगम के एक्सईएन, एसडीओ, जेई और पैमेट भुगतान करने वाला अकाउंटेंट

घपला नंबर-6 : श्री गुरु रामदास जी के नाम पर अधिकारियों ने की धांधली

माडल टाउन से पहले श्री गुरु रामदास चौक आता है। इस चौक को शहर की एक नामी कंपनी अपने पैसे से विकसित करती रही है और उसका रखरखाव भी करती आ रही है। निजी कंपनी ने लाखों रुपए अपने पास से खर्च कर इस चौक को सुंदर बनाया है। इस चौक पर स्मार्ट सिटी के अफसरों की नजर गड़ गई। पैसा हड़पने के लिए अधिकारियों ने इस चौक के नाम पर 2.65 करोड़ का एस्टीमेट पास किया। अब तक ठेकेदार को 85 लाख रुपए से ज्यादा (85,44,951) का भुगतान कर दिया गया।

जिम्मेदार कौन – पूर्व सीईओ करणेश शर्मा, तत्कालीन प्रोजैक्ट हेड कुलविंदर सिंह, निगम के नोडल अफसर, निगम के एक्सईएन, एसडीओ, जेई और पैमेट भुगतान करने वाला अकाउंटेंट

घपला नंबर-7 : 120 फुडी रोड बनी दुधारू गाय

शहर में हमेशा से चर्चा में रहने वाली 120 फुटी रोड नेताओं के लिए किसी दुधारू गाय से कम नहीं है। पिछले कई सालों से कौंसलर से लेकर सीनियर डिप्टी मेयर, मेयर औऱ विधायक ने करोड़ों रुपए इस रोड को खूबसूरत बनाने के नाम पर खर्च किए। लेकिन आज तक 120 फुटी रोड खूबसूरत नहीं बन सकी। इस रोड पर स्मार्ट सिटी के प्रोजैक्ट हेड ने भी हाथ साफ किया। यहां ग्रीनरी और चौक को विकसित करने के नाम पर 1.33 करोड़ रुपए का एस्टीमेट पास किया गया। ठेकेदार को अब तक करीब 28 लाख रुपए (27,79,696) भुगतान किया गया।

जिम्मेदार कौन – पूर्व सीईओ करणेश शर्मा, तत्कालीन प्रोजैक्ट हेड कुलविंदर सिंह, निगम के नोडल अफसर, निगम के एक्सईएन, एसडीओ, जेई और पैमेट भुगतान करने वाला अकाउंटेंट

घपला नंबर-8: शहर के दिल बीएमसी चौक के साथ बेईमानी

शहर का दिल कहे जाने वाले बीएमसी चौक जो अब संविधान चौक के नाम से जाना है, स्मार्ट सिटी के अफसरों को संविधान के रचियता बाबा साहब डा. भीमराव अंबेडकर का भी डर नहीं लगा। जिससे एक निजी कंपनी द्वारा विकसित किए गए इस चौक के नाम पर भी 1.36 करोड़ रुपए का एस्टीमेट पास कर दिया। यही नहीं, इस चौक को निजी कंपनी संवार रही है, निजी कंपनी पैसा खर्च कर रही है, लेकिन स्मार्ट सिटी के खजाने से ठेकेदार को 1 करोड़ से ज्यादा (1,27,94,780) रुपए का भुगतान हो गया।

जिम्मेदार कौन – पूर्व सीईओ करणेश शर्मा, तत्कालीन प्रोजैक्ट हेड कुलविंदर सिंह, निगम के नोडल अफसर, निगम के एक्सईएन, एसडीओ, जेई और पैमेट भुगतान करने वाला अकाउंटेंट

घपला नंबर-9 : मेयर हाउस के सामने हो गया घपला

स्मार्ट सिटी के प्रोजैक्ट हैड और निगम अधिकारियों ने मेयर जगदीश राजा और तब सीईओ व निगम कमिश्नर रहे करणेश शर्मा के आंखों के सामने घपला कर डाला। मेयर हाउस के ठीक सामने माडल टाउन में सैंट्रल वर्ज को खूबसूरत बनाने के नाम पर 1.08 करोड़ रुपए का एस्टीमेट पास किया। इसे मेहरबानी ही कहेंगे कि 1.08 के एस्टीमेट पास हुए काम का ठेकेदार को अब तक 1 करोड़ 16 लाख रुपए (1,16,05,391) का भुगतान करवा दिया गया।

जिम्मेदार कौन – पूर्व सीईओ करणेश शर्मा, तत्कालीन प्रोजैक्ट हेड कुलविंदर सिंह, निगम के नोडल अफसर, निगम के एक्सईएन, एसडीओ, जेई और पैमेट भुगतान करने वाला अकाउंटेंट

इन घपलों के सबसे बड़े जिम्मेदार कौन?

स्मार्ट सिटी प्रोजैक्ट में सांसद, विधायक, मेयर और अधिकारी डायरेक्टर और मैंबर के भूमिका में होते है। स्मार्ट सिटी के 1000 करोड़ रुपए के काम में जिस तरह से स्मार्ट सिटी और नगर निगम के अधिकारी जिम्मेदार हैं, उतना ही जिम्मेदार सांसद, विधायक, मेयर और दूसरे अधिकारी भी जिम्मेदार हैं। यानि इस घपले को तत्कालानी सांसद, विधायकों, मेयर और अधिकारियों की मूक सहमित रही है। जिससे अधिकारियों ने दबाकर घपला किया।

कईयों को फोन कर पक्ष जानने की कोशिश, कोई उत्तर नहीं

इस खबर को लिखने से पहले डेली संवाद की टीम ने हर उस अधिकारी, सांसद, विधायक और मेयर से बात करने की कोशिश की, जो कहीं न कहीं इससे जुड़े हुए हैं, लेकिन इन सभी ने कोई भी उत्तर देने की कोशिश नहीं की। यहां तक कि कईयों ने स्मार्ट सिटी का नाम सुनते ही फोन ही काट दिया।

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