Sikh Prisoners: पंजाब में सिख बंदियों की रिहाई का क्या है मामला? जिसे लेकर सड़क पर जमकर चलीं तलवारें, कौन हैं वो लोग, जिन्हें जेल से छुड़ाना चाहती है SGPC

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⏱️ 17 मिनट पढ़ने का समय|📝 2,094 शब्द|📅 27 Feb 2023

वर्षा भट्टी पंधेर, एडिटर, डेली संवाद आस्ट्रेलिया। Sikh Prisoners:  भारत, खासकर पंजाब में सिख संगठन पिछले काफी अरसे से जेलों में सजा पूरी कर चुके सिख कैदियों की रिहाई की मांग कर रहे हैं. शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति और शिरोमणि अकाली दल पिछले दो सालों से इन कैदियों की रिहाई की मांग कर रहा है.

इन कैदियों की रिहाई के लिए कई सिख संगठनों ने कौमी इंसाफ मोर्चा के बैनर तले एक महीना पहले चंडीगढ़– मोहाली बॉर्डर पर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया जो लगातार जारी है. पिछले दिनों सिख संगठनों ने लगभग एक किलोमीटर लंबी सड़क को जाम कर दिया था. इसमें किसान संगठनों ने भी कौमी इंसाफ मोर्चा को अपना समर्थन दिया.

सिख संगठन 22 कैदियों की रिहाई की मांग कर रहे हैं. इनमें से ज्यादातर आतंकवाद से जुड़े मामलों में सजा काट रहे हैं.  सिख संगठनों का दावा है कि ज्यादातर कैदी अपनी सजा पूरी कर चुके हैं. 22 में से 8 तो 20 साल से ज्यादा समय से जेलों में बंद हैं. 8 में से 6 लोग पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में सजा काट रहे हैं.

जिन कैदियों की रिहाई की मांग की जा रही है उनमें दविंदरपाल सिंह भुल्लर, हरनेक सिंह भाप, दया सिंह लाहोरिया, जगतार सिंह तारा, परमजीत सिंह भेवरा, शमशेर सिंह, गुरमीत सिंह, लखविंदर सिंह लक्खा, जगतार सिंह हवारा और बलवंत सिंह राजोआना जैसे लोग शामिल हैं.

दविंदर पाल भुल्लर 1995 से जेल में हैं. 1993 में दिल्ली में यूथ कांग्रेस के हेडक्वार्टर के बाहर बम ब्लास्ट करने के दोषी हैं. इस ब्लास्ट में 9 लोगों की मौत हो गई थी. 2001 में ट्रायल कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी. 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था.

बलवंत सिंह राजोआना को पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में दोषी करार दिया जा चुका है. उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया है और अदालत ने उसे फांसी की सजा सुनाई है. वो पटियाला जेल में बंद है. राजोआना ने फांसी की सजा को चुनौती नहीं दी है. इस मामले में दूसरे दोषी को उम्रकैद की सजा मिली थी.

इन्ही सिख बंदियों को जेल से आजाद करवाने को लेकर पंजाब में चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर पिछले दिनों जमकर तलवारें, लाठियां और पत्थर चले. ये हिंसक झड़प पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई. प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ हिंसक झड़प भी हुई. इसमें 30 पुलिसकर्मी घायल हो गए. चंडीगढ़ के डीजीपी प्रवीण रंजन के मुताबिक जो लोग इस हिंसा में शामिल थे, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है.

प्रदर्शनकारियों की मांगें क्या हैं?

उधर, कौमी इंसाफ मोर्चा के नेता गुरचरन सिंह ने दावा किया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर वॉटर कैनन और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया और उसी में वो घायल हुए. प्रदर्शनकारी 2015 के बेअदबी मामले और फरीदकोट में पुलिस फायरिंग की घटना में इंसाफ की मांग कर रहे थे. निहंगों के अलावा कई दूसरे सिख संगठन भी मोर्चा के साथ थे. इसके साथ ही वो सिख बंदियों की रिहाई की मांग कर रहे थे. प्रदर्शनकारी बलंवत सिंह राजोआना, दविंदरपाल सिंह भुल्लर समेत कई सिख बंदियों की रिहाई की मांग कर रहे थे.

आईए अब सिख बंदियों की रिहाई में राम रहीम का क्या है कनेक्शन? इसे समझते हैं…

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम को हाल ही में फिर से पैरोल पर रिहा किया गया है. सिख संगठन इससे नाराज हैं. सिख नेताओं का मानना है कि जेलों में बंद सिख कैदियों को या तो पैरोल नहीं दी जाती और अगर दी भी जाती है तो शर्तों के साथ. पैरोल के नाम पर उनको जंजीरों में बांधकर सिर्फ कुछ घंटों की मोहलत दी जाती है.

उधर गुरमीत राम रहीम को बार-बार पैरोल दी जाती है और जेल से बाहर आने पर उसे जेड प्लस सुरक्षा, सत्संग करने, वीडियो आदि बनाने जैसी छूट दी जा रही है. सिख समुदाय का मानना है कि गुरमीत राम रहीम एक बलात्कारी और हत्यारा है. सरकार उसे सभी सुविधाएं देकर और सिख कैदियो के साथ भेदभाव करके सिख समुदाय के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है.

निहंग सिख संगठन तरना दल के कमलप्रीत सिंह खालसा का कहना था कि पैरोल के मामले में सिखों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि एक तरफ जहां बलात्कारी और हत्यारा गुरमीत राम रहीम मनमर्जी से पैरोल पर बाहर आ रहा है वहीं सिख कैदियों को सजा पूरी होने के बावजूद भी रिहा नहीं किया जा रहा है.

जिन बंदियों को छुड़ाने की मांग हो रही है, आईए उनके बारे में जानते हैं?

भारत के अलग-अलग राज्यों की जेलों में बंद ये आतंकी कई मामलों में सजा काट चुके हैं. इनमें से 20 साल या उससे अधिक समय से ये बंदी जेल में बंद हैं. भारत सरकार को गुरुद्वारा प्रबंधक समिति SGPC ने ऐसे 9 कैदियों की एक सूची सौंपी है. हालांकि भारत सरकार ने पिछले साल गुरु नानक जी की 550वीं जयंती की पूर्व संध्या पर देविंदर पाल सिंह भुल्लर और गुरदीप सिंह खैहरा की रिहाई के लिए अधिसूचना जारी की थी, लेकिन दिल्ली और कर्नाटक की सरकारों ने अभी तक उनकी फाइलों को मंजूरी नहीं दी है.

विस्फोट करने का दोषी गुरदीप सिंह खैहरा

अमृतसर जिले के जल्लूपुर खेड़ा गांव का रहने वाला गुरदीप सिंह खेरा पिछले 32 साल से आईपीसी की धारा 302, 307, 427 और 120-बी और टाडा एक्ट और विस्फोटक अधिनियम धाराओं के तहत दर्ज मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है. उसे 1990 में गिरफ्तार किया गया था और 1991 में टाडा कोर्ट, कर्नाटक द्वारा आजीवन कारावास की सजा दी गई थी. वह 1990 से जून 2015 तक कर्नाटक की गुलबर्गा जेल में था और फिर उसे अमृतसर जेल में स्थानांतरित कर दिया गया था. उसे 2016 से पैरोल दी गई है.

9 लोगों की हत्या का दोषी दविंदर पाल सिंह भुल्लर

बठिंडा जिले के दयालपुर भाई का गांव का रहने वाला दविंदर पाल सिंह भुल्लर लुधियाना के गुरु नानक इंजीनियरिंग कॉलेज में केमिकल इंजीनियरिंग का प्रोफेसर था. उसे टाडा अदालत ने 1993 में दिल्ली में हुए बम ब्लास्ट में 9 लोगों की हत्या और कांग्रेस नेता एमएस बिट्टा सहित 31 लोगों को घायल करने के मामले में दोषी ठहराया था. उसे 2001 में मौत की सजा सुनाई गई थी. उसकी मौत की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च 2014 को आजीवन कारावास में बदल दिया था. वह पिछले 28 वर्षों से सेंट्रल जेल अमृतसर में है. इससे पहले वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में था. केंद्र सरकार ने गुरु नानक की 550वीं जयंती की पूर्व संध्या पर उसकी रिहाई की अधिसूचना जारी की. उनकी रिहाई के लिए रिट याचिका पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है.

पूर्व सीएम की हत्या का दोषी बलवंत सिंह राजोआना

लुधियाना जिले के राजोआना कलां गांव निवासी बलवंत सिंह राजोआना 1995 में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में मौत की सजा का दोषी है. वह पिछले 27 वर्षों से केंद्रीय जेल पटियाला में बंद है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 28 मार्च, 2012 के एक आदेश द्वारा उसकी मौत की सजा पर रोक लगा दी थी. केंद्र सरकार ने गुरु नानक की 550वीं जयंती की पूर्व संध्या पर उसकी मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने की अधिसूचना जारी की थी. मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने के लिए एक रिट याचिका भारत के सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है. मई 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को राजोआना की याचिका पर दो महीने के भीतर फैसला करने का निर्देश दिया कि उसकी मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया जाए, हालांकि, केंद्र ने अभी फैसला नहीं किया है.

बेअंत सिंह हत्याकांड: जगतार सिंह हवारा

फतेहगढ़ साहिब जिले के हवारा गांव निवासी जगतार सिंह हवारा बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) का आतंकवादी रहा है. बेअंत सिंह हत्याकांड मामले में वह पिछले 27 साल से दिल्ली की तिहाड़ जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है. 2010 में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने हत्या के मामले में मुख्य अभियुक्तों में से एक हवारा को दी गई मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया है. वह अन्य दो आरोपियों के साथ 2004 में बुड़ैल जेल, चंडीगढ़ से भाग गया था और 2005 में उसे फिर से गिरफ्तार कर लिया गया. भारत के सर्वोच्च न्यायालय में अपील लंबित है. उसके खिलाफ मोहाली और चंडीगढ़ कोर्ट में भी केस चल रहे हैं.

बेअंत सिंह हत्याकांड: लखविंदर सिंह लाखा

पटियाला के गुरु नानक नगर निवासी लखविंदर सिंह लाखा बेअंत सिंह हत्याकांड में 1995 से आजीवन कारावास की सजा काट रहा है. वह मॉडल जेल बुड़ैल चंडीगढ़ में बंद है. वह बेअंत सिंह की हत्या की साजिश का हिस्सा था जिसे आत्मघाती हमलावर दिलावर सिंह ने अंजाम दिया था. लाखा पंजाब पुलिस में ड्राइवर था और हत्या के समय चंडीगढ़ के सिविल सचिवालय में तैनात था. सीएम को खत्म करने की योजना के तहत उसे सिविल सचिवालय की रेकी करने का काम सौंपा गया था. उसे कई बार पैरोल दी जा चुकी है.

बेअंत सिंह हत्याकांड: गुरमीत सिंह

पटियाला के गुरु नगर निवासी गुरमीत सिंह पेशे से इंजीनियर है. वह बेअंत सिंह हत्याकांड में पिछले 27 वर्षों से आजीवन कारावास की सजा काट रहा है और मॉडल जेल बुड़ैल चंडीगढ़ में बंद है. एक इंजीनियर होने के नाते उन्होंने अन्य दोषियों की एक बम बनाने में मदद की जिसका इस्तेमाल तत्कालीन मुख्यमंत्री की हत्या के लिए किया गया था. वह कई बार पैरोल पर जेल से बाहर आ चुका है. पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में समय से पहले रिहाई के लिए रिट याचिका लंबित है.

बेअंत सिंह हत्याकांड: शमशेर सिंह

पटियाला जिले के उकासी जट्टान गांव निवासी शमशेर सिंह पिछले 27 साल से बेअंत सिंह हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है. वह वर्तमान में मॉडल जेल, बुड़ैल, चंडीगढ़ में बंद है. उसे कई बार पैरोल भी दी जा चुकी है. वह हत्या से पहले पेशे से एक ट्रक ड्राइवर था और उसने बेअंत सिंह हत्याकांड के मुख्य आरोपी जगतार सिंह हवारा के साथ मिलकर अमृतसर जिले के अजनाला इलाके में भारत-पाकिस्तान सीमा से आरडीएक्स को पटियाला और रोपड़ पहुंचाया जहां इसे बम बनाने के लिए रखा गया था.

बेअंत सिंह हत्याकांड: परमजीत सिंह भ्यौरा

रोपड़ जिले के भ्यौरा गांव का रहने वाला परमजीत सिंह भ्यौरा बेअंत सिंह हत्याकांड का एक अन्य मुख्य दोषी है. वह बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) का सदस्य और मुख्य दोषी जगतार सिंह हवारा का सहयोगी था. उसने आजीवन कारावास की सजा के तहत 25 साल की जेल की सजा काट ली है और वर्तमान में मॉडल जेल बुड़ैल, चंडीगढ़ में बंद है. वह 1997 से 2004 तक बुड़ैल जेल ब्रेक तक जेल में रहा और 2006 में उसे फिर से गिरफ्तार कर लिया गया.

बेअंत सिंह हत्याकांड: जगतार सिंह तारा

रोपड़ के गांव देकवाला निवासी जगतार सिंह तारा ने बेअंत सिंह हत्याकांड में 17 साल जेल की सजा काट ली है और वर्तमान में मॉडल जेल बुड़ैल चंडीगढ़ में बंद है. 1995 में गिरफ्तार होने के बाद वह 2004 तक सलाखों के पीछे रहा. 2004 में वह अन्य आरोपी जगतार सिंह हवारा और परमजीत सिंह भ्यौरा के साथ बुड़ैल जेल से भाग गया था. उसे 10 साल से अधिक समय के बाद थाईलैंड से फिर से गिरफ्तार किया गया और भारत में प्रत्यर्पित किया गया. दिसंबर 2017 में उसने चंडीगढ़ की जिला अदालत में अपना गुनाह कबूल कर लिया और 17 मार्च 2018 को उसे हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई. उसके खिलाफ पटियाला में एक और जालंधर में दो मामले लंबित हैं.

दया सिंह लाहौरिया

पूर्व आतंकी दया सिंह लाहौरिया संगरूर जिले के कस्बा भराल का रहने वाला है. अपहरण के एक मामले में वह 1995 से आजीवन कारावास की सजा काट रहा है. उसने 27 साल जेल में बिताए हैं. उसे राजस्थान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राम निवास मिर्धा के बेटे राजेंद्र मिर्धा का अपहरण करने के लिए 2004 में जयपुर की एक अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. लाहौरिया और दो अन्य लोगों ने 1993 के दिल्ली विस्फोटों के आरोपी देवेंद्र पाल सिंह भुल्लर को 1994 में रिहा करने के लिए तत्कालीन नरसिम्हा राव सरकार पर दबाव बनाने की दृष्टि से कथित रूप से उनका अपहरण कर लिया था. वह संयुक्त राज्य अमेरिका भाग गया था. 20 मार्च, 2009 को दया सिंह लाहौरिया को अमेरिका से प्रत्यर्पित किया गया था. वह वर्तमान में 13 दिसंबर 2021 से स्थायी पैरोल पर रिहा है.

हरनेक सिंह भाप

जिला लुधियाना के बुटाहरी निवासी हरनेक सिंह भाप 2004 से जेल में है. उसने 18 साल जेल में बिताए हैं. 2021 से उनसे पैरोल दी जा रही है. वह खालिस्तान लिबरेशन फोर्स का पूर्व उग्रवादी है. 1993 के दिल्ली ब्लास्ट के आरोपी देवेंद्र पाल सिंह भुल्लर की रिहाई के लिए उसने अन्य लोगों के साथ 17 फरवरी, 1995 को गृह मंत्री राम निवास मिर्धा के बेटे राजिंदर मिर्धा का अपहरण कर लिया था.

















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