UP News: भूमि के लिए संजीवनी है हरी खाद, प्रयोग से भूमि में बढ़ जाती है कार्बनिक तत्वों की मात्रा

Daily Samvad
5 Min Read
Punjab Government
WhatsApp Group Join Now
WhatsApp Channel Join Now
⏱️ 6 मिनट पढ़ने का समय|📝 689 शब्द|📅 16 Mar 2023

डेली संवाद, लखनऊ। UP News: हरी खाद भूमि के लिए संजीवनी साबित हो रही है। पिछले दो दशकों के दौरान किसान हरी खाद (ढैचा, सनई, उड़द एवं मूंग) की उपयोगिता को लेकर जागरूक हुए हैं। लिहाजा इनके बीजों की मांग भी बढ़ी है। प्राकृतिक एवं जैविक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए प्रतिबद्ध योगी सरकार भी भूमि में कार्बनिक तत्वों को बढ़ाने के लिए हरी खाद को प्रोत्साहित कर रही है।

ये भी पढ़ें: कोल्ड स्टोरेज में बड़ा हादसा, इमारत ढहने से दर्जनों लोग दबे

इन सबमें हरी खाद के लिहाज से सबसे उपयोगी ढैचा ही है। यही वजह है कि सरकार खरीफ के सीजन में प्रदेश के किसानों 50 फीसद अनुदान पर 30 हजार कुंतल ढैंचा बीज उपलब्ध कराएगी।उल्लेखनीय है कि पिछले साल भी ढैचे के बीज पर ही इतना ही अनुदान था। तब प्रति कुंतल दाम 54.65 पैसे निर्धारित किया गया था। उम्मीद है कि इस साल भी दाम लगभग पिछले साल के ही आसपास रहेंगे।

उर्वरता के साथ भूमि की जलधारणा, वायुसंचरण व लाभकारी जीवाणुओं में होती है वृद्धि

उप निदेशक कृषि जयप्रकाश के अनुसार सनई एवं ढैचा जैसी फसलों की जड़ों में ऐसे जीवाणु होते हैं जो हवा से नाइट्रोजन लेकर मिट्टी में स्थिर कर देते हैं। इसका लाभ अगली फसल को मिलता है। उनके मुताबिक कार्बनिक तत्व मिट्टी की आत्मा होते हैं। भूमि में ऑर्गेनिक रूप से इसे बढ़ाने का सबसे आसान एवं असरदार तरीका है हरी खाद। कार्बनिक तत्वों की उपलब्धता खुद में सभी फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में सहायक होती है।

साथ ही यह रासायनिक खादों के लिए भी उत्प्रेरक का काम कर उसकी क्षमता को बढ़ाती है। अगली फसल में खर-पतवारों का प्रकोप भी कम हो जाता है। इससे उर्वरता के अलावा संबंधित भूमि में जलधारणा, वायुसंचरण व लाभकारी जीवाणुओं में वृद्धि होती है। लगातार फसल चक्र में इसे स्थान देने से क्रमशः भूमि की भौतिक संरचना बदल जाती है।

बोआई के 6 से 8 हफ्ते बाद पलट दें फसल

इफको के मुख्य क्षेत्र प्रबंधक डा. डीके सिंह के अनुसार अगर हरी खाद के लिए सनई, ढैचा बोया गया है तो फसल की पलटाई बोआई के लगभग 6-8 हफ्ते बाद फूल आने से पहले कर लें। इसके बाद खेत में पानी में लगा दें। फसल का ठीक तरीके से और जल्दी डीकंपोजिशन (सड़न) हो, इसके लिए फसल पलटने के बाद और सिंचाई के पहले प्रति एकड़ 5 किलोग्राम यूरिया का बुरकाव भी कर सकते हैं।

ये भी पढ़ें: गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के इंटरव्यू के बाद दीवानी हुई दिल्ली की दो लड़कियां

फसल के अवशेष करीब 3-4 हफ्ते में सड़ जाते हैं। इसके बाद अगली फसल की बोआई करें। अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए सनई उपयुक्त होती है। एक हेक्टेअर में 80-100 किग्रा बीज लगता है। ढैचा की बोआई कम या अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में की जा सकती है। प्रति हेक्टेअर खेत में 60-80 किग्रा बीज लगता है।

बोआई का समय और हरी खाद की फसलें

सिंचाई की सुविधा होने पर खाली खेत में अप्रैल से जून के बीच कभी भी इसकी बोआई की जा सकती है। सनई, ढैचा, मूंग, उड़द आदि हरी खाद के कारगर विकल्प हैं। उपलब्धता व जरूरत के अनुसार इनमें से किसी का भी चयन कर सकते हैं। इसमें से ढैचा एवं सनई हरी खाद के लिहाज से सर्वाधिक उपयुक्त हैं।

मूंग एवं उड़द की बोआई से हरी खाद के साथ प्रोटीन से भरपूर दलहन की अतिरिक्त फसल भी संबंधित किसान को मिल जाती है। अलबत्ता इनके लिए खुद का सिंचाई का संसाधन होना जरूरी है। प्रति हेक्टेअर 15-20 किग्रा बीज की जरूरत होती है।

पंजाब में AAP के एक साल पूरे, CM मान कहां रहे पास, कहां हुए फेल, देखें क्या बोले भगवंत मान ??

















Share This Article
Follow:
Daily Samvad एक विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट है, जहां हम देश-दुनिया, राजनीतिक विश्लेषण, प्रदेश, शिक्षा, बिज़नेस, मनोरंजन, खेल, स्वास्थ्य सहित हर क्षेत्र की ख़बरें सरल भाषा में आप तक पहुंचाते हैं। हमारा उद्देश्य है—जनता की आवाज़ बनकर निष्पक्ष पत्रकारिता को आगे बढ़ाना। डेली संवाद ऑनलाइन के महाबीर जायसवाल फाउंडर चीफ एडिटर हैं। वे राजनीति, अपराध, देश-दुनिया की खबरों पर दमदार पकड़ रखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता करियर की शुरुआत राजनीति की खबरों से की, जबकि उनके पास, अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग से लेकर एडिटर तक 25 साल से अधिक पत्रकारिता का अनुभव है। वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भारत सरकार के कैबिनेट मंत्री गजेंद्र शेखावत के Media Consultant भी रहे हैं। उन्होंने इलाहाबाद की यूनिवर्सिटी से मास कॉम्यूनिकेशन, बीए और एमए की डिग्री हासिल की है। संपर्क नंबर: +91-98881-90945 ईमेल: mmmmediahouse@gmail.com
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *