Jalandhar By Poll: जालंधर में कांग्रेस को सताने लगा बूथ कैप्चरिंग का डर, चुनाव आयोग से की यह मांग

Daily Samvad
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⏱️ 4 मिनट पढ़ने का समय|📝 429 शब्द|📅 09 May 2023

डेली संवाद, जालंधर। Jalandhar By Poll: जालंधर में कल शाम 6 बजे से प्रचार का शोर थम गया है। सभी राजनीतिक दलों ने प्रचार के दौरान अपनी अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। कल यानि 10 मई को जालंधर में लोकसभा उपचुनाव (Jalandhar By Poll) होने जा रहे है और सबकी नजरें इसी बात पर टिकी हुई है कि आखिरकार कौनसी पार्टी बाजी मारती है। आज शाम तक हर पोलिंग बूथ पर मशीनें सेट कर दी जाएगी।

Jalandhar By Poll: जालंधर में कांग्रेस को सताने लगा बूथ कैप्चरिंग का डर, चुनाव आयोग से की यह मांग

वहीं दूसरी तरफ ये चुनाव सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है क्योंकि पार्टी सरकार बनाने के बाद संगरूर उपचुनाव हार गई है। इसलिए आम आदमी पार्टी ने इस चुनाव के प्रचार में अपनी सारी ताकत झोंक दी है। पंजाब के सीएम भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने जालंधर में आकर जोरो शोरो से प्रचार किया।

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वहीं दूसरी तरफ अब कांग्रेस को जालंधर उपचुनाव (Jalandhar By Poll) में बूथ कैप्चरिंग (Booth Capturing) का डर सताने लगा रहा है जिसको लेकर कांग्रेस के प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने चुनाव आयोग से इस सम्बंधित शिकायत भी की है। उन्होंने कहा कि चुनाव में आम आदमी पार्टी किसी भी प्रकार की गड़बड़ी कर सकती है क्योंकि मौजूदा सरकार आप की ही है इसलिए उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा लेने वाले अधिकारियों व मुलाजिमों के अलावा सभी सरकारी अधिकारियों को चुनाव क्षेत्र से बाहर भेजने की मांग की है।

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वहीं मुख्य चुनाव अधिकारी सिब्बन सी. का कहना है कि शिकायत उन्हें प्राप्त हुई है। उनका कहना है कि अभी तक जितने भी उपचुनाव हुए हैं, उन सबसे कहीं ज्यादा सुरक्षा व्यवस्था इस बार की गई है। उन्होंने कहा कि हर पोलिंग स्टेशन पर अर्धसैनिक बल तैनात होंगे। वहीं, सभी पोलिंग बूथों की वेब कास्टिंग होगी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चुनाव के दौरान 65 से अधिक अर्धसैनिकों को सड़कों पर उतारा गया है।

आखिरकार क्या होता है बूथ कैप्चरिंग?

एक मतदान केंद्र, जो निर्दिष्ट स्थान है जहाँ मतदाता अपने मतदान के अधिकार का प्रयोग करते हैं, चुनाव प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐतिहासिक रूप से, बूथ संवेदनशील क्षेत्र रहे हैं जिनका उपयोग राजनीतिक दलों ने मतदाताओं को डराने, मतपत्र धोखाधड़ी करने और बूथों पर कब्जा करने के लिए किया है। बूथ कैप्चरिंग के दौरान ‘दुश्मन’ बूथों में मतदाताओं को प्रतिबंधित करने या डराने के लिए राजनेता गुंडों और शक्तिशाली पुरुषों का उपयोग करते हैं।

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