One Nation-One Election: एक राष्ट्र, एक चुनाव पर कोविंद समिति की रिपोर्ट की 10 बड़ी बातें

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⏱️ 7 मिनट पढ़ने का समय|📝 899 शब्द|📅 16 Mar 2024

डेली संवाद, नई दिल्ली। One Nation-One Election: भारत के पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली एक उच्च-स्तरीय समिति ने भारत में लंबे समय से चर्चा में रही “एक राष्ट्र, एक चुनाव” अवधारणा को लागू करने की सिफारिश की है।

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कोविंद पैनल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को सौंपी अपनी 18626 पृष्ठों की रिपोर्ट में प्रस्ताव रखा है कि देश में लोकसभा, विधानसभा, नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव एक साथ किए जाएं। अगर कोविंद समिति की यह सिफारिशें मान ली जाती हैं तो इन राज्यों में पांच साल से पहले ही चुनाव हो जाएंगे।

कोविंद समिति ने कहा है कि

कोविंद समिति ने प्रस्ताव में चुनावों को समकालिक बनाने का प्रयास किया है। जिसके परिणामस्वरूप लोकसभा (भारत की संसद का निचला सदन), राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के लिए एक साथ मतदान होगा। कोविंद समिति ने कहा है कि एक देश-एक चुनाव को दो चरणों में किया जा सकता है।

कोविंद समिति ने अपनी 18626 पृष्ठों की रिपोर्ट में कहा है कि पहले चरण में लोकसभा व विधानसभा चुनाव होने चाहिए, जबकि दूसरे चरण में लोकसभा व विधानसभा चुनाव के सौ दिन के भीतर ही निकाय व पंचायत चुनाव होने चाहिए।

भारत निर्वाचन आयोग व राज्य आयोगों के परामर्श से एकल मतदाता सूची व मतदाता फोटो पहचान पत्र तैयार होने चाहिए। सदन समयपूर्व भंग होने पर नए सिरे से चुनाव हो सकें, लेकिन कार्यकाल बाकी बची अवधि का होगा।

कोविंद समिति की मुख्य सिफारिशें

नियुक्त तिथि

योजना में लोकसभा आम चुनाव के बाद एक “नियुक्त तिथि” स्थापित करने का आह्वान किया गया है। इस तिथि के बाद निर्वाचित राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल कम कर दिया जाएगा ताकि उनका कार्यकाल अगले निर्धारित संसदीय चुनावों के अनुरूप समाप्त हो जाए।

मध्यावधि चुनाव

यदि त्रिशंकु संसद या अविश्वास प्रस्ताव आता है तो नए चुनाव के प्रावधान हैं। ऐसी परिस्थितियों में नए सदन या विधानसभाएं अपने पूर्ववर्तियों के शेष कार्यकाल को पूरा करेंगी।

संवैधानिक परिवर्तन

इस बदलाव को सक्षम करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 83 और 172 में संशोधन की आवश्यकता है।

टिकाऊ तंत्र विकसित

एक साथ चुनावों के चक्र को बहाल करने के लिए सरकार को कानूनी रूप से टिकाऊ तंत्र विकसित करना चाहिए।

लोकसभा की पहली बैठक

लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने के लिए राष्ट्रपति आम चुनावों के बाद लोकसभा की पहली बैठक की तिथि को ‘नियत तिथि’ के रूप में अधिसूचित करेंगे।

लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ

‘नियत तिथि’ के बाद और लोकसभा का पूर्ण कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव के जरिये गठित सभी राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल अगले संसदीय चुनाव तक की अवधि का होगा। इस एक बार के अस्थायी उपाय के बाद सभी लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होंगे।

सरकार गिर जाए तो क्या होगा

कोविन्द कमेटी ने इसके साथ ही त्रिशंकु सदन, अविश्वास प्रस्ताव या फिर ऐसी किसी स्थिति में नए सदन के गठन के लिए नए सिरे से चुनाव कराने की सिफारिश तो की है, लेकिन ऐसी स्थिति में नई लोकसभा का कार्यकाल बची अवधि के लिए ही होगा।

यानी चुनाव के बाद गठित सरकार यदि एक वर्ष के बाद किसी कारण से गिर जाए और दूसरा कोई दल सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है, तो नए सिरे से चुनाव हो सकते हैं। लेकिन इस दौरान नए सदन का गठन बाकी बचे चार वर्षों के लिए ही होगा।

त्रिशंकु या अविश्वास प्रस्ताव की स्थिति में क्या होगा

मौजूदा व्यवस्था में बीच में चुनाव की नौबत आने के बाद सदन का कार्यकाल फिर पांच वर्षों का हो जाता है। इस कारण ही आजादी के बाद लोकसभा और विधानसभाओं के साथ शुरू हुए चुनाव आज अलग-अलग वर्षों में हो रहे हैं।

कमेटी ने लोकसभा की तरह विधानसभाओं के गठन को लेकर भी अपनी सिफारिशें दी हैं, जिसमें त्रिशंकु या फिर अविश्वास प्रस्ताव जैसी स्थिति में नए चुनाव हो सकते हैं, लेकिन नई विधानसभा का कार्यकाल लोकसभा के कार्यकाल के अंत तक ही रहेगा, बशर्ते उसे पहले भंग न किया गया हो।

एक साथ कैसे होंगे चुनाव

कोविंद समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि लोकसभा चुनाव हो जाने के बाद जो पहले दिन होगा काम का, उसको अपॉइंटेड डेट माना जाए। राष्ट्रपति द्वारा एक तिथि निर्धारित कर दी जाए ताकि एक साथ सभी चुनाव फिर से करवाया जा सके।

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इसके लिए यह ध्यान में रखना होगा कि किसका कार्यकाल कब खत्म हो रहा है। कमेटी ने इसके लिए संविधान के अनुच्छेद-83 (संसद की अवधि) और अनुच्छेद-172 (राज्य विधानसभा की अवधि) में जरूरी संशोधनों की सिफारिश भी की है।

वर्ष 2024 से 2029 के बीच इन राज्यों में होने हैं चुनाव

  • वर्ष 2024- अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, हरियाणा और महाराष्ट्र
  • वर्ष 2025- झारखंड, बिहार और दिल्ली
  • वर्ष 2026- पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी
  • वर्ष 2027- मणिपुर, गोवा, पंजाब, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और गुजरात
  • वर्ष 2028- हिमाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा, कर्नाटक, तेलंगाना, मिजोरम, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान

यदि कोविंद समिति की सिफारिश राष्ट्रपति द्वारा मान ली जाती हैं तो 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद जितने भी विधानसभा चुनाव होंगे उनकी अवधि 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ खत्म हो जाएगी। जैसे 2026 में केरल में चुनाव होने हैं, अगर सिफारिश मान ली जाती है तो इनका कार्यकाल 2029 में ही खत्म हो जाएगा, ताकि 2029 में एक साथ चुनाव हो सके।

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