Jalandhar News: जालंधर के स्वीमिंग पूल में बच्चे की मौत, न मानक- न लाइसेंस… न NOC, सिर्फ गड्ढ़ा खोदकर बना दिया स्वीमिंग पूल

Daily Samvad
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डेली संवाद, जालंधर। Jalandhar News: जालंधर में गर्मी से राहत पाने के लिए स्विमिंग पूल (Swimming Pool) में नहाने गए बच्चे की पानी में डूबने से मौत हो गई। बच्चा घर नहीं पहुंचा तो परिजन उसे ढूंढते हुए स्विमिंग पूल में पहुंचे। वहां लगे CCTV कैमरे चेक किए तो बच्चे के डूबने का खुलासा हुआ। जिस स्वीमिंग पूल में बच्चे की मौत हुई, वह किसी भी मानक पर खरा नहीं उतरता। फिर भी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मेहरबानी से स्वीमिंग पूल चल रहा है।

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पिता भीम बहादुर ने बताया कि वे मूल रूप से नेपाल के रहने वाले हैं। जालंधर में वह दानिशमंदा कॉलोनी में रहते हैं। उसका बेटा माधव (13) मंगलवार शाम को 4 दोस्तों के साथ सन सिटी कॉलोनी स्थित रॉयल स्विमिंग पूल में नहाने के लिए गया था। रात 9 बजे तक माधव घर नहीं आया तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की।

Royal Swiming Pool Jalandhar

CCTV कैमरे चेक किए

माधव के दोस्तों से भी पूछताछ की गई। उन्होंने बताया कि सभी मिलकर पूल में गए थे। इसके बाद परिवार के लोग उसे ढूंढते हुए स्विमिंग पूल तक पहुंचे। शक होने पर परिवार के लोगों ने पूल में लगे CCTV कैमरे चेक किए।

मर गया माधव, मई गई अफसरों की संवेदनाएं

CCTV के मुताबिक, शाम 6.07 पर माधव ने स्विमिंग पूल में आखिरी छलांग लगाई थी। इसके बाद माधव बाहर नहीं आया। परिजनों ने पूल में तलाश की तो माधव बेसुध हालत में मिला। इसके तुरंत बाद उसे अस्पताल में ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने चेकअप के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

मृतक बच्चे माधव की फाइल फोटो

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बच्चे की मौत की सूचना के बाद थाना लांबड़ा के ASI निरंजन सिंह पुलिस पार्टी के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर सिविल अस्पताल के पोस्टमॉर्टम रूम में रखवा दिया।

स्वीमिंग पूल का मालिक बोला- कोच हैं

उधर, रॉयल स्विमिंग पुल के मालिक बलजीत सिंह उर्फ लड्डू ने कहा कि वह खुद भी स्विमिंग जानते हैं। उन्होंने कोच भी रखे हुए हैं। 6 बजे पुल बंद कर दिया गया था। 6.07 पर बच्चे ने छलांग लगाई है। इससे पहले कई बार उसे बाहर आने के लिए कहा गया था। लेकिन सीसीटीवी में साफ दिख रहा है जब कई बच्चे पूल में छलांग मार रहे हैं तो वहां न तो कोई कोच है और न ही कोई लाइफ गाई।

जिला प्रशासन को कोई जानकारी नहीं

लाइफ गार्ड तो छोड़िए, संचालकों ने अन्य मानकों को भी पूरा नहीं किया है। मोटी कमाई के लिए संचालक एक समय में तीस से 50 लोगों को एक साथ स्विमिंग पूल में भेज देते हैं। मजे की बात यह भी है कि खुलेआम संचालित हो रहे इन स्विमिंग पूलों की जानकारी जिला प्रशासन को नहीं है।

स्विमिंग पूल संचालित करने के लिए लेनी होती एनओसी

स्विमिंग पूल संचालित करने के लिए फायर ब्रिगेड व पुलिस कार्यालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना होता है। इन विभागों से एनओसी मिलने के बाद जिला स्पोर्ट स्टेडियम में संंबंधित विभाग को निर्धारित पंजीयन का शुल्क जमा करना होता है। इसके बाद विभागीय अधिकारियों की ओर से मानकों की जांच होती है। जांच में सभी मानक पूर्ण पाए जाने पर अनुमति मिल जाती है।

स्वीमिंग पूल के लिए गाइडलांस

  • खेल निदेशालय से पूल का संचालन शुरू करने से पूर्व अनुमति लेनी जरूरी है।
  • स्विमिंग पूल में दो ऑक्सीजन सिलिंडर, दो कृत्रिम सांस यंत्र भी होने चाहिए।
  • पूल में फिल्टर प्लांट होना चाहिए जो प्रत्येक दिन चार से पांच घंटे चलाया जाए।
  • स्विमिंग पूल चलाने के लिए सबसे पहले स्विमिंग कोच जो राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय खिलाड़ी हो। उसकी जरूरत होती है।
  • प्रत्येक स्विमिंग पूल के लिए दो लाइफ गार्ड, जो भारतीय खेल प्राधिकरण से प्रमाणित हों।
  • पानी को साफ रखने के लिए क्लोरीन का इस्तेमाल किया जाता है। इससे बीमारियों से बचाव होता है।
















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