Ladies First: हमेशा ‘लेडीज फर्स्ट’ ही क्यों, ‘जेंट्स फर्स्ट’ क्यों नहीं? जानें इसके पीछे की कहानी

Daily Samvad
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Why is it always ladies first, not gents first?
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डेली संवाद, नई द‍िल्‍ली। Ladies First: आजकल, “लेडीज़ फर्स्ट” शब्द सुनना बहुत आम बात है और क्यों न हो, लोगों ने इसे इतनी गंभीरता से लिया है। अक्‍सर आपने लाेगाें काे लड़क‍ियों या मह‍िलाओं से ये कहते सुना होगा Ladies First। इसका सीधा मतलब ये है क‍ि उन्‍हें सबसे पहले जगह द‍िया जाए। पार्टीज में या फ‍िर क‍िसी पब्‍लि‍क प्‍लेस पर कोई भी पुरुष आगे बढ़कर दरवाजा खाेलता है। कोई कुर्सी ख‍िसकाता है तो वहीं पब्‍लि‍क प्‍लेस में लाइन में लगी मह‍िलाओं को आगे आने के ल‍िए कहता है। इसके अलावा ल‍िफ्ट में भी आपने देखा होगा क‍ि लड़का लड़की को ही पहले जाने देता है।

Why is it always ladies first?
Why is it always ladies first?

आज भी जारी है परंपरा

ये सब तो हम रोजाना देखते और सुनते आ रहे हैं। लेक‍िन क्‍या आपने कभी सोचा है क‍ि लेडीज फर्स्‍ट बोलने की शुरूआत कहां से हुई। आपको बता दें क‍ि Ladies First बोलने का ट्रेंड कोई आज का नहीं है, बल्‍क‍ि इसका इत‍िहास सद‍ियों पुराना है। इसकी जड़ें यूरोप के रॉयल और र‍िच फैम‍िली से जुड़ी हुईं हैं। उस दौरान मह‍िलाओं को खास इज्‍जत दी जाती थी। पुरुषों को भी यही स‍िखाया जाता था क‍ि वे उनका सम्‍मान करें।

आज मह‍िलाएं भले ही पुरुषों से कदम से कदम म‍िलाकर चल रहीं हैं, लेक‍िन से परंपरा अभी भी कहीं न कहीं जारी है। हालांक‍ि इसका तरीका और सोच थोड़ी बदल सी गई है। अगर आप अभी इसका इत‍िहास नहीं जानते थे तो आपको ये लेख जरूर पढ़ना चाह‍िए। हम आपको Ladies First बोलने की शुरुआत कहां से हुई, इसके बारे में बताने जा रहे हैं।

यूरोप से शुरू हुई थी परंपरा

एक फेमस मैगजीन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, Ladies First कहने की परंपरा पुराने यूरोप (Europe) से शुरू हुई थी। उस समय वहां के अमीर लोग ये मानते थे क‍ि महिलाओं को सम्‍मान देना चाहिए। उस दौरान मह‍िलाओं को नाजुक और खास समझा जाता था। इसी कारण शुरु से पुरुषों को स‍िखाया गया क‍ि वे महिलाओं के लिए दरवाजा खोलें, उन्हें आगे चलने दें या बैठने के लिए कुर्सी दें। इस परंपरा का ये मतलब ब‍िल्‍कुल भी नहीं था क‍ि मह‍िलाएं कमजोर हैं। बस ये उन्‍हें सम्‍मान और प्‍यार देने का खास तरीका था।

Titanic से भी जुड़ा है इत‍िहास

1912 में तब टाइटैनिक का जहाज डूब रहा था, उस दौरान भी ‘Ladies And Children First’ को पहले निकालने का निर्देश दिया गया था। ये भी Ladies First की सोच को मजबूत करता है। आपको बता दें क‍ि टाइटैनिक की घटना के बाद ये और भी बड़े स्तर पर स्वीकार कर ल‍िया गया था। एक ये भी कहावत है क‍ि Ladies First का ट्रेंड जर्मनी की गुफाओं से आया है। बताया जाता है क‍ि जब भी कोई जानवर आता था तो गुफा में रहने वाले पुरुष मह‍िलाओं को आगे कर देते थे, इसके बाद वे पीछे से हमला करते थे।

कप‍िल शर्मा ने भी कही ये बात

कपि‍ल शर्मा ने भी एक बार अपने शो में इस बात का ज‍िक्र क‍िया था क‍ि जब भी लड़क‍ियां पैदा होती हैं तो उन्‍हें लक्ष्‍मी का रूप माना जाता है। इस ल‍िए हर जगह लेडीज फर्स्‍ट कहा जाता है।

क्‍योंक‍ि हमें मालूम है क‍ि नए काम की शुरुआत अगर लड़क‍ियां करें तो वो हमेशा सफल होता है। उन्‍होंने चंद्रयान की टीम का ज‍िक्र करते हुए कहा क‍ि ज्‍यादातर लड़क‍ियां टीम का ह‍िस्‍सा थीं और उन्‍होंने जीत हास‍िल की।

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मानसी जायसवाल, डेली संवाद ऑनलाइन में डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। वे लोकल खबरों पर दमदार पकड़ रखते हैं। वह 5 सालों से अधिक समय से Daily Samvad (Digital) में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता करियर की शुरुआत डेली संवाद से की। उन्होंने पंजाब के जालंधर के खालसा कालेज से एमए की डिग्री हासिल की है।
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