डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: आज अधर्म पर धर्म की विजय के पर्व विजयदशमी पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपना सौवां स्थापना पर्व मनाया। आज के दिन 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने कुछ बच्चों को लेकर नागपुर में संघ की स्थापना की थी और आज यह संगठन दुनिया की सबसे बड़ा गैर-सरकारी संगठन बन चुका है। इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में समारोह आयोजित हुए, अपने लुधियाना महानगर में कुल 18 स्थानों पर कार्यक्रम हुए।
विधिवत शस्त्र पूजन किया
इन कार्यक्रमों के दौरान कार्यक्रम के अध्यक्ष , संघ के पदाधिकारी ,मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ताओं ने विधिवत शस्त्र पूजन किया। सभी कार्यक्रमों में क्षेत्र के गणमान्य लोग बन्धु/भगिनी व स्वयंसेवक बन्धु उपस्थित रहे। रघुनाथ नगर के समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता ललित गुप्ता, संघ लुधियाना विभाग सह कार्यवाह ने कहा कि ‘स्व’ बोध, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य निर्वहन, समरसता व आदर्श परिवार प्रणाली से ही भारत का समग्र विकास हो पाएगा।
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उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र के निर्माण व उत्थान के लिए वहां के नागरिकों का चरित्रवान व देशभक्ति के गुणों से परिपूर्ण होना आवश्यक है। कई बार चरित्र के बिना शिक्षा व ज्ञान भी घातक बन जाता है। उन्होंने कहा कि संघ चरित्र निर्माण से राष्ट्र निर्माण की कार्यपद्धति को लेकर राष्ट्र के परमवैभव के लिए काम कर रहा है।
श्री गुरु तेगबहादुर जी के आने वाले 350वें बलिदान दिवस पर उनका पुण्यस्मरण करते हुए उन्होंने ने कहा कि गुरुजी ने अपने जीवन का बलिदान देकर मानवाधिकारों व मानवीय मूल्यों की रक्षा का संदेश दिया। उन्होंने संदेश दिया कि दुनिया में हर धर्म सम्मानित है और किसी को धर्म के आधार पर दूसरों पर अत्याचार करने, किसी को धर्म बदलने के लिए विवश करने का अधिकार नहीं है।
उन्होंने यह भी संदेश दिया कि स्वधर्म की रक्षा के लिए अगर जीवन का बलिदान देना पड़े तो भी मानव को पीछे नहीं हटना चाहिए। संघ द्वारा दिए गए पंच परिवर्तनों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ‘स्व’ के बोध, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य निर्वहन, समरसता व आदर्श परिवार प्रणाली आदि पांच बिन्दुओं पर चल कर हम अपने देश का उत्थान कर सकते हैं।
संघ का मानना है कि एक सशक्त, सुसंकृत, और प्रत्येक क्षेत्र में प्रगतिशील राष्ट्र के लिए सामाजिक समरसता अनिवार्य प्रत्यय हैं। जाति, धर्म, वंश और लिंग के आधार पर विभेदित कोई भी राष्ट्र राष्ट्रीय एकता, अक्षुण्णता और आंतरिक सुरक्षा के स्तर पर विकास के मापांक को प्राप्त नहीं सकता है। संघ ‘परिवार’ को भारतीय संस्कृति, मूल्यों, आदर्शों और संस्कारों की आधारशिला मानता है। पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव और आधुनिक जीवनशैली के दबाव के कारण पारंपरिक पारिवारिक मूल्यों का क्षरण हो रहा है।









