डेली संवाद, जालंधर/फिरोजपुर। Punjab News: Jalandhar ED Probes Malbros Distillery Over Pollution Violations- जालंधर में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शराब कारोबारी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है। इसे लेकर जालंधर की पीएमएलए (PMLA) स्पेशल कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई गई है। शराब कारोबारी गौतम मल्होत्रा समेत कई लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई है।
पंजाब (Punjab) के फिरोजपुर (Ferozepur) जिले के जीरा क्षेत्र में स्थित शराब बनाने वाली कंपनी मेसर्ज मालब्रोस इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड (Malbros Distillery) की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कंपनी के खिलाफ प्रदूषण फैलाने और अवैध तरीके से कमाई करने के आरोपों की जांच तेज कर दी है।

स्पेशल कोर्ट में शिकायत दर्ज
इस संबंध में जालंधर की पीएमएलए (PMLA) स्पेशल कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत कंपनी, इसके निदेशक गौतम मल्होत्रा और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ दर्ज की गई है। ED की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि यह जांच पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (PPCB) के नियमों के उल्लंघन से जुड़ी हुई है।
जांच में सामने आया है कि मालब्रोस कंपनी ने फिरोजपुर जिले के जीरा ब्लॉक के गांव मंसूरवाला में अपनी एक इकाई स्थापित की थी। इस इकाई से निकलने वाले गंदे और प्रदूषित पानी को रिवर्स बोरिंग के जरिए जमीन के भीतर छोड़ा गया, जिससे भूजल बुरी तरह दूषित हुआ।
जमीन में प्रदूषित पानी छोड़ा गया
ED के अनुसार यह सारा काम बेहद गुप्त तरीके से किया जा रहा था ताकि किसी को इसकी भनक न लगे। केवल भूजल ही नहीं, बल्कि आसपास के किसानों की जमीनों में भी प्रदूषित पानी छोड़ा गया। इसके अलावा एक चीनी मिल के पास भी कंपनी द्वारा निकाला गया दूषित पानी छोड़े जाने के सबूत मिले हैं।

इन गतिविधियों के चलते इलाके के जल स्रोतों पर गंभीर असर पड़ा और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा। ED का दावा है कि कंपनी ने अपने इन अवैध संचालन के जरिए करीब 80 करोड़ रुपये की कमाई की। इसके खिलाफ किसान लगातार प्रदर्शनकर रहे हैं।
पहले भी हो चुकी है ED की कार्रवाई
यह पहली बार नहीं है जब मालब्रोस कंपनी ED के रडार पर आई हो। इससे पहले 16 जुलाई 2024 को ED ने इस मामले में कंपनी के छह ठिकानों पर छापेमारी की थी। तलाशी के दौरान मालब्रोस इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों के परिसरों से 78.15 लाख रुपये नकद बरामद किए गए थे।
यह कार्रवाई भी धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 17 के तहत की गई थी। ED ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जांच अभी जारी है और आने वाले समय में और खुलासे हो सकते हैं।
NGT में सरकार का हलफनामा
करीब एक महीने पहले पंजाब सरकार ने भी इस मामले में बड़ा कदम उठाते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में हलफनामा दाखिल किया था।
इस हलफनामे में सरकार ने पहली बार स्वीकार किया कि जीरा स्थित मालब्रोस डिस्टलरी के कारण क्षेत्र में गंभीर प्रदूषण फैल रहा है। सरकार ने यह भी कहा कि प्रदूषण को रोकने के लिए फैक्ट्री को स्थायी रूप से बंद करना ही एकमात्र समाधान है।

आंदोलनकारियों का संघर्ष
जीरा संझा मोर्चा और पब्लिक एक्शन कमेटी (PAC) के सदस्यों ने NGT में दाखिल इस हलफनामे को अपने लंबे संघर्ष की जीत बताया है। PAC के सदस्यों डॉ. अमनदीप बैंस, कपिल अरोड़ा और कुलदीप खैहरा ने कहा कि करीब तीन साल से वे इस मुद्दे को उठा रहे थे।
उन्होंने बताया कि सरकार के हलफनामे में दर्ज तीखे और अहम बयान उन सभी आरोपों की पुष्टि करते हैं, जो स्थानीय संगठनों और ग्रामीणों द्वारा लगाए जाते रहे हैं। उनका कहना है कि पहले सरकार इस मुद्दे पर अपना रुख साफ नहीं कर रही थी, लेकिन अब हलफनामा दाखिल होने के बाद स्पष्ट हो गया है कि फैक्ट्री को स्थायी तौर पर बंद किया जाएगा।
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उन्होंने इसे एक नैतिक जीत करार देते हुए कहा कि सरकार ने मान लिया है कि फैक्ट्री की गतिविधियों से लोगों की जान को खतरा था। साथ ही उन्होंने मांग की कि अब तक हुए पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई के लिए कंपनी से भारी जुर्माना वसूला जाए।
2022 से चल रहा है आंदोलन
गौरतलब है कि जीरा क्षेत्र में मालब्रोस डिस्टलरी के खिलाफ आंदोलन दिसंबर 2022 से लगातार चल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्री से निकलने वाला प्रदूषित पानी भूजल को दूषित कर रहा है, जिससे बच्चों में गंभीर बीमारियां फैल रही हैं और खेती को भारी नुकसान हो रहा है।

स्थानीय संगठनों और PAC ने कई बार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सरकार को शिकायतें दीं, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार वर्ष 2023 में मामला NGT पहुंचा, जहां ट्रिब्यूनल ने जांच के लिए कई रिपोर्टें तलब कीं और राज्य सरकार को स्पष्ट रुख अपनाने के निर्देश दिए।
दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो
सितंबर 2025 में NGT ने सरकार को अंतिम बयान शपथपत्र के रूप में दाखिल करने का आदेश दिया, जिसके बाद सरकार को यह हलफनामा पेश करना पड़ा। अब ED की जांच, NGT में सरकार के रुख और आंदोलनकारियों की जीत के बाद यह मामला एक निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है।
आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि दोषियों के खिलाफ कितनी सख्त कार्रवाई होती है और पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई कैसे की जाती है।











