Indore Water Tragedy: नगर निगम के कमिश्नर और एडिशनल कमिश्नर को शो-काज नोटिस, एसई समेत दो अफसरों का ट्रांसफर

प्रशासनिक फेरबदल के तहत खरगोन जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आकाश सिंह और आलीराजपुर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रखर सिंह को इंदौर नगर निगम का अपर आयुक्त नियुक्त किया गया है। इसके अलावा इंदौर उप परिवहन आयुक्त आशीष कुमार पाठक को भी निगम में अपर आयुक्त के पद पर पदस्थ किया गया है।

Daily Samvad
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Punjab Government
Highlights
  • देश के स्वच्छ शहरों में शुमार इंदौर में दूषित पानी
  • दूषित पानी से अब तक 15 लोगों की मौत हुई
  • सरकार ने अब जाकर लिया बड़ा एक्शन
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डेली संवाद, इंदौर। Indore Water Tragedy News Update: दूषित पानी से फैली बीमारी और उससे हुई मौतों के मामले ने मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की आर्थिक राजधानी इंदौर (Indore) में प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। इस गंभीर प्रकरण में अब तक 15 लोगों की मौत का दावा सामने आ चुका है, जबकि राज्य सरकार की स्टेटस रिपोर्ट में केवल 4 मौतों की पुष्टि की गई है। इस विरोधाभास ने न केवल पीड़ित परिवारों की पीड़ा बढ़ाई है, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने इंदौर (Indore) नगर निगम (Indore Municipal Corporation) कमिश्नर दिलीप यादव और एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। वहीं, एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया को तत्काल प्रभाव से इंदौर (Indore) से हटा दिया गया है। उन्हें किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग में उप सचिव के पद पर भेजा गया है। इसके साथ ही इंचार्ज सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव से जल वितरण कार्य विभाग का प्रभार भी वापस ले लिया गया है।

Indore Municipal Corporation
Indore Municipal Corporation

इस अफसर को बदला गया

प्रशासनिक फेरबदल के तहत खरगोन जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आकाश सिंह और आलीराजपुर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रखर सिंह को इंदौर (Indore) नगर निगम का अपर आयुक्त नियुक्त किया गया है। इसके अलावा इंदौर (Indore) उप परिवहन आयुक्त आशीष कुमार पाठक को भी निगम में अपर आयुक्त के पद पर पदस्थ किया गया है। इन नियुक्तियों को हालात पर नियंत्रण और व्यवस्था सुधारने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

इससे पहले राज्य सरकार ने दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर अपनी स्टेटस रिपोर्ट मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में पेश की थी। रिपोर्ट में सरकार ने केवल 4 लोगों की मौत की बात स्वीकार की है। हालांकि, यह दावा मृतकों के परिजनों, अस्पतालों के रिकॉर्ड और मीडिया रिपोर्ट्स से मेल नहीं खाता, जिनके अनुसार अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है।

मरने वाले में 5 महीने का मासूम भी

जानकारी के अनुसार सभी मृतकों को उल्टी-दस्त और पेट दर्द की गंभीर शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कुछ मरीजों को तेज बुखार भी था। मृतकों में 5 महीने का मासूम बच्चा भी शामिल है, वहीं बुजुर्गों की भी जान गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से गंदे और बदबूदार पानी की सप्लाई हो रही थी, जिसकी शिकायतें पहले भी की गई थीं, लेकिन समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

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मामले में दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 6 जनवरी तय की है। सुनवाई के दौरान इंटर विनर (हस्तक्षेपकर्ता) गोविंद सिंह बैस की ओर से मीडिया में इस मामले से जुड़ी खबरें प्रकाशित करने पर रोक लगाने की मांग भी की गई। हालांकि, कोर्ट ने इस मांग पर कोई टिप्पणी नहीं की और न ही फिलहाल कोई आदेश पारित किया।

Transfers Posting News
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान

इधर, इस पूरे मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी संज्ञान लिया है। आयोग ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव से पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इसके लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। NHRC की ओर से यह कदम मृतकों के अधिकारों और प्रशासनिक जवाबदेही को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि इंदौर जैसे बड़े शहर में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करना नगर निगम की मूल जिम्मेदारी है। यदि समय रहते शिकायतों पर ध्यान दिया जाता, तो इतनी बड़ी त्रासदी टाली जा सकती थी।

हाईकोर्ट में भी सुनवाई

अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई और NHRC की रिपोर्ट पर टिकी हैं। देखना होगा कि क्या इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होती है और पीड़ित परिवारों को न्याय मिल पाता है, या फिर यह मामला भी कागजी रिपोर्टों और आंकड़ों के खेल में उलझकर रह जाएगा।



















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