Punjab News: शहरी स्थानीय निकायों में जल्द मंजूरियाँ, विकेंद्रीकृत निर्णय प्रक्रिया और मिशन-मोड शहरी विकास जैसे प्रमुख प्रशासनिक सुधार लागू किए- संजीव अरोड़ा

Muskaan Dogra
5 Min Read
Punjab Government
Jalandhar AD
WhatsApp Group Join Now
WhatsApp Channel Join Now

डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: पंजाब के स्थानीय निकाय, उद्योग एवं वाणिज्य, बिजली तथा निवेश प्रोत्साहन संबंधी कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा (Sanjeev Arora) ने आज कहा कि राज्य सरकार ने पूरे पंजाब में विकास कार्यों के समयबद्ध निर्णय लेने, पारदर्शिता और निर्बाध क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबीज़) में प्रशासनिक, वित्तीय और संरचनात्मक सुधार किए हैं।

यूएलबीज़ के कार्यों की समीक्षा करते हुए कैबिनेट मंत्री ने कहा कि प्रस्तावों और मंजूरियों के लंबित रहने से विकास और जन सेवाएं प्रदान करने पर काफी प्रभाव पड़ा है। उन्होंने आगे बताया कि माननीय राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और माननीय मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की योग्य अगुवाई में इस समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार ने दैनिक निगरानी, व्यवस्थागत पुनर्गठन और सख्त समय-सीमाओं के माध्यम से सुधार-आधारित, विकेंद्रीकृत और जवाबदेही-आधारित शासन ढांचा अपनाया है।

बैकलॉग साफ किया गया

इसके परिणामस्वरूप लंबित प्रस्तावों का काफी बैकलॉग साफ किया गया है। पिछले 3 हफ्तों में शहरी आधारभूत ढांचे और शहरी विकास कार्यों को गति बहाल करते हुए 1100 लंबित प्रस्तावों में से 900 प्रस्तावों को क्लियर कर दिया गया है। इनमें से कुछ प्रस्ताव 2018 से लंबित थे। शेष मामले प्रक्रिया अधीन हैं और जल्द ही निपटाए जाने की उम्मीद है।

यह भी पढ़ें: जालंधर में सुपर क्रीमिका स्वीट्स और Zomato को लीगल नोटिस जारी

इन सुधारों को संस्थागत रूप देने के लिए ई-निगम सॉफ्टवेयर को 01.02.2026 से लागू किया गया है, ताकि सभी यूएलबीज़ में प्रस्तावों की ऑनलाइन प्रोसेसिंग हो सके। यह महत्वपूर्ण कदम दस्तावेजी प्रक्रियाओं से मुक्ति के साथ-साथ गति, पारदर्शिता, ट्रेसेबिलिटी और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में निर्णायक बदलाव का संकेत है। भविष्य में लंबित प्रस्तावों के समाधान के लिए और प्रक्रियागत सरलीकरण एवं विकेंद्रीकरण किया जा रहा है।

वित्तीय शक्तियों में वृद्धि और जल्द प्रोजेक्ट मंजूरियाँ देना

संजीव अरोड़ा ने घोषणा की कि फील्ड स्तर पर विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के लिए वित्तीय मंजूरी संबंधी शक्तियों में महत्वपूर्ण वृद्धि की गई है। अब सुपरिंटेंडिंग इंजीनियरों (एसईज़) को 1 करोड़ रुपये की सीमा से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये तक की वित्तीय मंजूरियाँ देने की शक्ति दी गई है।

मुख्य इंजीनियर्स (सीईज़) अब 10 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं को मंजूरी दे सकते हैं, जो पहले की 5 करोड़ रुपये की सीमा से दोगुनी है।

एक अन्य बड़े सुधार में मुख्य कार्यालय स्तर पर मुख्य इंजीनियरों की दो कमेटियों का गठन किया गया है, ताकि अड़चनों को खत्म किया जा सके और जीरो पेंडेंसी सुनिश्चित हो। पहले की एकल कमेटी की जगह अब यह व्यवस्था की गई है।

कैबिनेट मंत्री ने आगे निर्देश दिए कि सभी प्रस्ताव, सिफारिशें, तकनीकी मंजूरियाँ और स्थानीय निकायों के कार्यों से संबंधित मंजूरियाँ 10 कार्यकारी दिनों की सख्त समय-सीमा के अंदर पूर्ण की जाएँगी, जिससे समयबद्ध प्रशासन और अधिकारियों की जवाबदेही को और मजबूत किया जाएगा।

इंजीनियरिंग काडर और क्षेत्रीय ढांचे का तर्कसंगत करना

अरोड़ा ने बताया कि भौगोलिक और प्रशासनिक पहलुओं के आधार पर सभी शहरी स्थानीय निकायों को छह क्षेत्रों- अमृतसर, बठिंडा, फिरोजपुर, जालंधर, लुधियाना और पटियाला में पुनर्गठित किया गया है।

नए ढांचे के तहत प्रत्येक क्षेत्र के लिए एक मुख्य इंजीनियर नियुक्त किया गया है, जो नगर निगमों और काउंसिलों की निगरानी करता है, जिसमें बी एंड आर और ओ एंड एम संबंधी कार्य शामिल हैं। प्रति क्षेत्र एक सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर और प्रति जिला एक सब-डिविजनल इंजीनियर तैनात किया गया है।

इस तर्कसंगतता का उद्देश्य समन्वय को बेहतर बनाना, क्षेत्रीय स्तर की निगरानी को बढ़ाना और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाना है।

रेट कॉन्ट्रैक्ट के माध्यम से मिशन-मोड सीवर लाइन क्लीनिंग

कैबिनेट मंत्री ने बताया कि रेट कॉन्ट्रैक्ट के तहत सीवर लाइनों की सफाई के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिसमें 161 शहरी स्थानीय निकायों के कार्य पहले ही पूर्ण हो चुके हैं। पांच प्रमुख नगर निगमों- अमृतसर, जालंधर, लुधियाना, बठिंडा और पटियाला के लिए टेंडरिंग अंतिम चरण में है और इस कार्य के लिए छह एजेंसियों को सूचीबद्ध किया गया है।

उन्होंने आगे बताया कि नगर काउंसिलों को बार-बार टेंडर भरने से छूट दी गई है, जिससे पहले से मंजूर ठेकेदारों के माध्यम से तेजी से लामबंदी और देरी को कम किया गया है। यूनिट दरें निर्धारित करके सरकार ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए सार्वजनिक धन के मूल्य में उतार-चढ़ाव से बचाया है। ये कॉन्ट्रैक्ट मानसून से पहले सीवर लाइनों की मिशन-मोड सफाई सुनिश्चित करने के लिए तैयार किए गए हैं।



















Share This Article
Follow:
मुस्कान डोगरा, डेली संवाद ऑनलाइन में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वे क्राइम, राजनीति और लोकल खबरों पर दमदार पकड़ रखते हैं। वह 4 सालों से अधिक समय से Daily Samvad (Digital) में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता करियर की शुरुआत डेली संवाद से की। उन्होंने हरियाणा के महर्षि दयानंद युनिवर्सिटी से मास कॉम्यूनिकेशन की डिग्री हासिल की है।
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *