डेली संवाद, नई दिल्ली। Rahul Gandhi: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के हालिया भाषण को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। सत्ता पक्ष ने उनके कुछ बयानों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की तैयारी कर ली है। इस संबंध में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को नोटिस भेजा गया है और उनसे शाम तक जवाब देने को कहा गया है।
सरकार का कहना है कि जरूरत पड़ने पर उन्हें सदन में बुलाकर अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने के लिए कहा जा सकता है। दरअसल, लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने ‘एप्स्टीन फाइल्स’ (Epstein Files) का उल्लेख किया। आसन पर बैठे जगदंबिका पाल ने उन्हें इस संदर्भ में सावधानी बरतने को कहा, जिस पर राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने जवाब दिया कि वह एप्स्टीन (Epstein Files) का नाम नहीं लेंगे।
अडानी और अंबानी पर आरोप
हालांकि इसके बाद भी उन्होंने उद्योगपति गौतम अडानी (Gautam Adani) और अनिल अंबानी (Anil Ambani) का जिक्र करते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए, जिससे सदन का माहौल गरमा गया। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के बजट में उद्योगपति गौतम अडानी का प्रभाव साफ नजर आता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका में अडानी के खिलाफ दायर मुकदमा वास्तव में भारत के प्रधानमंत्री को निशाना बनाने की साजिश का हिस्सा है।
उनके मुताबिक, अमेरिकी कार्रवाई बीजेपी के कथित वित्तीय नेटवर्क को लक्ष्य बनाकर की गई है। इसके साथ ही राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने उद्योगपति अनिल अंबानी का नाम लेते हुए कहा कि उन्हें अब तक जेल नहीं भेजा गया, क्योंकि उनका नाम कथित रूप से ‘एप्स्टीन फाइल’ (Epstein Files) में है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम भी लिया और सवाल किया कि उन्हें एप्स्टीन से किसने मिलवाया था। इस बयान पर सत्ता पक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी।

राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस जारी किया गया है। बीजेपी ने उनके बयान को संसदीय मर्यादा के खिलाफ बताते हुए कड़ी आलोचना की। पार्टी प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि संसद लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था है और इस तरह के आरोप संसदीय परंपराओं को आहत करते हैं।
वहीं, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राहुल गांधी के आरोपों को बेबुनियाद करार दिया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी निभाने वाले और केवल भाषण देने के लिए संसद आने वाले नेताओं में फर्क होता है। पुरी ने स्पष्ट किया कि जेफरी एप्स्टीन के साथ उनकी कोई निजी या संदिग्ध बातचीत नहीं थी।
लिंक्डइन के सह-संस्थापक रीड हॉफमैन
पुरी के अनुसार, उनका मुख्य संपर्क लिंक्डइन के सह-संस्थापक रीड हॉफमैन से था, जिन्हें उन्होंने भारत आने का निमंत्रण दिया था। उन्होंने बताया कि तीन मिलियन ईमेल में उनका नाम केवल तीन-चार बार आया और वे कुछ अवसरों पर एक प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में एप्स्टीन से मिले थे। उनके बीच केवल एक ईमेल का आदान-प्रदान हुआ था और बातचीत ‘मेक इन इंडिया’ जैसे विषयों तक सीमित थी।
पुरी ने कहा कि उनका एप्स्टीन के कथित अपराधों से कोई संबंध नहीं है और उन्हें उसकी गतिविधियों में कोई दिलचस्पी नहीं थी। उन्होंने यहां तक कहा कि एप्स्टीन ने उन्हें ‘दोमुंहा’ तक कहा था। पुरी ने राहुल गांधी को ईमेल पढ़ने की सलाह देते हुए कहा कि तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करना उचित नहीं है।
राहुल गांधी पर कार्रवाई
इस पूरे घटनाक्रम के बाद संसद में राजनीतिक माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया है। अब सबकी नजर राहुल गांधी के जवाब और आगे की संसदीय कार्रवाई पर टिकी है।











