डेली संवाद, जालंधर/फतेहगढ़ साहिब। Punjab News: पंजाब सरकार करप्शन पर बड़ा प्रहार कर रही है। सरकार ने राजस्व विभाग में पकड़ी गई गड़बड़ियों पर सख्त एक्शन लिया है। सरकार के आदेश पर जहां एक तहसीलदार को तत्काल प्रभाव से सस्पैंड कर दिया गया है, वहीं जालंधर में कांग्रेसी नेता और पूर्व पार्षद 4 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई है।
पंजाब (Punjab) सरकार ने दो अलग अलग मामलों में बड़ी कार्रवाई की है। पंजाब सरकार (Punjab Government) ने फतेहगढ़ साहिब जिले (Fatehgarh Sahib) की खमाणो तहसील (Khamano Complaints) की तहसीलदार रमणदीप कौर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए की गई है।

डीसी दफ्तर से अटैच
निलंबन के आदेश पंजाब (Punjab) सरकार के राजस्व, पुनर्वास और आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी किए गए हैं। विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग वर्मा ने इन आदेशों पर हस्ताक्षर किए हैं। जारी आदेशों में कहा गया है कि रमणदीप कौर को तुरंत प्रभाव से सेवा से निलंबित किया जाता है। निलंबन अवधि के दौरान उनकी तैनाती रूपनगर के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में निर्धारित की गई है।
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उधर, जालंधर (Jalandhar) जिले में मृत व्यक्ति को जिंदा दिखाकर रजिस्ट्री करवाने वाले कांग्रेसी नेता और पूर्व पार्षद मंदीप कुमार के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इस मामले में पुलिस ने कांग्रेसी नेता समेत चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। फर्जी आधार कार्ड के जरिए 22.10 लाख में सौदा दिखाकर पूर्व पार्षद ने अपने नाम जमीन की रजिस्ट्री करवाई थी।

जालंधर में पूर्व पार्षद पर पर्चा
जानकारी के मुताबिक जालंधर (Jalandhar) के जमनादास की मौत 2023 में हो चुकी थी, लेकिन 24 अक्टूबर 2024 को उनकी जगह एक अन्य व्यक्ति को सब रजिस्ट्रार दफ्तर में पेश किया गया। इस व्यक्ति ने मृत जमनादास के नाम पर फर्जी आधार कार्ड भी बनाया था। फर्जी जमनादास से कांग्रेस नेता और मंदीप कुमार ने 17 मरले जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम करवा ली।
इस घोटाले की पोल तब खुली जब विदेश ले लौटे विजय भाटिया नामक व्यक्ति ने मामले की शिकायत की। पुलिस ने जांच करते हुए फर्जी जमनादास, कांग्रेसी नेता व पूर्व पार्षद मंदीप कुमार निवासी काकी पिंड, नंबरदास हरजिंदर सिंह और गुरदिंर सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

तहसील के अफसरों को बचाने की कोशिश
सूत्र बताते हैं कि जालंधर के इस केस में राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। क्योंकि इस फर्जीवाड़े में तहसील के कुछ कर्मचारी और अधिकारी की भूमिका भी संदिग्ध है। फिलहाल पुलिस इसकी जांच कर रही है।









