डेली संवाद, सीतापुर/कानपुर। BJP MLA News: उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं और पुलिस के बीच बढ़ती तनातनी एक बार फिर खुलकर सामने आई है। ताजा मामला सीतापुर जिले के रामपुर मथुरा थाने का है, जहां भाजपा (BJP) विधायक ज्ञान तिवारी पुलिस के खिलाफ धरने पर बैठ गए। इस दौरान विधायक और थानाध्यक्ष के बीच जमकर तीखी बहस हुई, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
जानकारी के अनुसार भाजपा (BJP) के विधायक ज्ञान तिवारी (BJP MLA Gyan Tiwari) अपने समर्थकों के साथ रामपुर मथुरा थाने पहुंचे थे। उनका आरोप था कि पुलिस क्षेत्र के गरीब और निर्दोष लोगों के साथ अन्याय कर रही है तथा उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा। इसी मुद्दे को लेकर वे थाना परिसर में ही धरने पर बैठ गए। धरने के दौरान माहौल उस समय और गरमा गया जब उनकी इंस्पेक्टर से सीधी बहस हो गई।

“मैं छोड़ दूंगा थाना” – इंस्पेक्टर
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बहस के दौरान थाना प्रभारी ने कहा, “सर, मैं छोड़ दूंगा थाना… मैं चला जाऊंगा।” इस पर विधायक ने कड़े शब्दों में जवाब देते हुए कहा, “अरे तुम क्या छोड़ दोगे यार… तुम्हारी जागीर है क्या? तुम थाना छोड़ दोगे, तुम तो भगाए जाओगे। तुम क्या छोड़ दोगे थाना, एहसान करोगे?” विधायक ने आगे कहा, “तुम्हारी औकात है? तुम इंस्पेक्टर से इस्तीफा लेकर दिखाओ हमको।”
इस तीखी नोकझोंक के बीच मौजूद अन्य पुलिस अधिकारियों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। एक वरिष्ठ अधिकारी विधायक को समझाकर अलग ले गए। हालांकि विधायक का गुस्सा शांत नहीं हुआ और उन्होंने आरोप लगाया कि “गरीब बेचारे लोगों को पुलिस ने बर्बाद कर दिया है।”

भाजपा नेताओं की पुलिस से बढ़ती टकराहट
प्रदेश में यह पहला मामला नहीं है जब भाजपा नेताओं और पुलिस के बीच सार्वजनिक टकराव देखने को मिला हो। इससे पहले कानपुर में राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला और उनके पति पूर्व सांसद अनिल शुक्ला वारसी का थाने में हंगामा काफी चर्चा में रहा था। उस घटना में भी पुलिस की कार्यशैली को लेकर सवाल उठाए गए थे और मंत्री समर्थकों के साथ थाने पहुंच गई थीं।
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सीतापुर (Sitapur) और कानपुर (Kanpur) की घटनाओं के बाद विपक्ष ने भी प्रदेश सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। विपक्षी दलों का कहना है कि जब सत्तारूढ़ दल के जनप्रतिनिधियों की ही पुलिस नहीं सुन रही, तो आम जनता की स्थिति क्या होगी। हालांकि भाजपा नेताओं का कहना है कि वे जनता की आवाज उठाने के लिए थाने पहुंचे थे और यह उनका जनप्रतिनिधि होने के नाते कर्तव्य है।
पुलिस का पक्ष
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और किसी भी मामले में कार्रवाई तथ्यों के आधार पर की जाती है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि विधायक द्वारा उठाए गए मुद्दों की जांच कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा, लेकिन कानून से ऊपर कोई नहीं है।

राजनीतिक और प्रशासनिक असर
रामपुर मथुरा थाने की घटना ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। माना जा रहा है कि इस पूरे प्रकरण की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों तक पहुंच चुकी है। यदि विवाद बढ़ता है तो संबंधित अधिकारियों के तबादले या विभागीय जांच की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में कुछ मामलों को लेकर पहले से ही असंतोष था, जिसे लेकर विधायक ने हस्तक्षेप किया। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि इस तरह की सार्वजनिक बहस से पुलिस-प्रशासन की छवि प्रभावित होती है और व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।
विधायक को आया गुस्सा, लगा दिया धरना, देखें
आगे क्या?
फिलहाल विधायक ज्ञान तिवारी का धरना समाप्त हो गया है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे दोबारा आंदोलन करेंगे। दूसरी ओर पुलिस ने आश्वासन दिया है कि सभी शिकायतों की निष्पक्ष जांच की जाएगी।
सीतापुर की यह घटना प्रदेश में सत्ता और प्रशासन के बीच संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ गई है। अब देखना होगा कि इस विवाद का समाधान किस तरह निकलता है और क्या इससे पुलिस-जनप्रतिनिधि संबंधों में सुधार आता है या टकराव और बढ़ता है।









