डेली संवाद, जालंधर। Jalandhar Sarvodaya Hospital Case News: पंजाब के जालंधर में सर्वोदया अस्पताल के डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगे हैं। आरोप है कि यहां एक महिला मरीज को रसौली की समस्या होने के बावजूद उसे किडनी रोगी बताकर डायलिसिस शुरू कर दिया गया। मामले को लेकर पीड़ित महिला और उसके परिजनों ने अस्पताल के बाहर जमकर हंगामा किया। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शिकायत लेकर जांच शुरू कर दी है।
मामला जालंधर के सर्वोदया अस्पताल (Sarvodaya Hospital) से जुड़ा बताया जा रहा है। पीड़ित महिला शीतल ने आरोप लगाया कि अस्पताल के डॉक्टरों ने उसे गलत तरीके से किडनी मरीज घोषित कर डायलिसिस शुरू कर दिया, जबकि बाद में अन्य अस्पतालों में जांच करवाने पर उसकी किडनी पूरी तरह ठीक पाई गई।

रसौली की समस्या को बताया किडनी रोग
पीड़ित शीतल ने बताया कि वह शादीशुदा है और उसका ससुराल बटाला (Batala) में है, जबकि मायका जालंधर (Jalandhar) के गाखला पुल इलाके में है। फिलहाल वह अपने मायके में ही रह रही है। शीतल के अनुसार वह वर्ष 2024 में ऑपरेशन करवाने के लिए सर्वोदया अस्पताल में भर्ती हुई थी। उसे रसौली और यूरिन रुकने की समस्या थी, जिसके लिए डॉक्टरों को ऑपरेशन करना था।
शीतल का आरोप है कि ऑपरेशन करने के बजाय डॉक्टरों ने उसे किडनी की गंभीर बीमारी होने की बात कह दी। इसके बाद उसके हाथ में डायलिसिस के लिए एक ‘डिब्बी’ यानी फिस्टुला लगा दिया गया और उसे डायलिसिस मरीज बना दिया गया।
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महिला ने बताया कि कुछ समय बाद उसे अस्पताल के इलाज पर शक हुआ। इसके बाद उसने अस्पताल से छुट्टी ले ली और दूसरे अस्पतालों में जांच करवाई। वहां हुए टेस्ट में पता चला कि उसकी किडनी बिल्कुल ठीक है और उसे डायलिसिस की कोई जरूरत ही नहीं थी।

इलाज के नाम पर 8 लाख हड़पे
पीड़िता ने आरोप लगाया कि अस्पताल ने इलाज के नाम पर उससे करीब 8 लाख रुपये ले लिए। अब हालत यह है कि हाथ में लगी फिस्टुला के कारण कोई भी डॉक्टर उसका ऑपरेशन करने के लिए तैयार नहीं हो रहा है। उसने बताया कि वह पंजाब के करीब 10 अलग-अलग अस्पतालों में इलाज के लिए जा चुकी है, लेकिन हर जगह से उसे निराशा ही मिली है।
शीतल की मां सौरन ने भी अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनकी बेटी को केवल रसौली और यूरिन से जुड़ी समस्या थी, लेकिन डॉक्टरों ने सात महीने तक गलत इलाज किया और झूठा दावा किया कि उसकी किडनी खराब हो चुकी है।
मां के अनुसार डॉक्टरों ने न केवल डायलिसिस शुरू कर दिया बल्कि उन पर भी दबाव बनाया गया कि वे अपनी किडनी बेटी को दान करें। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉक्टरों की ओर से उन्हें धमकियां भी दी गईं। इस पूरे मामले में परिवार की आर्थिक स्थिति भी खराब हो गई है। परिवार का कहना है कि इलाज के नाम पर 8 से 10 लाख रुपये खर्च हो गए और उन्हें अपना घर तक बेचने की नौबत आ गई।

अस्पताल के बाहर धरना
इस मामले को लेकर एंटी क्राइम और एंटी करप्शन संगठन भी सामने आया है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरिंदर सिंह कैरों (Surinder Singh Kairon) ने कहा कि लड़की को गलत तरीके से डायलिसिस पर डालकर परिवार को आर्थिक और मानसिक रूप से भारी नुकसान पहुंचाया गया है।
उन्होंने बताया कि जब संगठन के लोग अस्पताल प्रशासन से बात करने पहुंचे तो डॉक्टर ने समाधान देने के बजाय पुलिस बुला ली। संगठन ने मांग की है कि अस्पताल परिवार से लिया गया पूरा पैसा वापस करे और पीड़ित लड़की का सही इलाज करवाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अस्पताल प्रशासन ने जिम्मेदारी नहीं ली तो संगठन अस्पताल के बाहर धरना-प्रदर्शन करेगा।
इधर मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारी विजय कुमार ने बताया कि उन्हें लोगों की शिकायत मिली थी, जिसके बाद वे अस्पताल पहुंचे और परिवार की बात सुनी। पुलिस अधिकारी ने बताया कि परिवार से लिखित शिकायत ले ली गई है और मामले की जांच की जा रही है। यदि जांच में अस्पताल या डॉक्टर की लापरवाही सामने आती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।








