डेली संवाद, पटना। Nitish Kumar: बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री नितीश कुमार (Nitish Kumar) के राज्यसभा जाने की तैयारी को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। लगभग 21 वर्षों तक बिहार की सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश कुमार अब सक्रिय कार्यपालिका की भूमिका से हटकर संसद के उच्च सदन में जाने की राह पर दिखाई दे रहे हैं। जदयू नेतृत्व द्वारा इस संबंध में संकेत मिलने के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) गुरुवार सुबह 8 बजे अपने आवास पर जदयू विधायकों की अहम बैठक बुला ली है। इस बैठक में वे अपने फैसले की औपचारिक घोषणा कर सकते हैं। इसके बाद करीब 11:30 बजे वे राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर सकते हैं। इस घटनाक्रम के बीच एनडीए के सभी विधायकों को भी पटना तलब किया गया है, जिससे स्पष्ट है कि सत्ता परिवर्तन की संभावनाओं को लेकर अंदरखाने गंभीर मंथन चल रहा है।

अगला मुख्यमंत्री कौन?
यदि नीतीश कुमार (Nitish Kumar) राज्यसभा जाते हैं तो सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार इस पद की दौड़ में तीन नाम सबसे आगे बताए जा रहे हैं। इनमें बिहार भाजपा अध्यक्ष सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary), केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय (Nityanand Rai) और भाजपा के वरिष्ठ नेता दिलीप जायसवाल (Dilip Jaiswal) शामिल हैं। हालांकि अभी तक इस संबंध में आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन सियासी गलियारों में इन नामों पर लगातार चर्चा हो रही है।
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इस पूरे घटनाक्रम के बीच विपक्षी दलों ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। राष्ट्रीय जनता दल (Rashtriya Janata Dal) के प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव (Shakti Singh Yadav) ने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार (Nitish Kumar) पूरी तरह से भाजपा के प्रभाव में आ गए हैं और उन्हें जबरन राज्यसभा भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह वही स्थिति है जिसके बारे में पहले ही चेतावनी दी गई थी।

बिहार पर भाजपा कब्जा चाहती है
वहीं राजद नेता और बिहार विधानसभा में विपक्ष के प्रमुख चेहरे तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) का भी दावा है कि भाजपा बिहार (BJP Bihar) की सत्ता पर पूरी तरह नियंत्रण स्थापित करने की रणनीति पर काम कर रही है। राजद नेताओं का कहना है कि नीतीश कुमार (Nitish Kumar) को राज्यसभा भेजकर जदयू के भविष्य को कमजोर किया जा रहा है और इसके पीछे भाजपा की राजनीतिक रणनीति काम कर रही है।
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— Daily Samvad (@dailysamvad) March 5, 2026
दूसरी ओर भाजपा नेताओं ने इस संभावित बदलाव को सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया बताया है। भाजपा नेता दिलीप घोष (Dilip Ghosh) ने कहा कि नीतीश कुमार (Nitish Kumar) एक वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं। वे पहले लोकसभा में भी रह चुके हैं और लंबे समय तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं। ऐसे में यदि केंद्र सरकार उनके अनुभव का लाभ लेना चाहती है तो उन्हें राज्यसभा भेजना उचित कदम होगा। उन्होंने यह भी कहा कि नई पीढ़ी के नेताओं को भी राज्य की जिम्मेदारी संभालने का अवसर मिलना चाहिए।
नितीश कुमार को क्या हटा रहे हैं
इधर पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव (Pappu Yadav) ने भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए सवाल उठाया कि जब जनता ने नीतीश कुमार (Nitish Kumar) को मुख्यमंत्री बनाए रखने के लिए जनादेश दिया था, तो फिर तीन महीने के भीतर सत्ता समीकरण क्यों बदले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनादेश का अपमान जनता को स्वीकार नहीं होगा और इसके राजनीतिक परिणाम भी सामने आएंगे।
कुल मिलाकर, नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के संभावित राज्यसभा प्रस्थान से बिहार की राजनीति में बड़ा सत्ता परिवर्तन देखने को मिल सकता है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि राज्य की बागडोर किसके हाथों में जाएगी और इस बदलाव का बिहार की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा।








