डेली संवाद, नई दिल्ली। Cyber Fraud Case: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए शहर के दो बड़े चार्टर्ड अकाउंटेंट को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि दोनों चार्टर्ड अकाउंटेंट ने करोड़ों की धोखाधड़ी की थी।
प्रवर्तन निदेशालय (ED), मुख्यालय अन्वेषण इकाई, नई दिल्ली ने साहबर धोखाधड़ी के एक मामले की जांच के सिलसिले में चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक कुमार शमी तथा चार्टर्ड अकाउंटेंट भास्कर यादव को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत दिनांक 28.02 2026 को गिरफ्तार किया है।
बड़े पैमाने पर साइबर सक्षम धोखाधड़ी
ईडी (ED) द्वारा की गई जांच से पता चला है कि बड़े पैमाने पर साइबर सक्षम धोखाधड़ी की गई, जिसमें भारत भर के निर्दोष नागरिकों को निवेश के अवसरों, अंशकालिक नौकरी योजनाओं, क्यूआर कोड आधारित घोटाली, फिशिंग अभियानी तथा अन्य धोखाधडीपूर्ण डिजिटल प्रलोभनों के माध्यम से धन हस्तांतरित करने के लिए प्रेरित किया गया। साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त अपराध की आय लगभग रु641 करोड़ प्रारंभ में कुछ टेलीग्राम समूहों के सदस्यों द्वारा प्रबंधित एवं संचालित म्यूल खाती में जमा की गई।
शेल संस्थाओं के नेटवर्क के माध्यम से परतबद्ध किया
इसके पश्चात धन के वास्तविक मोत को छिपाने एवं उसे जटिल बनाने के उद्देश्य से इस धनराशि को पूरे भारत में स्थापित डमी शेल संस्थाओं के नेटवर्क के माध्यम से परतबद्ध किया गया। इसके बाद धोखाधड़ी से अर्जित धनराशि को आरतीय बैंकों द्वारा जारी वीजा तथा मास्टर डेबिट कार्डों के माध्यम से यूएई स्थित फिनटेक प्लेटफॉर्म “पौवाईवाईवाईपीएल में अंतरित किया गया, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपयोग किए जाने योग्य प्रीपेड कार्ड प्रदान करता है तथा जिसे अबू धाबी ग्लोबल मार्केट फाइनेंशियल सर्विसेज रेगुलेटरी अथॉरिटी (एडीजीएम) द्वारा विनियमित किया जाता है।
यह भी पढ़ें: Japnoor Travels के सतनाम सिंह पर 45 लाख रुपए ठगी का आरोप, किसानों ने दफ्तर घेरा
पौवाईवाईवाईपीएल वॉलेट में धनराशि को या तो विदेशों में, विशेष रूप से दुबई में एटीएम एवं पीओएस लेनदेन के माध्यम से निकाला गया अथवा उसे बाइर्नस क्रिप्टो एक्सचेंज के माध्यम से वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (वीडीए) में परिवर्तित किया गया। इसके पश्चात धन के स्रोत को छिपाने तथा अपराध की आय को वैध संपत्ति के रूप में प्रस्तुत करने के उद्द्देश्य से इसे कस्टोडियल एवं नॉन-कस्टोडियन वॉलेट्स की एक जटिल श्रृंखला के माध्यम से आगे अंतरित किया गया।
20 से अधिक संस्थाओं को नियंत्रित किया
जांच के दौरान यह भी पता चला कि चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक कुमार शर्मा, भास्कर यादव, अजय तथा विपिन यादव सहित शिक्षित पेशेवरी का एक संगठित सिंडिकेट एक समन्वित मनी लॉन्डिंग तंत्र का संचालन कर रहा था। इस सिंडिकेट द्वारा ब्रिजवासन, दिल्ली स्थित सामान्य पर्ती से संचालित 20 से अधिक संस्थाओं को नियंत्रित किया जा रहा था, जिनमें साझेदारों एवं अधिकृत हस्ताक्षरकतौओं का आपसी ओवरलैप पाया गया तथा केवाईसी दस्तावेजी, मोबाइल नंबरों और ईमेल आईडी में समानता भी पाई गई।
ये संस्थाएं अवैध धन की व्यवस्थित परतीकरण तथा उसके बाद भारत से बाहर अंतरण के लिए माध्यम के रूप में कार्य कर रही थीं। जांच के दौरान, दिनांक 28.11.2024 को अशोक कुमार शर्मा एवं भास्कर यादव के आवास सहित विभिन्न स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया। अशोक कुमार शर्मा के आवास पर तलाशी के दौरान वह जानबूझकर परिसर से भाग गया तथा कानूनी कार्रवाई से बचने का प्रयास करते हुए कथित रूप से ईडी अधिकारियों पर हमला किया। इस संबंध में अशोक कुमार शमी एवं उनके भाई सुभाष शर्मा के विरुद्ध पुलिस थाना कपाशेरा, नई दिल्ली में प्राथमिकी दर्ज की गई।
अपराध-संकेती दस्तावेज बरामद
इसी प्रकार, भास्कर यादव भी यह जानकारी मिलने पर कि ईडी अधिकारी उसके परिसर पर तलाशी हेतु पहुंचे हैं, अपने आवास से फरार हो गया। तलाशी के दौरान सोए अशोक कुमार शर्मा के आवास से शेल संस्थाओं से संबंधित कई एटीएम कार्ड तथा चेक बुक सहित अपराध-संकेती दस्तावेज बरामद कर जब्त किए गए। दिनांक 28.11.2024 से अशोक कुमार शर्मा एवं भास्कर यादव फरार थे तथा पीएसएलए, 2002 के अंतर्गत जांच से बचने के उद्द्देश्य से अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर रहे थे।
हालांकि, उनके आवेदन क्रमशः माननीय विशेष न्यायालय द्वारा दिनांक 15.01.2025 को तथा माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा दिनाक 02.02.2026 को आरोपी की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्यों तथा पीएमएलए, 2002 की धारा 45 की कठोरता को ध्यान में रखते हुए खारिज कर दिए गए। इसके पश्चात आस्कर यादव द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की गई, जिसे दिनांक 18.02.2026 को संबंधित न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण करने के निर्देश के साथ खारिज कर दिया गया।
साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष रखा
आरोपी अशोक कुमार शर्मा एवं भास्कर यादव दद्वारा आत्मसमर्पण किए जाने के उपरांत उन्हें पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया। इस मामले में ईडी ने सभी न्यायिक स्तरों पर प्रभावी रूप से अपना पक्ष प्रस्तुत करते हुए जांच के दौरान एकत्र किए गए साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष रखा, जिसके परिणामस्वरूप अंततः आरोपियों को माननीय न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण करने के लिए बाध्य होना पड़ा।
10 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया
अब तक की जांच के दौरान अशोक कुमार शर्मा एवं भास्कर यादव सहित कुल 10 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, दो अनंतिम कुर्की आदेश (पीएओ) जारी किए गए हैं, जिनके तहत लगभग रु8.67 करोड़ मूल्य की चल एवं अचल संपत्तियों को कुर्क किया गया है। साथ ही माननीय विशेष (पीएमएलए) न्यायालय के समक्ष दो अभियोजन शिकायत भी दायर की जा चुकी हैं। जिनका माननीय न्यायालय द्वारा संज्ञान लिया जा चुका है।








