डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: राज्य में नशे के कारोबार की वित्तीय संरचना की रीढ़ तोड़ने की दिशा में निर्णायक कदम उठाते हुए पंजाब पुलिस ने पिछले दो वर्षों के दौरान नशा तस्करों से जुड़ी 600 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्तियों को फ्रीज किया है। यह राज्य में नशीले पदार्थों से जुड़े वित्तीय नेटवर्क के खिलाफ चल रही कार्रवाई में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि पूरे देश में वर्ष 2024 के दौरान नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में फ्रीज की गई कुल संपत्तियों में से लगभग 50 प्रतिशत पंजाब पुलिस द्वारा फ्रीज की गई थीं।
यह रणनीति कानून लागू करने के प्रति सरकार की प्राथमिकता को दर्शाती है, जिसके तहत केवल अपराधियों को गिरफ्तार करना और नशीले पदार्थों को जब्त करना ही नहीं, बल्कि नशा तस्करी से अर्जित की गई अवैध संपत्तियों को भी योजनाबद्ध तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। तस्करों की अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई के पीछे पंजाब पुलिस का उद्देश्य नशे के कारोबार की आर्थिक जड़ों को खत्म करना है, क्योंकि इससे तस्करों को सबसे बड़ा आर्थिक नुकसान होता है।
330 करोड़ रुपये की संपत्तियां फ्रीज
हाल के वर्षों में संपत्तियों को फ्रीज करने की गति में उल्लेखनीय तेजी आई है। वर्ष 2024 में लगभग 330 करोड़ रुपये की संपत्तियां फ्रीज की गईं, जबकि वर्ष 2025 में करीब 270 करोड़ रुपये की संपत्तियां फ्रीज की गईं। उल्लेखनीय तथ्य यह है कि केवल पिछले दो वर्षों में ही 600 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्तियां फ्रीज की गई हैं, जो वर्ष 2017 के बाद से फ्रीज की गई लगभग 1000 करोड़ रुपये की कुल संपत्तियों के आधे से भी अधिक है। यह आंकड़ा नशे के कारोबार की वित्तीय जड़ों को खत्म करने के लिए तेज किए गए प्रयासों को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
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पंजाब पुलिस (Punjab Police) अब नियमित रूप से संपत्तियों, बैंक खातों, शेल कंपनियों, बेनामी होल्डिंग्स और लग्जरी संपत्तियों की जांच के माध्यम से नशे के कारोबार से होने वाली कमाई का पता लगा रही है। संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत आवासीय मकान, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, कृषि भूमि और महंगे वाहन—जो अवैध कमाई से हासिल किए गए हैं—की पहचान कर उन्हें फ्रीज किया जा रहा है।
“युद्ध नशों विरुद्ध” अभियान का एक महत्वपूर्ण स्तंभ
यह कार्रवाई पंजाब सरकार के “युद्ध नशों विरुद्ध” अभियान का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जिसका उद्देश्य कानून लागू करने, रोकथाम और पुनर्वास के माध्यम से नशे की समस्या से निपटना है। इस अभियान के तहत पंजाब पुलिस ने नशे के कारोबार को संचालित करने वाले नेटवर्क को खत्म करने के लिए खुफिया जानकारी आधारित कार्रवाई और वित्तीय जांच को और तेज कर दिया है।
उन्होंने कहा, “हम भारत के सबसे प्रभावी और वित्तीय ढांचे पर केंद्रित नशा विरोधी प्रवर्तन मॉडलों में से एक को लागू कर रहे हैं। हम केवल तस्करों को गिरफ्तार ही नहीं कर रहे, बल्कि नशे के वित्तीय साम्राज्य को भी खत्म कर रहे हैं। नशा तस्करी अवैध मुनाफे पर आधारित होती है। हमारी रणनीति नशीले पदार्थों की कमाई से बनाई गई संपत्तियों को योजनाबद्ध तरीके से चिन्हित कर फ्रीज करना है। जब तस्करों को यह एहसास होता है कि उनकी जमीन, संपत्तियां और दौलत जब्त की जा सकती है, तो नशे के कारोबार की आर्थिक नींव कमजोर होने लगती है। इसलिए नशा तस्करी के खिलाफ आर्थिक कार्रवाई और वित्तीय लड़ाई हमारी रणनीति का अहम हिस्सा है।”
कृषि भूमि तक की संपत्तियां फ्रीज
राज्य के कई जिलों में घरों, व्यावसायिक इमारतों से लेकर कृषि भूमि तक की संपत्तियां फ्रीज की जा चुकी हैं, जो यह स्पष्ट संदेश देती हैं कि नशे के पैसे से बनाई गई संपत्ति कानून की पहुंच से बाहर नहीं रहेगी। कानून लागू करने के अलावा यह कदम समाज को भी एक स्पष्ट संदेश देता है। अवैध रूप से अर्जित संपत्ति के खिलाफ प्रत्यक्ष कार्रवाई यह दर्शाती है कि नशे के कारोबार से आसान कमाई का दौर अब समाप्त हो रहा है।
संपत्तियों का आंकड़ा 600 करोड़ रुपये से अधिक
पिछले दो वर्षों में फ्रीज की गई संपत्तियों का आंकड़ा 600 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। पंजाब पुलिस के अनुसार यह प्रयास नशा तस्करी के आर्थिक नेटवर्क को कमजोर करने की एक दीर्घकालिक और सतत रणनीति का हिस्सा है। तस्करों से उनकी अवैध संपत्ति छीनकर राज्य सरकार नशे के कारोबार के जोखिम और लाभ के समीकरण को बदल रही है, जिससे पहले यह कारोबार आकर्षक प्रतीत होता था।








