डेली संवाद, चंडीगढ़। LPG Cylinder Crisis: ईरान-इजराइल युद्ध के कारण मध्य पूर्व में उत्पन्न स्थिति का असर भारत में तेल और गैस की आपूर्ति पर पड़ रहा है। गैस की भारी कमी है, जिसके चलते सरकार को नियम लागू करने पड़ रहे हैं।
घरेलू उपयोग के लिए गैस अभी भी उपलब्ध है, लेकिन व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की भारी कमी है। लोगों को एलपीजी (LPG) सिलेंडर जमा करने से रोकने और एलपीजी आपूर्ति में व्यवधान को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम (ESMA) लागू किया है।
यह भी पढ़ें: Japnoor Travels के सतनाम सिंह पर 45 लाख रुपए ठगी का आरोप, किसानों ने दफ्तर घेरा
सरकार ने घरेलू खाना पकाने की गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम (ईसी अधिनियम) का उपयोग किया है। इसने रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को एलपीजी उत्पादन को अधिकतम करने और प्रमुख हाइड्रोकार्बन संसाधनों को एलपीजी भंडार में लगाने का निर्देश दिया है।
ESMA क्या है?
आपको बता दें कि आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (ईएसएमए) एक ऐसा अधिनियम है जिसे कुछ सेवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है। ये सेवाएं सामान्य जीवन के लिए आवश्यक हैं और इनमें किसी भी प्रकार की बाधा का सीधा असर जनता पर पड़ता है। इन सेवाओं में सार्वजनिक परिवहन (बस सेवाएं) और स्वास्थ्य सेवाएं (डॉक्टर और अस्पताल) शामिल हैं।
सरकार ने आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम के तहत आपातकालीन शक्तियों का उपयोग करते हुए तेल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण उत्पन्न होने वाली संभावित बाधाओं को दूर करने के लिए घरेलू खाना पकाने की गैस की उपलब्धता को बढ़ाना है।
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की एलपीजी खपत 31.3 मिलियन टन तक पहुंचने का अनुमान था, जिसमें से केवल 12.8 मिलियन टन का उत्पादन घरेलू स्तर पर हुआ, जबकि शेष का आयात किया गया। बता दे कि लोगों को डर है कि अगर युद्ध की स्थिति बिगड़ती है, तो आने वाले दिनों में एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पाएंगे।








