डेली संवाद, लुधियाना। Punjab News: कनाडा में आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त विदेशी नागरिकों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी (CBSA) ने पंजाबी मूल के दो गैंगस्टरों अर्शदीप सिंह और सुखनाज सिंह संधू को देश से डिपोर्ट कर दिया है। दोनों पर रंगदारी मांगने, संगठित अपराध में शामिल होने और अवैध गतिविधियों को अंजाम देने के गंभीर आरोप थे। एजेंसी ने स्पष्ट कर दिया है कि कनाडा की धरती पर अपराध करने वालों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
CBSA ने 18 मार्च को जारी अपनी प्रेस विज्ञप्ति में इस कार्रवाई की जानकारी दी। एजेंसी ने बताया कि उसने ऐसे विदेशी नागरिकों की पहचान के लिए विशेष अभियान चलाया है, जो कनाडा में रहकर आपराधिक गतिविधियों में शामिल हैं। इस अभियान के तहत अब तक 372 इमिग्रेशन जांच शुरू की जा चुकी हैं। इनमें से 70 लोगों के खिलाफ निष्कासन आदेश जारी हुए हैं, जबकि 35 अपराधियों को पहले ही देश से बाहर निकाला जा चुका है।

भारतीय मूल के युवकों को डिपोर्ट किया
अधिकारियों के अनुसार, हाल ही में जिन दो भारतीय मूल के युवकों को डिपोर्ट किया गया है, उनमें अर्शदीप सिंह और सुखनाज सिंह संधू शामिल हैं। दोनों के खिलाफ रंगदारी वसूली और संगठित अपराध से जुड़े नेटवर्क का हिस्सा होने के पुख्ता सबूत मिले थे। इन मामलों को कनाडा में बढ़ते गैंग नेटवर्क और प्रवासी समुदायों को मिल रही धमकियों के संदर्भ में गंभीरता से लिया गया।
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अर्शदीप सिंह का मामला खास तौर पर चौंकाने वाला है। वह वर्ष 2022 में स्टडी परमिट पर बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर कनाडा (Canada) गया था। शुरुआती समय में पढ़ाई के लिए गया यह युवक धीरे-धीरे आपराधिक गिरोहों के संपर्क में आ गया और जल्द ही अपराध की दुनिया में सक्रिय हो गया। CBSA की जांच में सामने आया कि वह जबरन वसूली, फायरिंग की घटनाओं, ड्रग तस्करी और अवैध हथियारों के नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। नवंबर 2025 में एजेंसी ने उसे गिरफ्तार किया।

अर्शदीप सिंह को ‘पब्लिक डेंजर’ घोषित किया
जांच के बाद कनाडा के इमिग्रेशन एंड रिफ्यूजी बोर्ड (IRB) ने अर्शदीप सिंह को “पब्लिक डेंजर” घोषित कर दिया। दिसंबर 2025 में उसके खिलाफ निष्कासन आदेश जारी किया गया। सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए उसे कड़ी निगरानी में कनाडा से बाहर भेज दिया गया।
दूसरे मामले में सुखनाज सिंह संधू, जो 2016 से कनाडा में अस्थायी निवासी के रूप में रह रहा था, को भी संगठित अपराध में शामिल पाया गया। नवंबर 2025 में उसकी गिरफ्तारी हुई और जांच में उसे “ऑर्गनाइज्ड क्रिमिनैलिटी” के तहत दोषी ठहराया गया। करीब एक दशक तक कनाडा में रहने के बाद उसे भी हाल ही में डिपोर्ट कर दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि ये दोनों मामले उन लोगों के लिए सख्त संदेश हैं, जो विदेश जाकर अपराध का रास्ता अपनाते हैं।

रंगदारी मांगने की घटनाएं बढ़ी- CBSA
CBSA ने बताया कि कनाडा में हाल के महीनों में भारतीय मूल के व्यापारियों को धमकी भरे कॉल और रंगदारी मांगने की घटनाएं बढ़ी थीं। खासकर ‘पैसिफिक’ और ‘प्रेयरी’ क्षेत्रों में ऐसे मामलों की निगरानी अगस्त 2025 से तेज की गई थी, जिसे बाद में ग्रेटर टोरंटो एरिया (GTA) तक विस्तार दिया गया। इन घटनाओं के मद्देनजर एजेंसी ने सख्त कार्रवाई शुरू की है।
एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में कनाडा हर सप्ताह औसतन 400 ऐसे लोगों को देश से बाहर कर रहा है, जिनके पास वहां रहने का कानूनी अधिकार नहीं है या जो किसी न किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल पाए गए हैं। इसके अलावा, कनाडा सरकार ने “कनाडा बॉर्डर प्लान” के तहत 30.4 मिलियन डॉलर का बजट भी निर्धारित किया है, जिसका उद्देश्य हर साल लगभग 20,000 अवैध या आपराधिक प्रवासियों को देश से बाहर करना है। इस योजना के तहत 1,000 नए बॉर्डर अधिकारियों की भर्ती भी की जा रही है।







