डेली संवाद, जालंधर। GST News: जीएसटी विभाग ने करदाताओं के लिए रिटर्न फाइलिंग प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है, जिससे अब टैक्स जमा करने की प्रक्रिया पहले से अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित हो जाएगी। जीएसटी नेटवर्क (GSTN) द्वारा जारी नई एडवाइजरी के अनुसार, करदाता अब तभी अपना जीएसटी रिटर्न फाइल कर सकेंगे, जब वे अपने टैक्स दायित्वों का पूरा और स्पष्ट विवरण प्रस्तुत करेंगे।
नई व्यवस्था के तहत जीएसटी (GST) आर-3बी रिटर्न फाइल करने से पहले करदाताओं को पोर्टल पर उपलब्ध ‘टैक्स लायबिलिटी ब्रेकअप, ऐज एप्लिकेबल’ टैब को खोलना अनिवार्य कर दिया गया है। इस टैब में करदाताओं को यह स्पष्ट करना होगा कि वे जो टैक्स जमा कर रहे हैं, वह वर्तमान कर अवधि का है या पिछली अवधि का बकाया है।

रिटर्न फाइल नहीं कर पाएंगे
जीएसटीएन (GST) ने स्पष्ट किया है कि जब तक इस टैब में मांगी गई जानकारी को भरकर सेव नहीं किया जाएगा, तब तक रिटर्न को अंतिम रूप से सबमिट नहीं किया जा सकेगा। यानी करदाता डिजिटल सिग्नेचर (DSC) या ईवीसी (EVC) के माध्यम से भी रिटर्न फाइल नहीं कर पाएंगे, जब तक यह प्रक्रिया पूरी न हो जाए।
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इस बदलाव का उद्देश्य टैक्स भुगतान में पारदर्शिता बढ़ाना और ब्याज की गणना को अधिक सटीक बनाना है। टैक्स विशेषज्ञ और चार्टर्ड अकाउंटेंट बताते हैं कि पहले जब करदाता बकाया टैक्स जमा करते थे, तब यह स्पष्ट नहीं होता था कि वह राशि किस अवधि से संबंधित है। इससे ब्याज की गणना में भ्रम की स्थिति बनी रहती थी।

परेशानी का सामना
अब ‘टैक्स लायबिलिटी ब्रेकअप’ फीचर के लागू होने से यह स्पष्ट हो जाएगा कि करदाता किस अवधि का टैक्स जमा कर रहा है। इससे विभाग को तुरंत सही ब्याज निर्धारित करने में मदद मिलेगी और करदाताओं को भी भविष्य में किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
जीएसटीएन (GST) ने यह भी बताया कि यह बदलाव करदाताओं से मिले फीडबैक के आधार पर किया गया है और सिस्टम को लगातार बेहतर बनाने की प्रक्रिया जारी है। सभी करदाताओं को सलाह दी गई है कि वे रिटर्न फाइल करने से पहले ‘ब्रेकअप टैब’ में जाकर सभी आवश्यक जानकारी भरकर उसे सेव करना सुनिश्चित करें, ताकि रिटर्न फाइलिंग में कोई बाधा न आए।







