डेली संवाद, नई दिल्ली। Middle East War US Iran Conflict Israel Iran War: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच 28 फरवरी 2026 से शुरू हुआ सैन्य संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है, जिसकी चपेट में पूरा मिडिल ईस्ट (Middle East) आ चुका है। एक ओर अमेरिका और इजरायल संयुक्त रूप से ईरान (Iran) पर हमले कर रहे हैं, वहीं ईरान भी जोरदार जवाबी कार्रवाई कर रहा है। इस बीच सामने आई एक ताजा रिपोर्ट ने इस युद्ध की आर्थिक और मानवीय कीमत को लेकर गंभीर चिंता बढ़ा दी है।
बीबीसी (BBC) के विश्लेषण और सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) की रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध के शुरुआती दो हफ्तों में ही मिडिल ईस्ट (Middle East) में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लगभग 800 मिलियन डॉलर (करीब 7520 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ है। यह नुकसान मुख्य रूप से ईरान (Iran War) द्वारा किए गए जवाबी हवाई हमलों का परिणाम बताया गया है।
रणनीतिक ठिकानों को निशाना
रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा समन्वित हवाई हमले किए जाने के बाद ईरान (Iran War) ने एक सप्ताह के भीतर कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों में खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ढांचे को व्यापक क्षति पहुंची। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक नुकसान इससे भी ज्यादा हो सकता है, क्योंकि सभी सूचनाएं अभी सार्वजनिक नहीं हुई हैं।
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CSIS के सह-लेखक मार्क कैन्सियन के हवाले से कहा गया है कि क्षेत्र में अमेरिकी (US) ठिकानों को हुए नुकसान को लेकर अभी पूरी पारदर्शिता नहीं है। उन्होंने कहा कि मौजूदा आंकड़े केवल प्रारंभिक अनुमान हैं और जैसे-जैसे अधिक जानकारी सामने आएगी, नुकसान का दायरा और बढ़ सकता है।
सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया
ईरान (Iran War) ने खास तौर पर जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। जॉर्डन में एक एयरबेस पर तैनात टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) सिस्टम के रडार को भारी क्षति पहुंची है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 485 मिलियन डॉलर बताई जा रही है।
इसके अलावा, मिडिल ईस्ट (Middle East) में अमेरिकी एयरबेस की इमारतों और अन्य बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के कारण वॉशिंगटन को करीब 310 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त आर्थिक झटका लगा है। सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से यह भी सामने आया है कि ईरान ने कम से कम तीन प्रमुख एयरबेस पर बार-बार हमले किए। इनमें कुवैत का अली अल-सलीम बेस, कतर का अल-उदीद बेस और सऊदी अरब का प्रिंस सुल्तान एयरबेस शामिल हैं, जहां अलग-अलग चरणों में नई क्षति दर्ज की गई।
3200 लोगों की मौत
इस युद्ध का मानवीय प्रभाव भी बेहद गंभीर होता जा रहा है। अब तक अमेरिका के 13 सैनिकों की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, कुल मृतकों की संख्या 3,200 के करीब पहुंच चुकी है, जिनमें लगभग 1,400 आम नागरिक शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इसका असर केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस युद्ध पर टिकी हैं और हालात के जल्द शांत होने की उम्मीद की जा रही है।







