डेली संवाद, नई दिल्ली। Income Tax Act: 1 अप्रैल 2026 से भारत में इनकम टैक्स सिस्टम में एक बड़ा बदलाव लागू होने जा रहा है। सरकार पुराने आयकर अधिनियम, 1961 की जगह नया आयकर अधिनियम, 2025 लागू करेगी। यह बदलाव टैक्स स्लैब या दरों में परिवर्तन किए बिना पूरी टैक्स प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और आसान बनाने पर केंद्रित है। नए नियमों का सीधा असर करदाताओं की आय, निवेश और टैक्स फाइलिंग के तरीके पर पड़ेगा।
सबसे बड़ा बदलाव फॉर्म-16 को लेकर किया गया है। अब इसकी जगह फॉर्म-130 लागू किया जाएगा। यह नया फॉर्म कर्मचारियों के लिए टीडीएस सर्टिफिकेट के रूप में काम करेगा, जिसमें उनकी सैलरी, कटे हुए टैक्स और विभिन्न डिडक्शन की पूरी जानकारी पहले से भरी हुई मिलेगी। इसके साथ ही आयकर (Income Tax) रिटर्न (ITR) फाइलिंग प्रक्रिया को भी काफी हद तक ऑटोमेटेड किया जा रहा है।
फॉर्म में अपडेट हो जाएंगी
टैक्सपेयर्स की आय, निवेश, टैक्स कटौती और छूट से जुड़ी जानकारियां स्वतः फॉर्म में अपडेट हो जाएंगी, जिससे गलतियों की संभावना कम होगी और प्रक्रिया सरल बनेगी। नए नियमों में वेतनभोगी कर्मचारियों को मिलने वाले मील कार्ड या फूड वाउचर पर भी राहत दी गई है। पहले जहां प्रति भोजन 50 रुपये तक की टैक्स छूट मिलती थी, उसे बढ़ाकर 200 रुपये प्रति भोजन कर दिया गया है।
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यह छूट पुरानी और नई दोनों कर व्यवस्थाओं के तहत लागू होगी, जिससे कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी में कुछ बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। मकान किराया भत्ता (एचआरए) को लेकर भी अहम बदलाव किए गए हैं। पहले उच्च एचआरए छूट केवल चार महानगरों—दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई—तक सीमित थी, लेकिन अब इसे बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद तक विस्तारित कर दिया गया है।

एचआरए की सीमा
हालांकि, अन्य शहरों के लिए 40 प्रतिशत एचआरए की सीमा पहले की तरह ही लागू रहेगी। साथ ही, अब एचआरए का दावा करते समय मकान मालिक का पूरा विवरण देना अनिवार्य होगा। इसके लिए कर्मचारियों को फॉर्म-124 में घोषणा करनी होगी, ताकि फर्जी या बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावों पर रोक लगाई जा सके।
पैन कार्ड से जुड़े नियमों में भी सख्ती बढ़ाई गई है। अब केवल आधार कार्ड के आधार पर पैन आवेदन नहीं किया जा सकेगा, बल्कि अतिरिक्त दस्तावेजों की आवश्यकता होगी। इसके अलावा, कार खरीद-बिक्री जैसे बड़े लेन-देन और अन्य उच्च मूल्य के खर्चों में पैन की अनिवार्यता को और सख्ती से लागू किया जाएगा।
डिजिटल और पारदर्शी
नए आयकर नियमों का सबसे बड़ा उद्देश्य टैक्स सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाना है। अब करदाताओं को अपने सभी निवेश और खर्चों का सटीक रिकॉर्ड रखना होगा। यहां तक कि टैक्स-फ्री आय से जुड़े खर्चों को भी नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। हर लेन-देन का स्पष्ट हिसाब देना जरूरी होगा। कुल मिलाकर, यह नया सिस्टम करदाताओं के लिए प्रक्रिया को आसान तो बनाएगा, लेकिन साथ ही जिम्मेदारी भी बढ़ाएगा। सही जानकारी देना और वित्तीय अनुशासन बनाए रखना अब पहले से ज्यादा जरूरी हो जाएगा।








