डेली संवाद, कानपुर। GST Bogus Billing Scam: कानपुर से एक चौंकाने वाला आर्थिक घोटाला सामने आया है। कारोबारियों ने यहां जीएसटी (GST) चोरी करने के लिए 12वीं पास लड़कों को नौकरी पर रखा। 12वीं पास छात्रों ने अपने तीन अन्य साथियों के साथ मिलकर करीब 250 करोड़ रुपये का बड़ा फर्जीवाड़ा कर डाला। आरोपियों ने 38 बोगस फर्मों का रजिस्ट्रेशन कराकर जीएसटी (GST) और फर्जी बिलिंग के जरिए करोड़ों रुपये का गोलमाल किया।
मामले का खुलासा होने के बाद हड़कंप मच गया है और जांच एजेंसियां आरोपियों की तलाश में जुट गई हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दोनों छात्र पढ़ाई के साथ-साथ ऑनलाइन काम की तलाश में थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात कुछ कारोबारियों से हुई, जिन्होंने उन्हें फर्जी कंपनियां खोलकर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के जरिए मोटी कमाई का लालच दिया। इसके बाद पांच लोगों के इस गिरोह ने सुनियोजित तरीके से अलग-अलग नामों से 38 फर्मों का पंजीकरण कराया।

फर्जी पते पर फर्म खोली
जांच एजेंसियों के अनुसार इन फर्मों का कोई वास्तविक व्यापारिक अस्तित्व नहीं था। फर्जी पते, नकली दस्तावेज और किराए के आधार कार्ड-पैन कार्ड के जरिए जीएसटी (GST) नंबर हासिल किए गए। इसके बाद इन फर्मों के माध्यम से करोड़ों रुपये के फर्जी बिल जारी किए गए। कागजों पर माल की खरीद-फरोख्त दिखाई गई, जबकि वास्तव में कोई लेन-देन नहीं हुआ।
बताया जा रहा है कि गिरोह ने फर्जी बिलिंग के जरिए लगभग 250 करोड़ रुपये का टर्नओवर दिखाया और करोड़ों रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम (ITC) किया। इस खेल में कई अन्य राज्यों की कंपनियों को भी जोड़ा गया, ताकि लेन-देन असली प्रतीत हो। रकम को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर निकाल लिया जाता था, जिससे जांच में पकड़ना मुश्किल हो।

आईपी एड्रेस से पकड़े गए
मामले का खुलासा तब हुआ जब जीएसटी (GST) विभाग को कुछ संदिग्ध लेन-देन की सूचना मिली। डेटा एनालिसिस में कई फर्मों का एक ही आईपी एड्रेस और मोबाइल नंबर से संचालन सामने आया। इसके बाद विभाग ने गहन जांच शुरू की। छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, लैपटॉप, मोबाइल फोन और बैंक डिटेल्स बरामद किए गए हैं।
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अधिकारियों का कहना है कि इस फ्रॉड में शामिल अन्य लोगों की भी पहचान की जा रही है। बैंक अधिकारियों और दस्तावेज उपलब्ध कराने वालों की भूमिका की भी जांच हो रही है। फिलहाल मुख्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित की गई हैं।
मोटी कमाई का झांसा
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह संगठित आर्थिक अपराध है, जिसमें युवाओं को आसान कमाई का झांसा देकर इस्तेमाल किया गया। यदि समय रहते इसका खुलासा न होता तो सरकारी खजाने को और भी बड़ा नुकसान हो सकता था। मामले में संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

रिक्शा चालक के नाम पर फर्म
मामले में एक रिक्शा चालक के नाम से भी फर्जी फर्म खोले जाने का तथ्य सामने आया है। उसके बैंक खाते में करीब ₹1.50 करोड़ का ट्रांजेक्शन पाया गया, जबकि उसे इसकी कोई जानकारी नहीं थी। पुलिस ने संबंधित खाते में उपलब्ध राशि को फ्रीज करा दिया है और अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने दो आरोपियों—कपिल और राज उर्फ अमरदीप को गिरफ्तार किया है, जबकि पांच अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। तलाशी के दौरान 30 मोबाइल फोन और 52 चाबियां बरामद की गई हैं। पुलिस इन मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच कर डिजिटल साक्ष्य एकत्र कर रही है। बरामद चाबियों के संबंध में भी जांच की जा रही है कि उनका उपयोग किन परिसरों या लॉकरों के संचालन में किया जाता था।








