डेली संवाद, चंडीगढ़। Chandigarh Municipal Corporation Scam: नगर निगम से जुड़े 116 करोड़ रुपये के बहुचर्चित घोटाले में जांच के दौरान चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसियों को पता चला है कि आरोपियों ने सरकारी धन को ठिकाने लगाने के लिए कई शेल कंपनियों का सहारा लिया, जिनमें से कई कंपनियां ड्राइवरों और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर रजिस्टर्ड थीं। इस पूरे खेल में नगर निगम का अकाउंट अफसर मास्टर माइंड है।
नगर निगम चंडीगढ़ (Chandigarh) में हुए इस घोटाले की जांच में सामने आया कि “कैपको इन्फोटेक” नाम की कंपनी भूपिंदर सिंह और सपना के नाम पर दर्ज थी। सपना, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के ब्रांच मैनेजर रिभव ऋषि के ड्राइवर हेमराज की पत्नी बताई जा रही है। इसी तरह “आरएस ट्रेडर्स” नाम की कंपनी में मालिक के तौर पर हेमराज का नाम दर्ज है।
कालोनाइजर भी शामिल
इसके अलावा “स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट” कंपनी स्वाति सिंगला और उसके भाई के नाम पर बनाई गई थी। स्वाति सिंगला, बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर अभय कुमार की पत्नी है। प्रारंभिक जांच के अनुसार, इन शेल कंपनियों के जरिए करोड़ों रुपये का गबन किया गया और रकम को अलग-अलग माध्यमों से निवेश में लगाया गया।
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इस पूरे मामले में अब तक कई आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनसे पूछताछ में अहम जानकारी मिल रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस घोटाले में नगर निगम और स्मार्ट सिटी परियोजना से जुड़े कुछ अधिकारियों की भी मिलीभगत हो सकती है।
ये लोग घोटाले में शामिल
- नलिनी मलिक (पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी): फर्जी एफडीआर बनाने का आरोप, शेल कंपनी से मोटी रिश्वत लेने के आरोप
- सुखविंदर सिंह अबरोल (पूर्व प्रोजेक्ट डायरेक्टर, क्रेस्ट): सरकारी फंड को शेल कंपनियों में डायवर्ट कर अपने व सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर कराने का आरोप।
- साहिल कुक्कड़ (हेड आफ अकाउंट्स, क्रेस्ट): फर्जी लेन-देन का आरोप, हर ट्रांजैक्शन पर कमीशन लेने का आरोप।
- रिभव ऋषि (पूर्व बैंक मैनेजर): यह घोटाले का मास्टरमाइंड है। शेल कंपनियां बनाकर सरकारी फंड डायवर्ट किया।
- अभय कुमार (बैंक रिलेशनशिप मैनेजर): फर्जी एफडीआर बनाने का आरोप
- सीमा धीमान (बैंक आथराइजर): संदिग्ध ट्रांजैक्शन को मंजूरी देने में भूमिका।
- विक्रम वधवा (रियल एस्टेट कारोबारी): घोटाले की रकम से निवेश कर लाभ कमाने का आरोप
- अनुभव मिश्रा (नगर निगम अकाउंटेंट): फर्जी एफडीआर और रिकार्ड में हेरफेर का आरोप, अभी तक फरार है।
ऐसे हुआ घोटाला का खुलासा
घोटाले का खुलासा तब हुआ जब स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत मिली ग्रांट और फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) को नगर निगम के खाते में ट्रांसफर किया जाना था। इसी दौरान पाया गया कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में जमा एफडी की फर्जी रसीद तैयार की गई थी। असल में, आरोपितों ने एफडी से पैसे निकालकर शेल कंपनियों में ट्रांसफर कर दिए थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि घोटाले की रकम को रियल एस्टेट में निवेश किया गया, जिससे इसे वैध दिखाने की कोशिश की गई। मामले के उजागर होने के बाद पुलिस को शिकायत दी गई, जिसके बाद जांच तेज कर दी गई है।
फिलहाल, पुलिस और संबंधित एजेंसियां पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हैं। आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े और बड़े नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।








