डेली संवाद, जालंधर।
Jalandhar News: जालंधर में साल 2015 के हाई प्रोफाइल Kidney Racket की कड़ियाँ जैसे -जैसे दोबारा खुल रही हैं, वैसे वैसे इसमें शामिल और इसके दोषियों को बचाने वालों के हाथ पैर सूज रहे हैं। मालूम हो इस केस के मुख्य आरोपी सर्वोदय अस्पताल के डॉक्टर राजेश अग्रवाल, डॉ संजय मित्तल और कई अन्य डॉक्टर/ प्रबंधक हैं, जिन पर कई धाराओं के तहत केस चल रहे हैं।
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के इस केस में अपडेट यह है कि एक तरफ विटनेस विंडो खोलने के लिए पब्लिक प्रॉसिक्यूशन ने सेशन कोर्ट में अपील दायर कर रखी है। इस पर फैसला आना बाकी है। दूसरी तरफ State vs Junaid अवैध किडनी ट्रांसप्लांट केस में सुनवाई 6 अप्रैल 2026 को है।
पंजाब सहित देश भर में चर्चा
सवाल उठ रहा कि पंजाब सरकार के खुद के डिपार्टमेंट DRME (Directorate of Research and Medical Education, Punjab) ने बिना मंजूरी किडनी बदलने पर जब नेशनल किडनी अस्पताल का लाइसेंस रद्द किया तो आरोपी डॉक्टरों को DRME ने ही दोबारा लाइसेंस कैसे दिया।
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Jalandhar Kidney Racket[/caption]
इसी कड़ी में जो अब एक बहुत गंभीर नुक्ता सामने आ रहा है वो है कि जब इस केस से जुड़े अहम गवाह गवाही देना चाहते हैं तो उन्हें रोका क्यों जा रहा है। क्यों खुद सरकारी वकील को कोर्ट में बार बार अर्जी लगानी पड़ रही है कि गवाहों को सच बोलने की अनुमति दी जाए। आखिर 'Witness Window' जल्दबाजी में बंद क्यों की गई और किसके कहने पर हुई।
गवाही नहीं हुई
वादी पक्ष के वकीलों के मुताबिक इस केस की विटनेस विंडो को बंद कर दिया गया था। क़ानूनी एक्सपर्ट का मानना है कि अगर सभी गवाहियां समय पर हो जातीं तो लोगों को इंसाफ मिल जाता, करप्ट लोग जेल में होते और लोगों का न्याय में भरोसा बढ़ता।