डेली संवाद, लुधियाना। Punjab News: सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने देश की स्कूली शिक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। बोर्ड ने नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (एनसीएफ) 2023 की सिफारिशों को लागू करते हुए कक्षा 6 से ‘तीन भाषा फॉर्मूला’ को अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। इसके तहत छात्रों को अब आर1, आर2 और आर3 के रूप में तीन भाषाएं पढ़नी होंगी।
सीबीएसई ने सभी संबद्ध स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि वे इस नियम को तुरंत प्रभाव से लागू करें। बोर्ड ने साफ किया है कि स्कूल नई एनसीईआरटी किताबों के आने का इंतजार न करें। जब तक आधिकारिक पुस्तकें बाजार में उपलब्ध नहीं होतीं, तब तक स्कूल स्थानीय संसाधनों या अन्य सहायक पुस्तकों के माध्यम से तीसरी भाषा की पढ़ाई शुरू करवाएं।

स्कूलों को निर्देश दिया
इसके साथ ही स्कूलों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे अपने द्वारा चुनी गई तीसरी भाषा की जानकारी बोर्ड के ओएएसआईएस (OASIS) पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपडेट करें। क्षेत्रीय कार्यालयों को इस प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके।
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इस नए फैसले का सीधा असर छात्रों के भविष्य पर भी पड़ेगा। बोर्ड के अनुसार, कक्षा 9 और 10 में छात्र केवल उन्हीं भाषाओं का चयन कर सकेंगे, जिन्हें उन्होंने कक्षा 6 में तीसरी भाषा के रूप में पढ़ा होगा। यानी भाषा चयन अब शुरुआती कक्षाओं से ही तय हो जाएगा। सीबीएसई का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य छात्रों में बहुभाषी क्षमता, बेहतर संवाद कौशल और सांस्कृतिक समझ विकसित करना है, जिससे वे राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकें।









