डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: चंडीगढ़ के सेक्टर-37 स्थित पंजाब भाजपा मुख्यालय के बाहर हुए ग्रेनेड ब्लास्ट मामले को पुलिस ने सुलझा लेने का दावा किया है। पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव ने इस मामले में 5 आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। साथ ही पुलिस ने एक ग्रेनेड, हथियार और कारतूसों का जखीरा भी बरामद किया है। इस कार्रवाई को पंजाब पुलिस और चंडीगढ़ पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन का नतीजा बताया गया है।
पंजाब (Punjab) के डीजीपी गौरव यादव (DGP Gaurav Yadav) के अनुसार, काउंटर इंटेलिजेंस टीम ने चंडीगढ़ पुलिस के साथ मिलकर 1 अप्रैल को हुए इस ब्लास्ट की साजिश का पर्दाफाश किया। जांच के दौरान पूरे नेटवर्क की पहचान की गई और इसमें शामिल 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों में बलविंदर लाल उर्फ शम्मी, जसवीर सिंह उर्फ जस्सी, चरणजीत सिंह उर्फ चन्नी, रूबल चौहान और मनदीप उर्फ अभिजोत शर्मा शामिल हैं।
मुख्य आरोपी फरार
हालांकि, इस हमले के दो मुख्य आरोपी गुरतेज सिंह और अमनप्रीत सिंह अभी फरार हैं। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही उन्हें भी पकड़ लिया जाएगा। पुलिस के मुताबिक जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि यह पूरा मॉड्यूल पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़ा हुआ था।
डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि इस साजिश के तार विदेशों तक फैले हुए हैं और इसे पुर्तगाल व जर्मनी में बैठे हैंडलर्स द्वारा संचालित किया जा रहा था। इन विदेशी हैंडलर्स की पहचान कर ली गई है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों को हथियारों और विस्फोटकों की सप्लाई एक संगठित नेटवर्क के जरिए की गई थी। इस नेटवर्क में कई लोग अलग-अलग भूमिकाओं में शामिल थे।
पंजाब में अशांति फैलाना
पुलिस के अनुसार हैंड ग्रेनेड और कारतूसों की खेप कई चरणों में एक से दूसरे तक पहुंचाई गई, जिसके बाद इसे हमले को अंजाम देने वालों तक पहुंचाया गया। जानकारी के मुताबिक, पुर्तगाल में बैठे एक हैंडलर बलजोत सिंह उर्फ जोत के निर्देश पर इस पूरे हमले की योजना बनाई गई थी। इस मॉड्यूल का मकसद पंजाब में अशांति फैलाना था, जिसे पुलिस ने समय रहते नाकाम कर दिया।
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पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि हमले को अंजाम देने के बाद आरोपी लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहे। मुख्य आरोपी गुरतेज सिंह चंडीगढ़ में बाइक राइडर का काम करता था। वारदात को अंजाम देने के बाद वह और उसका साथी करीब 4 घंटे तक चंडीगढ़ और मोहाली में घूमते रहे। इसके बाद दोनों अपने घर रतनगढ़ पहुंचे, जहां उन्होंने सामान्य दिनचर्या की तरह खाना खाया और सो गए।
पंजाब के कई इलाकों में छापेमारी
हैरानी की बात यह रही कि करीब 12 घंटे तक पुलिस उनकी लोकेशन ट्रेस नहीं कर सकी। अगले दिन सुबह गुरतेज घर से सैर के बहाने निकला, जबकि दूसरा आरोपी अमनप्रीत भी कुछ समय बाद घर छोड़कर चला गया। जांच के दौरान पुलिस ने चंडीगढ़ और पंजाब के कई इलाकों में छापेमारी की।
सबसे पहले चंडीगढ़ पुलिस ने खरड़ में रेड की, जिसके बाद पंजाब के रतनगढ़ गांव में आरोपियों के घरों पर दबिश दी गई। हालांकि, तब तक आरोपी वहां से फरार हो चुके थे। पुलिस ने आरोपियों के घरों से महत्वपूर्ण सुराग जुटाए हैं। एक ट्रक से पीले लिफाफे में कारतूस बरामद किए गए हैं। इसके अलावा, मोबाइल फोन को सर्विलांस पर रखकर भी अहम जानकारी हासिल की गई।
ग्रेनेड और रिवॉल्वर हो सकते हैं
बताया जा रहा है कि फरार आरोपियों के पास अभी भी ग्रेनेड और रिवॉल्वर हो सकते हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। पुलिस ने कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी शुरू कर दी है, जिनमें एक महिला भी शामिल है, जो मुख्य आरोपी की करीबी बताई जा रही है।
गौरतलब है कि 1 अप्रैल की शाम को हुए इस ब्लास्ट में मौके पर खड़ी कई गाड़ियों के शीशे टूट गए थे और आसपास की दीवारों पर छर्रों के निशान मिले थे। घटना के वीडियो भी सामने आए थे, जिनमें एक व्यक्ति ग्रेनेड फेंकते और दो संदिग्ध बाइक पर भागते दिखाई दिए थे।
खालिस्तानी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी ली
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हुई थी, जिसमें एक खालिस्तानी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी ली थी। हालांकि, पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है। फिलहाल, पुलिस का कहना है कि पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए कार्रवाई जारी है और फरार आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।








