Avimukteshwaranand Controversy: सरकार की बड़ी कार्रवाई, इस PCS अफसर को किया सस्पैंड, सामने आई बड़ी वजह

अग्निहोत्री का कहना था कि उन्हें डीएम आवास में करीब 45 मिनट तक “बंधक” बनाकर रखा गया और एसएसपी के हस्तक्षेप के बाद ही उन्हें छोड़ा गया। हालांकि, प्रशासन की ओर से इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया गया। एडीएम ने बयान जारी कर कहा कि सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं।

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Highlights
  • UGC नियमों को लेकर देश में कड़ा विरोध
  • बरेली के सिटी मैजिस्ट्रेट ने दे दिया इस्तीफा
  • डीएम पर लगाया बंधक बनाने का आरोप
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डेली संवाद, नई दिल्ली/बरेली। Avimukteshwaranand Controversy: सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक पीसीएस अफसर को तत्काल प्रभाव से सस्पैंड कर दिया है। यह वही पीसीएस अफसर है, जिसने UGC के नए नियमों पर नाराजगी जताते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद इसकी इस्तीफे को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद (Avimukteshwaranand) से जुड़े कथित अपमान से भी जोड़ा गया। इसके बाद सरकार ने पीसीएस अफसर को तत्काल प्रभाव से सस्पैंड करते हुए जांच के आदेश दिए हैं।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद (Avimukteshwaranand) से जुड़े कथित अपमान के मामले में इस्तीफा देने वाले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री (Alankar Agnihotri, City Magistrate Bareilly) को राज्य सरकार ने सस्पेंड कर दिया है। शासन ने उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी जारी कर दिए हैं। हालांकि, अब तक उनका इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया गया है। शासन सूत्रों के मुताबिक, जांच पूरी होने के बाद ही इस्तीफे पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल, अग्निहोत्री को शामली से अटैच कर दिया गया है और पूरे प्रकरण की जांच बरेली मंडलायुक्त को सौंपी गई है।

Bareilly Magistrate Alankar Agnihotri Shankaracharya
Bareilly Magistrate Alankar Agnihotri

सिटी मैजिस्ट्रेट ने दिया था इस्तीफा

आपको बता दें कि बरली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री (Alankar Agnihotri, City Magistrate Bareilly) ने गणतंत्र दिवस के दिन अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने इसके पीछे यूजीसी (UGC) के नए कानून और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद (Avimukteshwaranand) के शिष्यों के साथ हुई कथित मारपीट को वजह बताया था। इस्तीफे के साथ उन्होंने पांच पन्नों का एक पत्र भी लिखा था, जिसमें सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर नाराजगी जाहिर की गई थी।

इस्तीफा देने के बाद उसी शाम करीब साढ़े सात बजे अग्निहोत्री जिलाधिकारी अविनाश सिंह से मिलने उनके आवास पहुंचे थे। बाद में बाहर आकर उन्होंने गंभीर आरोप लगाए। अग्निहोत्री का कहना था कि उन्हें डीएम आवास में करीब 45 मिनट तक “बंधक” बनाकर रखा गया और एसएसपी के हस्तक्षेप के बाद ही उन्हें छोड़ा गया। हालांकि, प्रशासन की ओर से इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया गया। एडीएम ने बयान जारी कर कहा कि सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं।

Avimukteshwaranand Controversy
Avimukteshwaranand Controversy

शंकराचार्य ने किया फोन

इस पूरे घटनाक्रम के बीच देर रात शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद (Avimukteshwaranand) ने सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री (Alankar Agnihotri, City Magistrate Bareilly) से फोन पर बातचीत की। शंकराचार्य ने उनसे कहा कि पूरा सनातनी समाज उनके फैसले से प्रसन्न है। उन्होंने यह भी कहा कि जो पद उन्हें सरकार ने दिया था, उससे बड़ा पद उन्हें धर्म के क्षेत्र में दिया जाएगा। इस बातचीत के बाद यह मामला और अधिक राजनीतिक व धार्मिक रंग लेता नजर आया।

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रात करीब 11 बजे अलंकार अग्निहोत्री (Alankar Agnihotri, City Magistrate Bareilly) ने अपना सरकारी आवास भी खाली कर दिया। हालांकि, वे बरेली में ही रुके हुए हैं और अपने एक परिचित के यहां ठहरे हैं। इस बीच, उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वे अपना इस्तीफा किसी भी हालत में वापस नहीं लेंगे। सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि उन्हें एक सुनियोजित साजिश के तहत डीएम आवास बुलाया गया था।

Avimukteshwaranand Controversy
Avimukteshwaranand Controversy

सरकार से मेरा मोहभंग हो गया

सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का आरोप है कि प्रशासन चाहता था कि वे कोई ऐसा लिखकर दे दें जिससे यह साबित हो सके कि उन्होंने अपना इस्तीफा “होल्ड” कर रखा है, ताकि बाद में किसी आरोप के तहत उन्हें सस्पेंड किया जा सके। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डीएम का फोन स्पीकर पर था और वहां मौजूद अन्य अधिकारियों के सामने अपमानजनक टिप्पणी की गई, जिस पर लोग हंसते रहे। अग्निहोत्री ने कहा, “मैं अपना इस्तीफा वापस नहीं लूंगा। सरकार से मेरा मोहभंग हो गया है। अब मुझे आगे क्या करना है, यह समाज तय करेगा।”

वहीं, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद (Avimukteshwaranand) ने भी इस पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ऐसी “अत्याचारी सरकार” का हिस्सा नहीं रहना चाहते थे, जो उन्हें भी पाप का भागीदार बनाती। शंकराचार्य ने बताया कि टेलीफोन पर बातचीत के दौरान अग्निहोत्री ने साफ कहा कि उनके लिए ऐसी सरकार का अंग बनकर काम करना संभव नहीं था।

सस्पेंशन और जांच का आदेश

इस घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज है। एक ओर सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए सस्पेंशन और जांच का आदेश दिया है, वहीं दूसरी ओर यह मामला अब प्रशासन बनाम धार्मिक भावना के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और इस्तीफे पर सरकार के फैसले से यह स्पष्ट होगा कि यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।



















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