Free Sanitary Pads: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, देशभर के स्कूलों में छात्राओं को मिलेंगे मुफ्त सैनिटरी पैड

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि मासिक धर्म स्वच्छता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत जीवन और निजता के अधिकार का अभिन्न अंग है। लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग वॉशरूम बनाने होंगे।

Muskaan Dogra
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Supreme Court
Punjab Government
Jalandhar AD
Highlights
  • छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने का निर्देश
  • सुप्रीम कोर्ट में पिछले 4 सालों से सुनवाई चल रही
  • आदेश को न मानने पर स्कूल की मान्यता होगी रद्द
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डेली संवाद, नई दिल्ली। Free Sanitary Pads: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने देशभर की स्कूली छात्राओं के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि मासिक धर्म स्वच्छता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत जीवन और निजता के अधिकार का अभिन्न अंग है। लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग वॉशरूम बनाने होंगे। जो स्कूल ऐसा नहीं कर पाएंगे, उनकी मान्यता रद्द की जाएगी।

Free Sanitary Pads
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सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे सभी स्कूलों में पढ़ने वाली लड़कियों को मुफ्त में बायोडिग्रेडेबल (पर्यावरण के अनुकूल) सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराएं। यह फैसला जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने सुनाया।

पूरे देश में लागू करने के आदेश

केंद्र सरकार की मासिक धर्म स्वच्छता नीति (Menstrual Hygiene Policy) को पूरे देश में लागू करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में पिछले 4 सालों से सुनवाई चल रही थी। कोर्ट ने आज सिर्फ फैसला सुनाया है। सोशल वर्कर जया ठाकुर ने 2022 में एक जनहित याचिका लगाई थी। उनकी मांग थी कि मेन्स्ट्रुयल हाइजीन पॉलिसी को पूरे देश में लागू किया जाए।

Free Sanitary Pads
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जस्टिस पारदीवाला ने फैसला सुनाने से पहले कहा कि इस मुद्दे पर बात खत्म करने से पहले, हम कहना चाहते हैं कि यह घोषणा सिर्फ कानूनी सिस्टम से जुड़े लोगों के लिए नहीं है। यह उन क्लासरूम के लिए भी है जहां लड़कियां मदद मांगने में हिचकिचाती हैं। यह उन शिक्षकों के लिए है जो मदद करना चाहते हैं लेकिन संसाधनों की कमी के कारण ऐसा नहीं कर पाते। प्रोग्रेस इस बात से तय होती है कि हम कमजोर लोगों की कितनी रक्षा करते हैं।

अलग-अलग शौचालय

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि हर स्कूल में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय हों। साथ ही, दिव्यांग छात्रों के लिए भी सुलभ शौचालय बनाए जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि यह नियम सरकारी और निजी, दोनों तरह के स्कूलों पर लागू होगा। शीर्ष अदालत ने चेतावनी दी कि अगर निजी स्कूल लड़कों और लड़कियों के लिए अलग शौचालय नहीं देते हैं या छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध नहीं कराते हैं, तो उन्हें मान्यता रद्द करने जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।



















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मुस्कान डोगरा, डेली संवाद ऑनलाइन में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वे क्राइम, राजनीति और लोकल खबरों पर दमदार पकड़ रखते हैं। वह 4 सालों से अधिक समय से Daily Samvad (Digital) में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता करियर की शुरुआत डेली संवाद से की। उन्होंने हरियाणा के महर्षि दयानंद युनिवर्सिटी से मास कॉम्यूनिकेशन की डिग्री हासिल की है।
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