डेली संवाद, नई दिल्ली। Donald Trump Epstein Files Transparency Act: अमेरिकी राजनीति में एक बार फिर जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों को लेकर हलचल तेज हो गई है। हाउस ज्यूडिशियरी कमेटी के वरिष्ठ सदस्य और शीर्ष डेमोक्रेट सांसद जेमी रस्किन ने दावा किया है कि सेंसर की गई एपस्टीन फाइलों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का नाम दस लाख से अधिक बार सामने आया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हर बार ‘डोनल्ड’ (Donald Trump) नाम का जिक्र जरूरी नहीं कि ट्रंप से ही संबंधित हो।
रस्किन को इन विवादास्पद दस्तावेजों की समीक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अमेरिकी समाचार आउटलेट ‘एक्सियोस’ को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि हाल ही में उन्होंने बिना एडिट की गई फाइलों में ‘ट्रंप’, ‘डोनल्ड’ और ‘डॉन’ शब्द सर्च किए। उनके मुताबिक, सर्च रिजल्ट में दस लाख से अधिक बार ये नाम सामने आए।

ट्रंप का नाम हर जगह
रस्किन ने इंटरव्यू में कहा, “ट्रंप का नाम हर जगह है।” हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह यह गारंटी नहीं दे सकते कि हर ‘डोनल्ड’ का जिक्र डोनल्ड ट्रंप (Donald Trump) से ही जुड़ा है, क्योंकि यह किसी अन्य व्यक्ति का नाम भी हो सकता है। उनके इस बयान के बाद अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई।
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इंटरव्यू प्रकाशित होने के बाद रस्किन ने एक्सियोस से दोबारा बातचीत कर अपनी बात स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने अब तक 30 लाख से अधिक फाइलें जारी नहीं की हैं और उनके पास हर एक दस्तावेज की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा करने का समय नहीं था। उन्होंने बताया कि उन्होंने केवल कीवर्ड सर्च के आधार पर यह संख्या देखी, जिससे दस लाख से अधिक परिणाम सामने आए।

‘एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट’
इस बीच, अमेरिकी न्याय विभाग ने पिछले महीने ‘एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट’ (Epstein Files) के तहत दस्तावेजों का एक बड़ा बैच सार्वजनिक किया था। डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच के अनुसार, विभाग 30 लाख से अधिक पन्नों के दस्तावेज, 2,000 से अधिक वीडियो और लगभग 1,80,000 तस्वीरें जारी कर रहा है। यह अब तक की सबसे बड़ी दस्तावेजी रिलीज मानी जा रही है।
इन दस्तावेजों में वे रिकॉर्ड भी शामिल हैं जिन्हें पिछले साल दिसंबर में रोका गया था। बताया जा रहा है कि राजनीतिक और सार्वजनिक दबाव के चलते प्रशासन को यह कानून लागू करना पड़ा और दस्तावेज सार्वजनिक करने पड़े। एपस्टीन, जो यौन शोषण और मानव तस्करी के आरोपों में घिरा था, 2019 में हिरासत के दौरान मृत पाया गया था। उसके संपर्कों और नेटवर्क को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।

राजनीति में नई बहस
रस्किन के दावे ने रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक खेमों के बीच नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दस्तावेजों में ट्रंप के नाम का संदर्भ किस रूप में है और उसका कानूनी या राजनीतिक असर क्या होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल नाम का उल्लेख होना किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप साबित नहीं करता, जब तक संदर्भ और सामग्री का विस्तृत विश्लेषण न किया जाए।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि इन दस्तावेजों की आगे की समीक्षा में क्या नई जानकारियां सामने आती हैं और क्या इस मामले का अमेरिकी राजनीति पर कोई ठोस प्रभाव पड़ता है।









