डेली संवाद, पंजाब। GST Bogus Billing Scam: क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए जीएसटी (GST) घोटाले का पर्दाफाश किया है, जिसमें लगभग 70 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। इसके साथ ही पंजाब के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
मिली जानकारी के मुताबिक मेरठ क्राइम ब्रांच (Meerut Crime Branch) ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए जीएसटी घोटाले (GST Scam) का पर्दाफाश किया है, जिसमें लगभग 70 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। वहीं पुलिस ने पंजाब (Punjab) के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

करोड़ों रुपये का टैक्स फ्रॉड
वहीं दोनों आरोपियों की पहचान गुरदीप सिंह निवासी फतेहगढ़ साहिब पंजाब (Fatehgarh Sahib, Punjab) और धर्मेंद्र कुमार निवासी फतेहगढ़ साहिब पंजाब (Fatehgarh Sahib, Punjab) के रूप में हुई है और दोनों पर फर्जी कंपनियां बनाकर करोड़ों रुपये का टैक्स फ्रॉड (Tax Fraud) करने का आरोप है।
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इस धोखाधड़ी के कारण सरकार को करीब 7 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ है। आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से फर्जी कंपनियां (Bogus Firm) बनाईं और उनके माध्यम से लगभग 69.99 करोड़ रुपये का फर्जी लेन-देन दिखाया।
इस दौरान, उन्होंने जीएसटी (GST) रिफंड प्राप्त करने के लिए निर्यात का झूठा दस्तावेज तैयार किया और विभिन्न गलत एचएसएन कोड का इस्तेमाल किया। जांच में पता चला कि आरोपियों ने बिना कोई वास्तविक माल या सेवा की आपूर्ति किए फर्जी बिल जारी किए, जिससे इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) प्राप्त किया।
सरकार को भारी नुकसान
इसके साथ ही, फर्जी आधार (Fake Adhar Card) और पैन कार्ड (PAN Card) का इस्तेमाल करके कंपनियां बनाई गईं और जीएसटी (GST) रिटर्न में कम बिक्री दिखाकर टैक्स की देनदारी घटाई गई। इन सभी गतिविधियों के माध्यम से आरोपियों ने कागजी लेन-देन करके सरकार को भारी नुकसान पहुंचाया।
वहीं 19 फरवरी 2026 को दोनों आरोपियों को पंजाब (Punjab) के मंडी गोबिंदगढ़ (Mandi Gobindgarh) स्थित एक ऑफिस से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उनके कब्जे से दो लैपटॉप और चार मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनमें डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित किए जा रहे हैं।

आरोपियों से पूछताछ जारी
पुलिस अब इन उपकरणों का विश्लेषण कर रही है और आरोपियों से पूछताछ के दौरान इस अपराध नेटवर्क से जुड़ी अन्य फर्मों और सहयोगियों का पता लगाने की कोशिश कर रही है। पुलिस ने बताया कि इस मामले में जांच जारी है और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
जालंधर में प्लास्टिक में GST चोरी
पंजाब के जालंधर में 23 फर्जी कंपनियां बनाकर 1000 करोड़ के टर्न ओवर और 130.50 करोड़ रुपए का जीएसटी चोरी का पर्दाफाश होने के बाद सैंट्रल जीएसटी (GST) की टीम ने पूछताछ के लिए पकड़े गए दो लोगों को छोड़ दिया। हालांकि इस फर्जीवाड़े में टांडा रोड के कारोबारी जसविंदर माही उर्फ हैप्पी को गिरफ्तार किया है, लेकिन दो लोगों को छोड़ने पर मामला संदिग्ध हो गया है।
जालंधर में सैंट्रल जीएसटी (GST) की टीम ने पिछले कुछ दिनों से लगातार छापेमारी और जांच कर रही थी। सैंट्रल जीएसटी (GST) की टीम ने बशीरपुरा, भारत नगर और कमल विहार में भी छापेमारी की। इस छापेमारी के दौरान कमल विहार से मनोज नाम के व्यक्ति को सैंट्रल जीएसटी (GST) की टीम ने काबू किया था। लेकिन अब उसको छोड़ दिया गया है।

दो लोग फरार
सैंट्रल जीएसटी (GST) के सूत्रों के मुताबिक कमल विहार के मनोज कुमार के साथ जूते चप्पल का सोल बनाने वाले सोल को भी पकड़ा गया था। लेकिन पूछताछ के बाद दोनों को छोड़ दिया गया है। बताया जा रहा है कि इन दोनों पर सैंट्रल जीएसटी (GST) के अफसरों ने मेहरबानी दिखाई है। इसके अलावा कई और नाम सामने आए हैं।
बताया जा रहा है कि इनका कारोबार दिल्ली के किसी प्लास्टिक कारोबारी से है। इसके तार दिल्ली से जुड़ते नजर आ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक प्लास्टिक और स्क्रैप पर 18 फीसदी जीएसटी (GST) लगती है। सैंट्रल जीएसटी (GST) ने प्लास्टिक खरीद फरोख्त के नाम पर 130.50 करोड़ की टैक्स चोरी का पकड़ा है।
दो लोगों को क्यों छोड़ा?
सूत्र बता रहे हैं कि कमल विहार और बशीरपुरा के जिन दो लोगों पर विभागीय अफसरों ने मेहरबानी दिखाई है, उनके मोबाइल, लैपटाप और कंप्यूटर से कई अहम जानकारी मिली थी। लेकिन इन दोनों ने शहर के एक बड़े चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) के साथ मिलकर विभाग के कुछ अधिकारियों से लाखों रुपए में डील की है, जिससे इन दोनों का नाम इस केस से बाहर निकाला जा सके।
इस पूरे मामले में अब जसविंदर माही उर्फ हैप्पी की गिरफ्तारी दिखाई गई है। जबकि इस पूरे खेल में इंडस्ट्रियल इलाके सोढ़ल का एक बड़ा ट्रांसपोर्टर, शहर का एक बड़ा चार्टर्ड अकाउंटेंट और प्लास्टिक कारोबर से जुड़े बड़े कारोबारी शामिल हैं। इन कारोबारियों की दिल्ली के बड़े कारोबारी से सेटिंग है।










