डेली संवाद, लखनऊ। GST Scam News: फर्जी जीएसटी फर्म बनाकर करोड़ों रुपये के फर्जी लेन-देन और कर चोरी करने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। साइबर क्राइम टीम और माल पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में इस मामले में दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने उनके कब्जे से तीन मोबाइल फोन और एक लैपटॉप भी बरामद किया है। आरोपित गरीब और जरूरतमंद लोगों को रुपये का लालच देकर उनके दस्तावेज हासिल करते थे और उन्हीं के नाम पर फर्जी कंपनियां बनाकर करोड़ों रुपये का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) बेचते थे।
पुलिस उपायुक्त (अपराध) कमलेश दीक्षित ने बताया कि इस मामले की शुरुआत 28 अगस्त 2025 को दर्ज एक शिकायत से हुई थी। राज्य कर विभाग के सहायक आयुक्त (GST ऑडिट अनुभाग) नरेश वर्मा ने माल थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। शिकायत में बताया गया था कि माल थाना क्षेत्र के इब्राहिमपुर में ‘रामकली एंटरप्राइजेज’ नाम से एक फर्जी फर्म बनाकर करीब 1.77 करोड़ रुपये का फर्जी आईटीसी क्लेम किया गया है।

साइबर क्राइम में FIR
शिकायत मिलने के बाद पुलिस और साइबर क्राइम टीम ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान पता चला कि जिस पते पर फर्म का रजिस्ट्रेशन कराया गया था, वहां न तो कोई कंपनी संचालित हो रही थी और न ही किसी तरह का व्यापार हो रहा था। यानी फर्म का पता और उसका कारोबार दोनों ही पूरी तरह से फर्जी पाए गए।
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पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपितों की पहचान चुंगा खां निवासी पहाड़पुर, थाना बिसवां जिला सीतापुर और सलमान रहमानी निवासी नवीउल्लाह रोड, बांसमंडी के रूप में हुई है।
गिरोह का तरीका बेहद सुनियोजित
डीसीपी के मुताबिक गिरोह का तरीका बेहद सुनियोजित था। आरोपी ऐसे लोगों को निशाना बनाते थे जो आर्थिक रूप से कमजोर होते थे। उन्हें 10 से 15 हजार रुपये देने का लालच देकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाते की जानकारी और मोबाइल नंबर हासिल कर लेते थे।

इसके बाद आरोपित फर्जी किरायानामा और बिजली के बिल जैसे दस्तावेज तैयार कर उन्हीं लोगों के नाम पर जीएसटी (GST) फर्म का पंजीकरण करा लेते थे। इन फर्जी कंपनियों के जरिए बोगस इनवाइस और ई-वे बिल बनाए जाते थे, जिससे कागजों पर बड़े पैमाने पर व्यापार होता हुआ दिखाया जाता था।
फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट
इन्हीं कागजी लेन-देन के आधार पर फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट तैयार किया जाता था और उसे कमीशन लेकर अन्य व्यापारियों को बेच दिया जाता था। इस तरह गिरोह ने करीब 1.77 करोड़ रुपये का फर्जी आईटीसी तैयार कर टैक्स सिस्टम को नुकसान पहुंचाया।
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ में गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में भी जानकारी मिली है। पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है। मामले में आगे की जांच जारी है और जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी की जा सकती है।








