डेली संवाद, जालंधर। Jalandhar News: स्थानीय निकाय विभाग के चीफ विजीलैंस अफसर और उनकी टीम ने आज जालंधर में कई कामर्शियल इमारतों और कालोनियों की जांच की। इस दौरान उनके साथ जालंधर नगर निगम के अफसर भी मौजूद थे। स्थानीय निकाय विभाग की टीम ने शहर में एक दर्जन से ज्यादा स्थानों पर चेकिंग की, जहां मौके पर उन्हें खामियां मिली हैं। चीफ विजीलैंस अफसर कुलविंदर सिंह ने कहा है कि रिपोर्ट सरकार को सौंपेंगे।
जालंधर (Jalandhar) के आरटीआई एक्टिविस्ट करणप्रीत सिंह द्वारा लगातार बिल्डिंग ब्रांच की शिकातें की जा रही हैं। जिसे देखते हुए आज स्थानीय निकाय विभाग के चीफ विजीलैंस अफसर (CVO) कुलविंदर सिंह और एमटीपी नरेश कुमार की टीम जालंधर (Jalandhar) पहुंची।

प्रोजैक्ट पर दरियादिली
स्थानीय निकाय विभाग की टीम ने जालंधर (Jalandhar) कैंट रेलवे स्टेशन के पास रेलवे लाइन लाइन से सटाकर बनाए जा रहा होटल मैरिटन के प्रोजैक्ट का जायजा लिया। आरोप है कि जिस जमीन पर यह प्रोजैक्ट बनाया जा रहा है, उसका करोड़ों रुपए बिजली बिल बकाया है, बावजूद नगर निगम और इनवेस्ट पंजाब के कुछ अफसरों ने इस प्रोजैक्ट पर दरियादिली दिखाई है।
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इसके बाद सीवीओ की टीम नगर निगम के कमिश्नर संदीप ऋषि के साथ मीटिंग की। नगर निगम के दफ्तर में एमटीपी इकबालप्रीत सिंह रंधावा और एटीपी के साथ भी मीटिंग की। इसके बाद विजीलैंस की टीम ने एटीपी विकास दुआ और इंस्पैक्टर गौरव ठाकुर को लेकर शहर के अलग अलग इलाकों में मुआयना किया।

डायमंड सिल्क वाली कामर्शियल इमारत
विभागीय विजीलैंस टीम ने बताया कि ब्रैंडरथ रोड पर डायमंड सिल्क वाली कामर्शियल इमारत की जांच की गई। इसके बाद फुटबाल चौक पर तीन मंजिला बन रही कामर्शियल इमारत की जांच की गई। इसके बाद टीम जेपी नगर में अवैध रूप से दो मंजिला बन रही मार्केट का निरीक्षण किया।
विभाग की टीम ने इसके बाद वेस्ट हलके की कई कालोनियों का भी दौरा किया। इस दौरान घासमंडी के पास चोपड़ा कालोनी के पास अवैध रूप से बन रही कोठियों का जायजा लिया। यहां अवैध रूप से 100 से ज्यादा कोठियां एक बिल्डर द्वारा बनाई जा रही है।

अवैध तरीके से कई फैक्ट्रियां
वेस्ट हलके के वरियाणा इलाके में भी टीम ने मुआयना किया। यहां अवैध तरीके से कई फैक्ट्रियां बन रही थी। जिसे देखकर विजीलैंस टीम ने कहा है कि इस पर सख्त एक्शन होगा। हालांकि विभागीय टीम कैंट हलके में जाना चाहती थी, लेकिन समय के अभाव में टीम वापस चंडीगढ़ लौट गई।







