डेली संवाद, मोगा। Punjab News: पंजाब के मोगा (Moga) में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा विवाद सामने आया है, जहां बाघापुराना के एसडीएम ने जिला उपायुक्त (DC) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। SDM बबनदीप सिंह वालिया ने डीसी सागर सेतिया पर मानसिक उत्पीड़न, दबाव बनाने और धमकाने के आरोप लगाते हुए पंजाब (Punjab) के चीफ सेक्रेटरी को लिखित शिकायत भेजी है।
इस मामले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है और अब यह विवाद अदालत तक पहुंच चुका है। एसडीएम द्वारा लिखी गई चिट्ठी में आरोप लगाया गया है कि उन्हें ब्लॉक समिति चेयरपर्सन और वाइस-चेयरपर्सन के चुनाव के दौरान एक खास उम्मीदवार के पक्ष में नतीजे घोषित करने के लिए दबाव डाला गया। उन्होंने कहा कि यह न केवल प्रशासनिक सिद्धांतों के खिलाफ था, बल्कि निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े करता है।

कॉल के जरिए धमकाया गया
जब उन्होंने इस दबाव को मानने से इनकार किया, तो उन्हें लगातार मानसिक रूप से परेशान किया जाने लगा। एसडीएम ने आरोप लगाया कि उन्हें बार-बार मीटिंग के लिए बुलाया गया और फोन कॉल के जरिए धमकाया गया। यहां तक कि छुट्टी वाले दिन भी उन्हें कॉल कर परेशान किया गया, जिससे वह मानसिक तनाव में आ गए। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें अलग-अलग नंबरों से जान से मारने की धमकियां मिलीं।
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इन परिस्थितियों के चलते उन्हें अपना फोन तक बंद करना पड़ा और अब उन्हें अपनी तथा अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता सताने लगी है। इस पूरे घटनाक्रम की जड़ 17 मार्च को बाघापुराना में हुए ब्लॉक समिति चुनाव हैं। उस दिन चेयरपर्सन और वाइस-चेयरपर्सन के पदों के लिए मतदान होना था, लेकिन चुनाव के दौरान स्थिति अचानक बिगड़ गई। एसडीएम के अनुसार, चुनाव स्थल पर कानून-व्यवस्था की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई, जिसके चलते चुनाव प्रक्रिया को पूरा नहीं किया जा सका।
बाघापुराना में हुए ब्लॉक समिति चुनाव
वहीं, दूसरी ओर शिरोमणि अकाली दल (SAD) और कांग्रेस के सदस्यों ने आरोप लगाया कि उन्हें चुनाव के दिन सुबह बुलाकर एक कमरे में बंद कर दिया गया, ताकि वे मतदान में हिस्सा न ले सकें। जब इस बात की जानकारी उनके समर्थकों को मिली, तो मौके पर भारी हंगामा शुरू हो गया। प्रदर्शनकारियों ने दीवारें फांदीं, खिड़कियां तोड़ीं और परिसर में घुसने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हुई।
स्थिति इतनी बिगड़ गई कि गुस्साई भीड़ ने परिसर के मुख्य द्वारों को बंद कर दिया, जिससे आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक अमृतपाल सिंह सुखनंद और एसडीएम खुद अंदर फंस गए। बाद में भारी पुलिस बल की मदद से उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया। हंगामे के बीच ही विधायक द्वारा सोशल मीडिया पर अपने उम्मीदवार की जीत का दावा भी किया गया, जबकि बाद में प्रशासन ने कोरम की कमी और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए चुनाव प्रक्रिया को अधूरा घोषित कर दिया।


अवैध रूप से रोका गया
इस पूरे मामले में एसडीएम ने निष्पक्ष जांच, अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने और उत्पीड़न रोकने की मांग की है। साथ ही उन्होंने एक महीने की छुट्टी और मोगा जिले से ट्रांसफर की भी मांग की है। दूसरी तरफ, डीसी सागर सेतिया ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि एसडीएम पर किसी प्रकार का कोई दबाव नहीं डाला गया। डीसी के मुताबिक, उन्हें एसडीएम की ओर से केवल दो लाइनों का एक संदेश मिला था, जिसमें बताया गया था कि कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब होने के कारण चुनाव पूरा नहीं हो सका।
डीसी ने यह भी बताया कि उसी दिन उन्हें कुछ ब्लॉक समिति सदस्यों की शिकायतें मिली थीं, जिनमें आरोप लगाया गया था कि उन्हें चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने से रोका गया और बीडीपीओ कार्यालय में अवैध रूप से रोका गया। इन शिकायतों के आधार पर उन्होंने तुरंत जांच के आदेश दिए थे।

मामला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा
डीसी ने हैरानी जताते हुए कहा कि चुनाव के पांच दिन बाद उन्हें एसडीएम द्वारा लगाए गए आरोपों की जानकारी मिली, जो पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाघापुराना ब्लॉक समिति चुनाव के संचालन में उनकी कोई सीधी भूमिका नहीं थी और पूरी जिम्मेदारी एसडीएम की थी। इसी बीच, मामला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है।
कोर्ट ने दोनों पक्षों को तलब करते हुए आज ही पेश होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा, 15 पंचायत समितियों द्वारा भी कोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिसमें चुनाव के दौरान बंधक बनाए जाने के आरोप लगाए गए हैं। फिलहाल, यह मामला प्रशासनिक टकराव के साथ-साथ चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब सभी की नजरें अदालत और जांच के नतीजों पर टिकी हैं, जो इस विवाद की सच्चाई को सामने लाएंगे।







