डेली संवाद, बरनाला। Punjab News: पंजाब के बरनाला जिले में रविवार सुबह एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। जिले के फरवाही गांव में एक मकान के अचानक गिर जाने से उसमें सो रहे 3 मजदूर मलबे के नीचे दब गए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा सुबह करीब सवा 4 बजे हुआ, जब सभी मजदूर गहरी नींद में सो रहे थे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बरनाला (Barnala) में जिस मकान में यह हादसा हुआ, उसकी नींव धंस चुकी थी और उसे जैक की मदद से ऊपर उठाकर मरम्मत का काम किया जा रहा था। यह काम पिछले कई हफ्तों से जारी था और इसके लिए मोगा के एक ठेकेदार को जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

मकान की दीवार एक तरफ झुक गई
मरम्मत के काम में कुल 4 मजदूर लगे हुए थे, जो काम के बाद उसी मकान में ही सोते थे। हालांकि, घटना से एक रात पहले यानी शनिवार को एक मजदूर अपने घर चला गया था, जिससे उसकी जान बच गई। हादसे के समय मकान के अंदर केवल 3 मजदूर मौजूद थे, जो नींद में ही मलबे के नीचे दब गए। गांव के सरपंच जगसीर सिंह ने बताया कि रविवार सुबह करीब 4:15 बजे अचानक मकान की दीवार एक तरफ झुक गई और देखते ही देखते पूरी इमारत भरभराकर गिर गई।
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हादसे के समय एक व्यक्ति मकान के बाहर गली में मौजूद था, जिसने पूरी घटना को अपनी आंखों से देखा और तुरंत गांव के लोगों को इसकी सूचना दी। मकान गिरने की तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग घबरा गए और तुरंत मौके पर इकट्ठा हो गए। हालात की गंभीरता को देखते हुए गुरुद्वारा साहिब में अनाउंसमेंट कर गांव के लोगों से मदद की अपील की गई।
मलबे में दबे मजदूरों के शव बाहर निकाले
इसके बाद ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए खुद ही राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर मलबा हटाने की कोशिश शुरू की और साथ ही पुलिस को भी सूचना दी। सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। प्रशासन ने जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का कार्य शुरू किया। कई घंटों की मशक्कत के बाद मलबे में दबे तीनों मजदूरों के शव बाहर निकाले गए।
तीनों घायलों को तुरंत सिविल अस्पताल बरनाला ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतकों की पहचान बॉबी सिंह, प्रिंस और गुरजीत सिंह के रूप में हुई है, जो सभी मोगा जिले के रहने वाले बताए जा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मकान की दीवारों में सीवर का पानी घुस जाने के कारण उसकी नींव कमजोर हो गई थी, जिससे वह एक तरफ झुक गया था। इसी वजह से उसे जैक की मदद से उठाकर ठीक करने का काम चल रहा था। लेकिन अचानक संतुलन बिगड़ने से पूरी इमारत गिर गई और यह दर्दनाक हादसा हो गया।
गांव में शोक की लहर
घटना के बाद भी प्रशासन ने कई घंटों तक मलबा हटाने का काम जारी रखा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं कोई अन्य व्यक्ति मलबे के नीचे दबा न हो। सरपंच के अनुसार, शुरू में आशंका जताई जा रही थी कि 4 मजदूर मलबे में दबे हो सकते हैं, लेकिन बाद में पुष्टि हुई कि चौथा मजदूर पहले ही अपने घर जा चुका था।
इस हादसे के बाद गांव में शोक की लहर फैल गई है। मृतकों के परिवारों में मातम छा गया है। मौके पर पहुंचे बरनाला के विधायक कुलदीप सिंह काला ढिल्लों ने घटना पर दुख व्यक्त किया और कहा कि वह प्रशासन से बात कर मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि मकान मालिक को हुए नुकसान के लिए भी सरकार से सहायता दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

खतरनाक हालात में काम करना पड़ता था
वहीं, मृतक बॉबी सिंह की मां चरणजीत कौर ने रोते-बिलखते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनका बेटा ही उनके परिवार का आखिरी सहारा था। उनके पति और एक बेटे की पहले ही मौत हो चुकी है। अब उनके सामने परिवार चलाने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने ठेकेदार पर आरोप लगाया कि वह मजदूरों से नशा करवाकर काम कराता था और उन्हें मजबूरी में खतरनाक हालात में काम करना पड़ता था।
चरणजीत कौर ने सरकार से गुहार लगाई कि उनके परिवार को आर्थिक मदद दी जाए, ताकि वे अपने पोते-पोतियों का पालन-पोषण कर सकें। उन्होंने कहा कि ठेकेदार ने घटना के बाद परिवार से कोई संपर्क तक नहीं किया, जिससे उनका दुख और बढ़ गया है।
आगे की कार्रवाई की जाएगी
फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हादसे के पीछे लापरवाही किस स्तर पर हुई। प्रशासन का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह हादसा एक बार फिर निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर करता है, जिसमें मजदूरों की जान जोखिम में डाल दी जाती है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने सरकार से मांग की है कि मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।







