डेली संवाद, आगरा। GST News: उत्तर प्रदेश के आगरा में एक ट्रांसपोर्टर की संदिग्ध मौत ने जीएसटी (GST) विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक की पहचान अली असगर के रूप में हुई है, जिन्होंने चार दिन पहले ही एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जीएसटी (GST) अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। अब उनकी अचानक हुई मौत को लेकर परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है।
जानकारी के मुताबिक, अली असगर ने जूता कारोबारी रवि मोहन के साथ मिलकर कुछ दिन पहले प्रेस वार्ता की थी। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया था कि जीएसटी (GST) अधिकारी उनसे अवैध रूप से पैसे की मांग कर रहे थे। अली असगर का कहना था कि रकम देने के बावजूद उनकी जूतों से भरी गाड़ी को नहीं छोड़ा गया। उन्होंने इस पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, आईजीआरएस पोर्टल और प्रमुख सचिव तक भी पहुंचाई थी।
GST अफसरों की शिकायत
परिजनों का दावा है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद से ही अली असगर और उनके सहयोगियों पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था। उनसे शिकायत वापस लेने के लिए कहा जा रहा था। आरोप है कि जीएसटी (GST) अधिकारियों द्वारा अलग-अलग नंबरों से कॉल कर धमकियां दी जा रही थीं। यहां तक कि जान से मारने की चेतावनी भी दी गई थी।

अली असगर के बेटे सजमल ने अपने पिता की मौत को साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि यह एक सुनियोजित हत्या हो सकती है, क्योंकि उनके पिता लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। सजमल ने संबंधित जीएसटी (GST) अधिकारियों पर सीधे आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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परिजन दो जीएसटी (GST) की महिला अधिकारियों पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा रहे हैं। ट्रांसपोर्टर का एक महिला जीएसटी अधिकारी से पहले से विवाद चल रहा है। महिला अधिकारी उनके ऊपर चौथ मांगने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज करा चुकी हैं। ट्रांसपोर्टर भी न्यायालय में प्रार्थना पत्र देने के साथ कई जगह शिकायत कर चुके हैं।
नवंबर 2025 से चल रहा विवाद
असगर अली के बेटे अब्दुल ने बताया कि नवंबर 2025 में उनका एक ट्रक जीएसटी (GST) की टीम ने पकड़ लिया था। दस्तावेज दिखाने पर भी 4.5 लाख रुपये जुर्माना और टैक्स के नाम पर लिया गया था। 3 लाख 6 हजार की रसीद दी गई थी। गाड़ी की क्षमता से अधिक माल दिखाया गया था। मामले की पिता ने विभाग के अधिकारियों के साथ लोकायुक्त से शिकायत की थी। न्यायालय में भी प्रार्थनापत्र दिया गया था। दबाव बनाने के लिए पिता पर चौथ मांगने का आरोप लगाकर प्राथमिकी दर्ज करा दी गई थी।
उधर, जीएसटी (GST) के अधिकारी पंकज गांधी ने कहा है कि सूचना के आधार पर टीम ने ट्रक को रोका था। विवाद होने पर 112 को सूचना दी थी। पुलिस की मौजूदगी में ट्रक को कब्जे में लेकर रात करीब तीन बजे कार्यालय में दाखिल किया गया था। मृतक के परिवार के प्रति सहानुभूति है। जांच एजेंसी जो भी सहयोग चाहेंगी, विभाग उन्हें सहयोग देगा।
GST विभाग में भ्रष्टाचार
वहीं, इस घटना के बाद प्रदेशभर में कारोबारियों के बीच आक्रोश का माहौल है। व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी (GST) विभाग में भ्रष्टाचार की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन इस तरह की घटना ने डर और असुरक्षा की भावना को और बढ़ा दिया है। कई व्यापारियों ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया कि वे भी इसी तरह के दबाव और उत्पीड़न का सामना कर चुके हैं, लेकिन डर के कारण खुलकर सामने नहीं आ पाते।
इस मामले ने प्रशासन और सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। अब देखना होगा कि क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच होती है और दोषियों पर कार्रवाई होती है या नहीं। फिलहाल, अली असगर की मौत ने कई अनुत्तरित सवाल छोड़ दिए हैं, जिनका जवाब मिलना बेहद जरूरी है।








