डेली संवाद, कनाडा। Canada News: कनाडा (Canada) के ब्रैम्पटन (Brampton) शहर में त्रिवेणी मंदिर के बाहर खालिस्तानी समर्थकों ने भारत विरोधी नारे लगाए, जिससे लगभग दो घंटे तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
पुलिस ने सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में बल तैनात किया और आसपास के इलाके में 100 मीटर का सेफ्टी जोन बनाया। इस दौरान उन्होंने नारे लगाते हुए हरियाणा-दिल्ली और बीकानेर पर अपना हक बताया।
पीले खालिस्तानी झंडे लहराए
वहीं स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 40-50 प्रदर्शनकारी मंदिर के सामने इकट्ठा हुए और पीले खालिस्तानी झंडे लहराए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने विवादित पोस्टर भी दिखाए।
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फ्रीलांस पत्रकार दर्शन महाराजा ने बताया कि प्रदर्शन में शामिल लोगों को प्रत्येक को 100 कनाडाई डॉलर दिए गए, जिससे यह दावा सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वहीं स्थानीय हिंदू समुदाय और त्रिवेणी मंदिर प्रशासन ने इस प्रदर्शन की निंदा की।

सोशल मीडिया पर चर्चा
हिंदू कनाडियन फाउंडेशन (HCF) ने कहा कि पूजा स्थलों के बाहर राजनीतिक प्रदर्शन भक्तों को डराने और शांति भंग करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा छिड़ गई। भारतीय और हिंदू यूजर्स ने इसे आलोचना के साथ देखा, जबकि सिख समुदाय के एक हिस्से ने इन प्रदर्शनकारियों से खुद को अलग किया।
सड़क पर खालिस्तान समर्थक जमा
वहीं कुछ प्रदर्शनकारियों ने इसे अपने वैचारिक संघर्ष के रूप में बताया और पैसे मिलने के दावे को खारिज किया। दरअसल 5 मार्च की दोपहर जब मंदिर में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए इकट्ठे हो रहे थे, तभी दोपहर लगभग 12 बजे से 2 बजे के बीच मंदिर के सामने वाली सड़क पर खालिस्तान समर्थक जमा होने शुरू हो गए।
प्रतिबंधित संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) हिंदू मंदिरों के बाहर विरोध दर्ज करवाया। इसी तरह का एक प्रदर्शन ब्रिटिश कोलंबिया के सरे स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर के बाहर भी प्रस्तावित था, लेकिन वहां खालिस्तानियों को प्रदर्शन नहीं करने दिया गया। ब्रिटिश कोलंबिया के सरे स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर के बाहर इसी तरह का प्रदर्शन रोक दिया गया।
कोई हिंसा या शोर-शराबा नहीं
प्रदर्शन की संवेदनशीलता को देखते हुए पील रीजनल पुलिस मुस्तैद रही। मंदिर के आसपास की सड़कों पर पुलिस की सफेद SUV लगातार गश्त कर रही थीं। किसी भी संभावित झड़प को रोकने के लिए 100 मीटर का सेफ्टी जोन बनाया गया था। पुलिस की मुस्तैदी के कारण कोई हिंसा या शोर-शराबा नहीं हुआ।








