महाबीर सेठ
डेली संवाद, जालंधर
जालंधर के सीटी इंस्टीट्यूट में पकड़े गए आतंकियों को पुलिस ने पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया है। जालंधर समेत पंजाब में बड़ी वारदात करने की फिराक में रहे इन आतंकी सीटी इंस्टीट्यूट में कई दिनों से ‘पनाह’ लिए हुए थे। हैरानी की बात तो यह है कि सीटी इंस्टीट्यूट में कभी भी बड़ा धमाका हो सकता है, जिससे हजारों छात्रों की जान जा सकती थी, लेकिन इसे लेकर सीटी इंस्टीट्यूट कतई गंभीर नहीं है।
अगर आपके बच्चे सीटी इंस्टीट्यूट में पढ़ते हैं तो यह जान लीजिए कि आपके बच्चे सुरक्षित नहीं है। इसका खुलासा खुद जालंधर के पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने किया है। हैरानी की बात तो यह है कि कश्मीर समेत गुलाम कश्मीर के युवा यहां आते हैं आसानी से दाखिला लेते हैं और आतंक की फैक्ट्री चलाते हैं। बड़ी हैरानी की बात है कि कैंपस में AK 47 और आरडीएक्स जैसे घातक विस्फोटक पदार्थ आसानी से आ जाता है। इसका मतलब यही है कि सीटी इंस्टीट्यूट की सुरक्षा रामभरोसे है।
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सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि सीटी इंस्टीट्यूट में एके 47 और आरडीएक्स पहुंचा कैसे। क्या इसे पहुंचाने में सीटी इंस्टीट्यूट प्रबंधन के किसी अफसर या मुलाजिम का हाथ है, इस सवाल पर पुलिस कमिश्नर भी इनकार नहीं करते हैं। वे कहते हैं कि बिना किसी स्थानीय लोगों की मदद से कैंपस में एके 47 और आरडीएक्स नहीं लाया जा सकता है। जिससे पुलिस सीटी इंस्टीट्यूट प्रबंधन से भी पूछताछ करेगी।
यह है मामला
आपको बता दें कि आज सुबह पंजाब और जम्मू-कश्मीर की पुलिस ने संयुक्त छापामारी करते करते हुए सीटी इंस्टीट्यूट के कैंपस में बने हॉस्टल में दो आतंकियों को पकड़ा है इनके इनमें से एक गुलाम कश्मीर के आतंकवादी जाकिर मूसा का चचेरा भाई बताया जा रहा है जबकि दूसरा उसका दोस्त है।
पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर के मुताबिक इस पूरे मामले में सीटी इंस्टीट्यूट की घोर लापरवाही सामने आई है जिसे लेकर पुलिस सीटी इंस्टीट्यूट के खिलाफ जांच करेगी सीटी इंस्टीट्यूट में दो आतंकवादी कैसे ak-47 और आरडीएक्स विस्फोटक पदार्थ लेकर पहुंचते हैं यह जांच के बाद ही पता चल सकेगा बड़े हैरानी की बात है कि देश के लगभग सभी कोने से पढ़ने आते स्टूडेंट सीटी इंस्टीट्यूट केंपस में मौत के साए में रह रहे हैं हैरानी की बात तो यह है की सीटी इंस्टीट्यूट प्रबंधन इसे गंभीरता से नहीं ले रहा।
इन आतंकियों की आखिर कैंपस के अंदर और बाहर कौन मददगार है?
उधर, सीटी ग्रुप आफ इंस्टीट्यूट के डायरैक्टर मनबीर सिंह एक अखबार को दिए बयान में कहा है कि पुलिस छापेमारी में उन्होंने पुलिस का सहयोग किया। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि कैंपस में एके 47 और आरडीएक्स पहुंचा कैसे? इन आतंकियों की आखिर कैंपस के अंदर और बाहर कौन मददगार है? क्या सीटी इंस्टीट्यूट में पढ़ते बच्चों की सुरक्षा से प्रबंधन खिलवाड़ नहीं कर रहा है?
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