दलित छात्रों के हक पर ‘डाका’: 250 करोड़ वजीफा घोटाले में LPU समेत तीन यूनिवर्सिटी पर केस में नया मोड़, दर्ज होगी एक औऱ FIR, लवली यूनिवर्सिटी ने रखा अपना पक्ष, देखें एफआईआर की कॉपी

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⏱️ 7 मिनट पढ़ने का समय|📝 831 शब्द|📅 01 Dec 2018

एसएफआई ने आरोप लगाया, कहा-सरकार ने दबाया 250 करोड़ का छात्रवृत्ति घोटाला

डेली संवाद, जालंधर/शिमला

हिमाचल के 250 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले में छोटा शिमला थाने में पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU), हिमाचल के कांगड़ा जिले का शिक्षण संस्थान और कर्नाटक के वादुखार केंद्र के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का मामला दर्ज होने के बाद पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न करने पर एसएफआई राज्य कमेटी ने रोष मार्च निकालते हुए प्रदर्शन किया है।

एसएफआई ने आरोप लगाया है कि छात्रवृत्ति में हुए लगभग 250 करोड़ के घोटाले को सरकार ने दबाया है। एसएफआई के प्रदेशाध्यक्ष विक्रम कायथ का कहना है कि वर्ष 2016 से लेकर अभी तक एससी एसटी छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिली है। जिसमें लगभग 250 करोड़ रुपए की छात्रवृत्ति के घोटाले का अनुमान है।

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वर्तमान की भाजपा सरकार ने एससी/एसटी छात्रवृत्ति घोटाले की सीबीआई जांच का आश्वासन दिया था, लेकिन सरकार की मंशा इसे उजागर करने से कहीं ज़्यादा दबाने की रही है। हिमाचल के शिक्षा विभाग ने गृह विभाग के जरिए इस मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई को देने की कवायद शुरू की थी। वह अब तक इस विषय पर पूरी तरह मौन है। मामले की जांच कर रही शिमला पुलिस भी इस मामले पर पूरी तरह से खामोश बैठी है।

एसएफआई का मानना है कि एससी एसटी छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति मामले में प्रदेश सरकार द्वारा की जा रही लेटलतीफी यह दर्शाती है कि प्रदेश सरकार अपने चहेतों को बचाने की कोशिश कर रही है। प्रदेश सरकार के साथ केंद्र सरकार भी एससी एसटी छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति पिछले 3 वर्षों से मुहैया नहीं करवा पा रही है।

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पिछले 3 सालों से लगभग 11156 करोड रुपए की एससी एसटी आज वर्तमान में प्रदेश व केंद्र की भाजपा सरकार छात्रों को छात्रवृत्ति मुहैया न करवाकर छात्रों को उच्च शिक्षा से दूर करने की कोशिश कर रही है। एसएफआई का कहना है कि प्रदेश में हुए एससी/एसटी छात्रवृत्ति घोटाले की सीबीआई जांच जल्द करवाई जाए।

LPU ने रखा अपना पक्ष, खुद को बताया पाक-साफ

शिक्षा विभाग में हुए 215 करोड़ के स्कॉलरशिप घोटाले में जल्द ही दूसरी एफआईआर दर्ज होगी। इसे लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) दर्ज करवाएगी। यूनिवर्सिटी ने सचिव शिक्षा डा. अरुण शर्मा के समक्ष पक्ष रखा है। स्कॉलरशिप में जो घोटाला सामने आया है उसमें उनकी यूनिवर्सिटी का नाम भी जोड़ा जा रहा है। यूनिवर्सिटी ने दावा किया है कि उन्होंने न तो स्कॉलरशिप में कोई गड़बड़ी की है और न ही कोई घोटाला।

एलपीयू की फ्रेंचाइजी किसी अन्य व्यक्ति ने स्टडी सेंटर कांगड़ा जिला के फतेहपुर में खोला था। इस सेंटर में एडमिशन करवाई गई। कुछ फेक एडमिशन अपने स्तर पर ही संस्थान ने करवाई। जिसका रिकार्ड तक यूनिवर्सिटी को नहीं भेजा गया। यूनिवर्सिटी के पास जितनी एडमिशन का रिकाॅर्ड था उसके अनुसार स्टडी मेटिरियल भेजा गया और एग्जामिनेशन फीस ली गई।

यह है मामला

वित्तीय वर्ष 2013-14 से 2016-17 तक 924 निजी संस्थानों के छात्रों को 210.05 करोड़ और 18,682 सरकारी संस्थानों के छात्रों को मात्र 56.35 करोड़ रुपये छात्रवृत्ति दिए जाने का खुलासा हुआ है। जांच में पता चला है कि छात्रवृत्ति की कुल रकम का करीब 80 फीसद बजट सिर्फ 11 फीसद निजी संस्थानों के छात्रों को दिया गया है।

आरोप है कि इन संस्थानों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर छात्रवृत्ति की मोटी रकम हड़पी है। इसके चलते जनजातीय क्षेत्रों के छात्रों को कई साल तक स्कॉलरशिप नहीं मिल पाई। ऐसे ही एक छात्र की शिकायत पर इस फर्जीवाड़े से पर्दा उठा है।

शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट के मुताबिक 2013-14 से 2016-17 तक प्री और पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप के तौर पर छात्रों को कुल 266.32 करोड़ दिए गए हैं। इनमें गड़बड़ी पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप में हुई है। पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप में कुल 260. 31 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट में क्या

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जांच रिपोर्ट के अनुसार चार साल में 2.38 लाख विद्यार्थियों में से 19,915 को चार मोबाइल फोन नंबर से जुड़े बैंक खातों में छात्रवृत्ति जारी की गई। जबकि 360 विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति चार ही बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। 5,729 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने में तो आधार नंबर का प्रयोग ही नहीं किया गया है।

छात्रवृत्ति आवंटन में निजी शिक्षण संस्थानों ने नियमों को ताक पर रख दिया। वहीं, 2013-14 से लेकर 2016-17 तक शिक्षा विभाग ने किसी भी स्तर पर छात्रवृत्ति योजनाओं की मॉनीटरिंग नहीं की।

वहीं, इस संबंध में जालंधर स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के पीआरओ हरप्रीत सिंह से जब डेली संवाद डाट कॉम ने मोबाइल पर बात करना चाहा तो उन्होंने इस संबंध में कोई भी बातचीत नहीं की। फिर भी अगर एलपीयू प्रबंधन की तरफ से अपना पक्ष रखना चाहते हैं तो डेली संवाद डाट काम उसे हूबहू प्रकाशित करेगा। 

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