भोगपुर में गरजे सुखबीर बादल, कहा- किसानों को बकाया देने से इंकार कर रहे अफसरों पर दर्ज हो केस

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⏱️ 5 मिनट पढ़ने का समय|📝 530 शब्द|📅 05 Dec 2018
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महाबीर जायसवाल
डेली संवाद, भोगपुर (जालंधर)

शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल ने कहा है कि उन सभी अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किए जाएं, जिन्होंने गन्ना उत्पादकों को उनके बकाया देने से इंकार किया है। उन्होंने यह भी मांग की है कि गन्ने की पेराई तथा किसानों के बकाया सुनिश्चित समय पर अदायगी को आवश्यक बनाने के लिए सरकार निजी चीनी मिलों को अपने अधिकार में ले।

किसानों के जनसमूह को संबोधित करते हुए अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की निंदा करते हुए कहा कि गन्ना उत्पादकों से हो रही बेइंसाफी के कारण किसानों में बढ़ रही बैचेनी के बावजूद मुख्यमंत्री के पास किसान नेताओं से मिलने के लिए जरा भी समय नही है। इसके बिल्कूल उल्ट पूर्व मुख्यमंत्री परकाश सिंह बादल लोगों तथा खासतौर पर किसानों को हमेशा ही समय देते हैं।

परकाश सिंह बादल ने 2015-16 में किसानों को 50 रूपए प्रति क्विंटल का बोनस दिया था

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सुखबीर ने कहा कि परकाश सिंह बादल ने 2015-16 में सरकार की तरफ से किसानों को 50 रूपए प्रति क्विंटल का बोनस दिया था। मौजूदा सरकार को भी यह करना चाहिए। यह टिप्पणी करते हुए कि अकाली वर्कर पहले ही फगवाड़ा में किसान आंदोलन में भाग ले चुके हैं तथा इसके अलावा वे गन्ना उत्पादकों को इंसाफ दिलाने के लिए अपनी तरफ से भी संधर्ष कर रहें हैं, बादल ने कहा कि सरकार को तुरंत ब्याज समेत किसानों को 417 करोड़ रूपए का बकाया जारी करने चाहिए।

अकाली दल के अध्यक्ष ने कहा कि कितनी निंदनीय बात है कि सरकार उन निजी चीनी मिलों के आगे बेबस महसूस कर रही है, जो पिछले एक महीने से गन्ने की पेराई करने से इंकार कर रहीं हैं। उन्होने कहा कि सरकार को इन मिल मालिकों को सही रास्ते पर लाना चाहिए यां फिर मिलों को अपने अधिकार क्षेत्र में ले लेना चाहिए।

फसल बेचने के लिए 100 रूपए से लेकर 150 रूपए प्रति क्विंटल तक की रिश्वत देनी पड़ी

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बादल ने कहा कि सरकार ने न सिर्फ गन्ना उत्पादकों का बल्कि धान उत्पादकों का भी नुकसान किया है। उन्होंने कहा पहले सरकार ने धान की बिजाई दस दिन लेट करवा दी, जिससे पैदावार कम हो गई तथा फसल में नमी की मात्रा बढ़ गई। उन्होंने कहा कि किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए 100 रूपए से लेकर 150 रूपए प्रति क्विंटल तक की रिश्वत देनी पड़ी। इससे गेंहू की बिजाई भी पिछड़ गई, जिसके कारण गेंहू की पैदावार पर भी असर पड़ेगा।

इस अवसर पर पार्टी के सीनियर नेताओं ने किसानों के हक में आंदोलन को तेज करने तथा किसानों को झूठे केसों से बचाने के लिए उनके साथ डटकर खड़े होने का ऐलान किया। सिकंदर सिंह मलूका, बीबी जागीर कौर, सोहन सिंह ठंडल, गुरप्रताप सिंह बडाला, पवन कुमार टीनू , बलदेव खैहरा, सुरेंद्र सिंह बुल्लेवाल राठां, बलजीत सिंह नीलामहल, सतपाल मल, कुलवंत सिंह मनन, अमरजीत सिंह थिंद तथा सर्बजोत सिंह साबी भी शामिल थे।

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