‘मलाई’ काट रहे एपीजे, एमजीएन समेत इन संस्थानों को शो-कॉज नोटिस, कभी सेवाभाव बोल कर कौड़ियों के भाव हथियाई थी अरबों की सरकारी संपत्ति, रद्द हो सकती है लीज

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⏱️ 3 मिनट पढ़ने का समय|📝 381 शब्द|📅 06 Dec 2018

महाबीर जायसवाल
डेली संवाद, जालंधर

गरीब लोगों की सेवा और मुफ्त एजुकेशन के नाम पर अरबों रुपए की संपत्ति पर कब्जा कर बैठे शहर के कई संस्थानों को इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ने शो-कॉज नोटिस जारी किए हैं। इसमें एपीजे कालेज आफ फाइन आटर्स, एमजीएन स्कूल, केएल सहगल मैमोरियल, दशमेश एजुकेशनल ट्रस्ट को नोटिस भेजा गया है।

'मलाई' काट रहे एपीजे, एमजीएन समेत इन संस्थानों को शो-कॉज नोटिस, कभी सेवाभाव बोल कर कौड़ियों के भाव हथियाई थी अरबों की सरकारी संपत्ति, रद्द हो सकती है लीज

इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की ईओ सुरिंदर कुमारी ने बताया कि एपीजे कालेज आफ फाइन आट्र्स सबसे महंगा स्कूल है। जबकि स्कूल प्रबंधन को गरीबों की सेवा के लिए लीज में जमीन दी गई है। लेकिन कालेज प्रबंधन अब पूरी तरह से कामर्शियल हो गया है। बच्चों से मोटी फीस वसूल रहा है। जबकि गरीब बच्चों का एडमिशन तक नहीं होता। 

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'मलाई' काट रहे एपीजे, एमजीएन समेत इन संस्थानों को शो-कॉज नोटिस, कभी सेवाभाव बोल कर कौड़ियों के भाव हथियाई थी अरबों की सरकारी संपत्ति, रद्द हो सकती है लीज

इसी तरह एमजीएन स्कूल भी सरकारी संपत्ति को कौड़ियों के भाव लीज पर लेकर मनमानी कर रहा है। लीज पर जमीन लेते वक्त जिस शर्त और नियम बताए थे, उसे लागू नहीं किया जा रहा है। एमजीएन में मोटी फीस वसूली जाती है। यही नहीं यहां कामर्शियल उपयोग किया जा रहा है।

इसके साथ ही केएल सहगल मैमोरियल और दशमेश एजुकेशनल ट्रस्ट भी पूरी तरह से कामर्शियल हो गए हैं। जिस वक्त सरकार से जमीन लीज पर ली गई थी, उस समय कहा गया था कि वे लोग सेवा भावना से जमीन लीज पर लेकर लोगों की सेवा करेंगे। लेकिन अब ये सभी कमाई का अड्डा बन गए हैं।

उल्लंघन करने पर रद्द हो सकती है लीज

इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के अफसरों के मुताबिक इन लोगों ने सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग किया है। जिस मकसद से सरकार ने इन्हें कौड़ियों के भाव जमीन लीज पर दी, वह पूरा नहीं हो रहा है। जिससे इऩके लीज खत्म किए जा सकते हैं। इसीलिए इन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। 

नोट: एपीजे, एमजीएन, केएल सहगल मैमोरियल ट्रस्ट और दशमेश एजुकेशनल ट्रस्ट के प्रबंधकों से पक्ष लेने के लिए डेली संवाद डॉट कॉम के संवाददाता ने संपर्क किया, लेकिन इन लोगों ने कोई जवाब नहीं दिया। भविष्य में इन संस्थानों की तरफ से कोई प्रतिक्रिया आई या इनका पक्ष हमें प्राप्त हुआ तो उसे जरूर प्रकाशित किया जाएगा।

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